दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
उतई, 22 जनवरी। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी प्रक्रिया को लेकर जनपद पंचायत दुर्ग के उपाध्यक्ष राकेश हिरवानी ने राज्य सरकार पर किसानों को परेशान करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा धान खरीदी की अंतिम तिथि पहले 31 जनवरी निर्धारित की गई थी, जिसे अब 30 जनवरी कर दिया गया है। उनका कहना है कि तिथि में बदलाव से किसानों और समितियों पर दबाव बढ़ा है।
राकेश हिरवानी ने जारी विज्ञप्ति में आरोप लगाया कि जिन किसानों के टोकन 31 जनवरी के लिए काटे गए थे, उन्हें 29 जनवरी में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे अव्यवस्था की स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि इससे किसानों के साथ-साथ समिति कर्मचारियों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों के घर जाकर धान के सत्यापन की प्रक्रिया करवा रही है, जिससे किसान स्वयं को संदेह के दायरे में महसूस कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्यापन के दौरान पटवारी और कोटवार द्वारा किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे किसानों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। राकेश हिरवानी ने कहा कि धान न बिक पाने या टोकन न मिलने की स्थिति में किसानों में असंतोष बढ़ रहा है, जिसका असर जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि सत्यापन कार्य में लगे पटवारी और कोटवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कई किसान जमीन किराये पर लेकर खेती करते हैं और ऐसी स्थिति में उपज का भंडारण अलग स्थान पर होता है, जिससे सत्यापन के दौरान उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
धान भंडारण से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर धान के नुकसान को लेकर भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग द्वारा संग्रहण केंद्रों में धान के सूखत को प्राकृतिक प्रक्रिया बताया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सूखत स्वाभाविक है तो सहकारी समितियों में इसके लिए अलग प्रावधान क्यों नहीं है।
कांग्रेस नेता ने मांग की कि सभी संग्रहण केंद्रों का निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है और सरकार को किसानों का पूरा धान खरीदना चाहिए।
इस संबंध में सरकार या खाद्य विभाग की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।


