कोण्डागांव

साहित्यकार सुरेंद्र की पुस्तकों का विमोचन
29-Dec-2021 9:46 PM
साहित्यकार सुरेंद्र की पुस्तकों का विमोचन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 29 दिसंबर।
छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य परिषद कोण्डागांव सम्पदा स्वंय सेवी संस्थान व जनजातीय चेतना कला संस्कृति एवं साहित्य की मासिक पत्रिका ककसाड़ के संयुक्त तत्वावधान में 27 दिसंबर को अंचल के विख्यात साहित्यकार बस्तर की आवाज सुरेंद्र रावल की दो पुस्तकों कामायनी का नाट्य रूपांतरण एवं जंगल नाटक का विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यकम के मुख्य अतिथि विख्यात समाज सेवी भूपेश तिवारी थे, कार्यक्रम की अध्यक्षता जनजातीय चेतना कला संस्कृति व साहित्य की मासिक पत्रिका ककसाड़ के सम्पादक डॉ राजाराम त्रिपाठी थे। विशेष आमंत्रित अतिथि थे वरिष्ठ साहित्यकार अवध किशोर शर्मा चर्चित साहित्यिक पत्रिका बस्तर पाती के सम्पादक सनत जैन विख्यात भाषा विद डॉ सतीश जैन वरिष्ठ प्रख्यात चित्रकार खेम वैष्णव हिंदी साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष  हरेन्द्र यादव व विख्यात साहित्यकार उर्मिला आचार्य थे।

अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय सेवा योजना किबाई बालेंगा के छात्र छात्राओं द्वारा छिंद के पत्तो से निर्मित गुलदस्तों द्वारा किया गया ततपश्चात प्रज्ञा त्रिवेदी द्वारा  सुमधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया गया जिसने मन्त्र मुग्ध कर दिया। अतिथियों का परिचय बृजेश तिवारी  द्वारा दिया गया। स्वागत उदबोधन सुरेंद्र रावल द्वारा प्रस्तुत किया।

पुस्तक विमोचन के अतंर्गत कामायनी के नाट्य रूपान्तरण का विमोचन अध्यक्षता कर रहे डॉ. राजा राम त्रिपाठी एवं जंगल नाटक जा विमोचन  मुख्य अतिथि भूपेश तिवारी व आमंत्रित अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षिका व साहित्यकार मधु तिवारी ने किया।
स्वर कोकिला शिप्रा त्रिपाठी ने कबीर का भजन सुनाकर सबको  मंत्रमुग्ध कर दिया। जगदलपुर से पधारे साहित्यकार अवध किशोर शर्मा, उर्मिला आचार्य, सनत जैन ने कामायनी व जंगल नाटक पर अपने विचार व्यक्त किए। ब्रजेश तिवारी ने कामायनी पर अपनी समीक्षा प्रस्तुति की। मुख्य अतिथि की आसंदी से भूपेश तिवारी ने कहा कि चालीस वर्ष पूर्व लिखे नाटक की विषयवस्तु  आज भी प्रासंगिक है।

कार्यक्रम अध्यक्षता कर रहे डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने ककसाड़ पत्रिका हिंदी साहित्य परिषद एवं सम्पदा स्वंयसेवी संस्था की ओर से सुरेंद्र रावल जी को सम्मान पत्र भेंट कर उनका नागरिक सम्मान किया। आभर प्रदर्शन धर्मेन्द्र रावल ने किया। इस अवसर पर जगदलपुर से वरिष्ठ साहित्यकार मदन आचार्य विमल कुमार जैन किशोरी सिंग ठाकुर पूर्णिमा सरोज विधु शेखर झा चमेली कुर्रे, विश्वनाथ देवांगन, बरखा भाटिया, रमेशब श्रीवास्तव, दंतेश्वरी राव उमेश मंडावी विजय पांडे टकेश्वर पानीग्राही हरेन्द्र यादव हरिलाल अनूप विश्वास हितेश श्रीवास एस पी विश्वकर्मा पारुल रावल अशोक त्रिवेदी ऋत्विक रावल मीनल रावल अनुभूति त्रिवेदी ऋचा रावल अनुकृति रमेश पंडा सहित अनेक साहित्यकार मौजूद थे।


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