अपनी मांगों पर चर्चा करना चाह रहे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 28 अगस्त। सीएम भूपेश बघेल ने राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन को पत्र लिखा है। छत्तीसगढ़ ओबीसी महासभा तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण संघ के निवेदन पर भेंट के लिए समय देने का अनुरोध किया।
संघ ने विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राज्यपाल से समय दिलाने का मुख्यमंत्री से अनुरोध किया था।
छत्तीसगढ़ ओबीसी महासभा तथा छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग कल्याण संघ के निवेदन पर मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को पत्र लिखा है।
ओबीसी महासभा ने सीएम को ज्ञापन सौंपा था जिसमें कहा गया था कि विगत 30 वर्षों से लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण शीघ्र लागू किया जाए।
लंबित राष्ट्रीय जनगणना शीघ्र की जाए, जिसमें ओबीसी के लिए पृथक से कोड नंबर निर्धारित हो अथवा बिहार की तर्ज पर जनगणना की जाए, उक्त आशय का प्रस्ताव केंद्र सरकार को अविलंब भेजे जाने का आग्रह किया गया है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजधानी रायपुर में ओबीसी समाज के लिए कम से कम 5 एकड़ भूखंड नि:शुल्क आबंटित किए जाने की मांग की गई है।
राज्य छात्रवृत्ति में विसंगतियों को दूर करते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की भांति समान शर्तों एवं दरों पर केंद्र के समान ओबीसी को भी छात्रवृत्ति प्रदान किए जाने का आग्रह किया है।
महासभा ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है। अत: राज्य अंतर्गत संचालित सभी शासकीय हायर सेकेंडरी शालाओं में कृषि संकाय अनिवार्य रूप से संचालित किए जाने की जरूरत है।
पांचवी अनुसूची क्षेत्र में लागू पेसा कानून के दायरे में वहां निवासरत ओबीसी समुदाय को भी शामिल किए जाने का निवेदन है।
देश की कर्नाटक, केरल, आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात एवं महाराष्ट्र आदि राज्यों में पृथक से पिछड़ा वर्ग विभाग संचालित है। छत्तीसगढ़ राज्य में ओबीसी संबंधी योजना एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रम आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित की जा रही है, जिससे ओबीसी की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सका है। अत: छत्तीसगढ़ राज्य में ओबीसी का पृथक से विभाग (मंत्रालय) स्थापित किए जाने का अनुरोध है।
बस्तर एनएमडीसी का मुख्यालय हैदराबाद के स्थान पर जगदलपुर में स्थापित किया जाए, ताकि स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार का अवसर मिल सके।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एक्ट्रोसिटी एक्ट) 1989 के अंतर्गत ओबीसी को भी शामिल किए जाने का अनुरोध है। 2005 से शासकीय भूमि में काबिज ओबीसी समुदाय के लोगों को वन अधिकार पट्टा प्रदान किए जाने का अनुरोध है।