कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 17 जनवरी। वन मंडल कोण्डागांव अंतर्गत वन परिक्षेत्र माकड़ी में 2500 से अधिक पेड़ों की अवैध कटाई का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार कोण्डागांव नगर से सटे खडक़घाट क्षेत्र में सडक़ किनारे खड़े एक हरे-भरे महुआ के पेड़ को दिनदहाड़े काट दिया गया, और वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
यह घटना कोण्डागांव के पर्यटन क्षेत्र माने जाने वाले खडक़घाट से कुछ ही दूरी पर भीरागांव ‘ब’ गांव जाने वाले मार्ग की है, जहां गणेश देवांगन की भूमि पर सडक़ साइड स्थित महुआ का प्राकृतिक पेड़ गुरुवार को खुलेआम काट दिया गया। हैरानी की बात यह है कि पेड़ काटने के लिए न तो किसी प्रकार की विभागीय अनुमति ली गई और न ही संबंधित विभागों को इसकी सूचना दी गई।
दिनदहाड़े हुई इस कटाई ने वन विभाग की कुंभकर्णी नींद और निगरानी तंत्र की पोल खोल दी है। जब इस मामले में वन विभाग से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, तो विभाग ने जिम्मेदारी से बचते हुए पूरा मामला राजस्व विभाग का बताकर पल्ला झाड़ लिया।
इस संबंध में वन मंडल कोण्डागांव के नारंगी परिक्षेत्र अधिकारी विजयंत तिवारी से संपर्क करने पर उन्होंने फोन पर ही इसे राजस्व विभाग का प्रकरण बताते हुए मीडिया को किसी भी प्रकार का बयान देने से इनकार कर दिया।
इधर, पूरे मामले पर भीरागांव ‘ब’ के सरपंच धिरन सोरी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, एक ओर सरकार एक पेड़ मां के नाम जैसे नारों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग की नाकामी के चलते हरे-भरे पेड़ों को दिनदहाड़े काटा जा रहा है। यह घटना पूरी तरह से वन विभाग की लापरवाही और विफलता को दर्शाती है।


