महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 10 फरवरी। दुर्ग जिले के भिलाई-3 के समीप जंजगिरी धाम से शिव महापुराण कथा वाचन के लिए महासमुंद पहुंचे नारायण महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में परिवारों में मतभेद बढ़ रहे हैं और संयुक्त परिवारों की संख्या कम होती जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके अनुसार पारिवारिक विघटन के कारण मतांतरण जैसी प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं। यह बातें उन्होंने प्रेसवार्ता में कहीं।
नारायण महाराज ने बताया कि वे श्री राधे निकुंज धाम, जंजगिरी के माध्यम से पिछले दस वर्षों से सनातन धर्म से जुड़े कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम के माध्यम से तीन प्रमुख प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं। इनमें निर्धन बेटियों का विवाह कराना शामिल है, जिसका आयोजन हर वर्ष शिवरात्रि और आश्रम के वार्षिक उत्सव के अवसर पर किया जाता है। इसके अलावा रोहिणी धाम में गौसेवा की जा रही है।
उन्होंने बताया कि वे पूर्व में एक निजी कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। वृंदावन में गुरुओं और संतों के जीवन से प्रेरित होकर उन्होंने कथा वाचन का मार्ग अपनाया और पिछले दस वर्षों से इस कार्य में लगे हुए हैं।
एक प्रश्न के उत्तर में नारायण महाराज ने कहा कि भगवान शिव ने अपने परिवार को एक सूत्र में बांधकर रखा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शिव का वाहन बैल है और माता पार्वती का वाहन शेर, जो स्वभाव से भिन्न हैं। इसी प्रकार कार्तिकेय का वाहन मयूर, गणेश का वाहन चूहा और शिव के गले में सर्प है, फिर भी परिवार के सभी सदस्य शिव के प्रति समर्पित हैं। उनके अनुसार आज समाज को इसी प्रकार के पारिवारिक समन्वय की आवश्यकता है। नारायण महाराज ने कहा कि परिवार से समाज और समाज से देश का निर्माण होता है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना आवश्यक है। साथ ही, परिवार के बुजुर्गों की बातों को समझते हुए उनके साथ तालमेल बनाकर रखना चाहिए।


