कोण्डागांव
भारतमाला प्रोजेक्ट बनाने से छत्तीसगढ़ की दक्षिण भारत से कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी, कारोबार में भी व्यापक असर पड़ेगा
प्रकाश नाग
केशकाल, 9 अक्टूबर (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। छत्तीसगढ़ का पहला ट्विन टनल केशकाल से 25 किमी दूर मांझीनगढ़ के पहाडिय़ों में बन रहा है। इस टनल के बन जाने से रायपुर- विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे जो छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश की दूरी 130 किमी कम हो जाएगी। इस टनल का पहला भाग की खुदाई पूरी हो गई, वहीं दूसरा भाग भी नवम्बर तक पूरा हो जाएगा और सितंबर 2026 तक यह टनल पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी ।
छत्तीसगढ़ के इतिहास में दर्ज होगा माँझीनगढ़ का पहला ट्विन टनल
छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहली ऐसी सडक़ है जिसमें 2.8 किलोमीटर लंबा टनल निर्माण करवाया जा रहा है। टनल का कार्य जनवरी 2024 में प्रारंभ किया गया है और सितम्बर 2026 तक पूर्ण करना है । टनल 2 भागों में बनाया जा रहा जो 16-16 मीटर चौड़ी है। आने और जाने वाली वाहनों के लिए अलग अलग टनल निर्धारित की गई है।
दोनों टनल में क्रमश: 3-3 लेन सडक़ का निर्माण होगा। वहीं 500-500 सौ मीटर में वॉल बनाया गया है । यदि कोई गाड़ी खराब हो जाता है या कोई अन्य इमरजेंसी होता है तो तुरन्त दूसरे सडक़ मार्ग से मुड़ भी सकता है। इसके अलावा टनल के भीतर वेंटिलेशन, कैमरे, एमरजेंसी एस्केप, टेलीफोन आदि संसाधन भी उपलब्ध होंगे।
एनएच 30 से केशकाल से 25 किमी की दूरी में मांझीनगढ़ के पहाडिय़ों में बन रहा है ट्विन टनल
राष्ट्रीय राजमार्ग 30 केशकाल से 25 किमी दूर ग्राम पंचायत खल्लारी अंतर्गत मांझीनगढ़ के पहाडिय़ों के नीचे 2.8 किमी तक छत्तीसगढ़ का पहला ट्विन टनल बनाया जा रहा है। यह टनल भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत बन रहा। जिस तरह से केशकाल घाट में आए दिन जाम लगता है उससे राहगीरों को छुटकारा मिल जाएगा। क्योंकि आने वाले समय में केशकाल बाईपास भी बन जाएगा और भारतमाला सडक़ भी बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे सभी बड़ी-बड़ी गाडिय़ां दूसरे रास्ते से जाएगी, जिसके कारण केशकाल घाट में जाम नहीं लगेगा ।
छत्तीसगढ़ की दक्षिण भारत से कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी, व्यापार में भी व्यापक असर पड़ेगा
इस महत्वाकांक्षी प्रयास का उद्देश्य रायपुर और विशाखापत्तनम के बीच यात्रा जो 12 घंटे से घटाकर मात्र सात घंटे करना है। वर्तमान में लगभग 594 किलोमीटर दूरी तय करना पड़ता था । यह सुरंग रायपुर को विशाखापत्तनम से जोडऩे वाले 464 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले एक्सप्रेसवे का एक महत्वपूर्ण खंड है, जिसे भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है।
सुरंग में सिविलियन का प्रवेश निषेध, एनएचएआई से परमिशन के बाद ही मिलता है प्रवेश
टनल मैनेजर जी. पुल्लाय्या से चर्चा करने पर बताया कि सितंबर 2026 तक हमारा टनल का कार्य पूर्ण हो जाएगा। अभी फिलहाल टनल का पहला भाग 2.8 किलोमीटर की खुदाई कंप्लीट हो चुका है। जिसकी अभी सफाई जारी है। इसके साथ ही दूसरे भाग भी 2.8 किमी की खुदाई नवम्बर तक पूरा हो जाएगा। इस दौरान सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दे रहे हैं जब तक एनएचएआई से अनुमति नहीं मिलता है। साथ ही इस टनल के अंदर जो भी प्रवेश करते हैं उनका बाकायदा रजिस्टर में नाम लिखा जाता है और ड्रेस कोड दिया जाता है। इसके साथ ही वापस आने के बाद दोबारा उसे रजिस्टर में एंट्री कर हस्ताक्षर किया जाता है। टनल खुदाई के दौरान सुरक्षा को विशेष ध्यान दे रहे हैं ।
बहरहाल , अब देखना होगा कि भारतमाला प्रोजेक्ट कब तक बनकर तैयार होता है जिसका राहगीरों को बेसब्री से इस सडक़ का इंतजार हैं।


