धमतरी

निरई माता के जात्रा में उमड़े श्रद्धालु
24-Mar-2026 11:10 PM
निरई माता के जात्रा में उमड़े श्रद्धालु

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कुरुद, 24 मार्च। धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के ग्राम मोहेरा में अंतिम छोर पर घने जंगलों और दुर्गम पहाडिय़ों के बीच विराजित निरई माता मंदिर में माता जात्रा का आयोजन किया गया। जिसमें धमतरी, गरियाबंद, रायपुर, बालोद सहित आसपास जिलों एवं पड़ोसी राज्य ओडिशा से करीब 30 से 40 हजार श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

कभी कुरुद विधानसभा का हिस्सा रहे मोहेरा वर्तमान में सिहावा विधानसभा और मगरलोड जनपद के तहत अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं। विकासखंड मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर वनांचल की ऊंची पहाड़ी में निरई माता विराजित है।

गरियाबंद राजमार्ग से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत मोहेरा के आश्रित ग्राम निरई की दुर्गम, ऊबड़, खाबड़ पथरीली एवं झाड़ी नुमा मार्ग से निरई माता का मंदिर स्थित है। जहाँ हर बरस चैत्र नवरात्र की प्रथम रविवार को माता का जातरा मेला लगता है।

 इस वर्ष निरई माता का जातरा 22 मार्च को हुआ। निरई माता के महिमा संबंध में किदवंती है कि 2 सदी पूर्व मोहेरा के मालगुजार जयराम गिरी गोस्वामी निरई माता की पूजा पाठ किया करते थे। पुजारी माता की भक्ति एवं सेवा से शक्तिशाली तांत्रिक बन गए, वे अपने भक्ति के प्रभाव से किसी को भी अपने वश में कर लिया करते थे।  निरई माता स्वयं पुजारी को भोजन खिलाती थी, नारी द्वेष वश पुजारिन माता से झगडऩे लगी, तब माता ने पुजारिन को श्राप दिया कि तुम्हारे वंश में कोई भी नारी सुहाग श्रृंगार नहीं कर सकेगी, आज भी पुजारी परिवार की महिलाएं श्रृंगार नहीं करती है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां माता की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है, बल्कि श्रद्धालु प्राकृतिक रूप से निर्मित पत्थर की गुफा में निराकार रूप में माता की पूजा करते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार भेंट-प्रसाद अर्पित करते हैं।

इस वर्ष कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने निरई माता मंदिर पहुंचकर दर्शन किया। उन्होंने मौके पर उपस्थित श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया था  कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्ग, पेयजल, स्वच्छता, अस्थायी शेड, चिकित्सा व्यवस्था एवं सुरक्षा प्रबंध सुदृढ़ किए जाएं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए वन विभाग के माध्यम से विशेष प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

साथ ही मंदिर तक पहुंच मार्ग के, अतिरिक्त शेड निर्माण कराया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।उन्होंने कहा कि निरई माता क्षेत्र को आस्था के साथ-साथ इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने की दिशा में सतत कार्य किया जाएगा, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हों।  

 

 

 


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