कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 1 जनवरी। जिले के 67 धान खरीदी केंद्रों में 1 जनवरी को धान खरीदी का कार्य पूरी तरह से बाधित रहा, जिससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। खरीद केंद्रों पर पहुंचे किसानों को बिना धान बेचे ही लौटना पड़ा। स्थिति यह रही कि 1226 टोकन जारी होने के बावजूद 76570 क्विंटल धान की खरीदी नहीं हो पाई।
धान खरीदी केंद्रों में स्थान की कमी को लेकर पहले ही स्थिति गंभीर हो चुकी थी। 27 दिसंबर को छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ के बैनर तले खरीदी केंद्र समितियों ने कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा था। उनका कहना था कि, खरीदी केंद्रों में बफर लिमिट से अधिक धान जमा होने के कारण जगह की कमी हो गई है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि धान के उठाव में तेजी नहीं लाई गई तो 1 जनवरी से धान खरीदी बंद करनी पड़ेगी।
धान बेचने पहुंचे किसानों को खरीदी केंद्रों पर पहुंचने के बाद पता चला कि धान खरीदी नहीं हो रही है। किसानों ने अपनी समस्याएं जाहिर करते हुए कहा कि धान लेकर केंद्रों तक पहुंचाने और फिर वापस ले जाने में उन्हें अतिरिक्त किराया चुकाना पड़ा। बारिश की संभावना से फसल खराब होने का डर भी सता रहा है। इसके अलावा, टोकन दिवस पर धान नहीं बिकने की वजह से अगला टोकन मिलने में 15 दिनों की देरी की चिंता भी किसानों को है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि जिले के 55 हजार से अधिक किसान धान खरीदी के लिए पंजीकृत हैं। अब तक जिले में 55 फीसदी धान (1.84 लाख मेट्रिक टन) की खरीदी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कुछ केंद्रों पर हमालों की कमी और स्थान की समस्या के कारण खरीदी बाधित हुई है। हालांकि, 11 खरीदी केंद्रों में सुचारू रूप से धान की खरीदी हुई है।
कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि 2 जनवरी से सभी 67 धान खरीदी केंद्रों में धान की खरीदी फिर से नियमित रूप से शुरू की जाएगी। इसके लिए प्रभारी अधिकारी और राजस्व अधिकारियों को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन धान के उठाव में तेजी लाने के साथ-साथ खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए प्रयासरत हैं।


