कोण्डागांव
लौटने पर भव्य स्वागत
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोंडागांव, 30 दिसंबर। कोण्डागांव जिले की जूडो खिलाड़ी हेमवती नाग ने अपने संघर्ष और मेहनत से राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बनाई है। 26 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित राष्ट्रीय बाल पुरस्कार समारोह में हेमवती नाग को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया। इस सम्मान के बाद हेमवती 28 दिसंबर को कोण्डागांव वापस लौटीं, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ।
‘छत्तीसगढ़’ से खास बातचीत में हेमवती नाग ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय था। उन्होंने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की, जिसे वे अपने जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा मानती हैं। हेमवती ने कहा, मेरा सपना ओलंपिक में पदक जीतकर भारत का नाम ऊंचा करना है।
संघर्षों से सफलता
तक की कहानी
हेमवती नाग कोण्डागांव जिले के बड़ेकनेरा के मारीगुड़ा गांव की रहने वाली हैं। उनका जीवन कठिनाइयों से भरा रहा। 2018 में उनकी मां गलबे बाई नाग और 2019 में पिता प्रेम नाग का निधन हो गया। इसके बाद 2020 में हेमवती का बालिका गृह में प्रवेश हुआ। वहां से शुरू हुआ उनका जूडो खिलाड़ी बनने का सफर।
बालिका गृह की अधीक्षिका मणि शर्मा ने बताया कि शुरुआती दिनों में हेमवती कमजोर थीं, लेकिन बेहतर डाइट और कठोर अभ्यास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उनकी छोटी बहन गोमती नाग भी जूडो में राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं और अपनी बड़ी बहन के नक्शेकदम पर चल रही हैं।
कोच का अहम योगदान
हेमवती के कोच, आईटीबीपी 41वीं बटालियन के आरक्षक उदय सिंह यादव और उनके साथी नारायण सोरेन, 2020 से उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं। कोच ने बताया कि हेमवती में शुरू से ही जुझारूपन था। उन्होंने कहा, हेमवती का अनुशासन और मेहनत उसे भविष्य में और ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि, हेमवती ने 2021 में चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय सब-जूनियर जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2022 में खेलो इंडिया क्षेत्रीय प्रतियोगिता और राज्य स्तरीय शालेय खेल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया।
2023 में भोपाल में खेलो इंडिया टूर्नामेंट में पांचवां स्थान और राष्ट्रीय शालेय खेल में कांस्य पदक प्राप्त किया। 2024 में उन्होंने नासिक में खेलो इंडिया प्रतियोगिता और राष्ट्रीय शालेय जूडो प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। दिसंबर 2024 में त्रिपुरा में आयोजित राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर छत्तीसगढ़ का नाम गर्व से ऊंचा किया।
कोण्डागांव वापस लौटने पर उनके जूडो अभ्यासशाला में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। हेमवती नाग की सफलता उन सभी बच्चों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखने का साहस करते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि मेहनत, अनुशासन, और सही मार्गदर्शन से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। हेमवती नाग ने न केवल अपने जिले और राज्य बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। अब उनकी नजरें ओलंपिक पदक पर हैं, और पूरा देश उनकी इस यात्रा में उनके साथ है।


