‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 5 जनवरी। महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली सेवा सहकारी समिति केना से जुड़े एक मामले में किसानों के रकबे में कूटरचना कर केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) ऋण निकाले जाने के आरोप सामने आए हैं। किसानों का दावा है कि उनके नाम पर बिना जानकारी और आवेदन के ऋण स्वीकृत कर लिया गया। आरोपों के अनुसार, यह मामला वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 से संबंधित है।
किसानों के अनुसार, जिनके नाम पर 1 से 3 एकड़ भूमि दर्ज थी, उनके रकबे को कथित तौर पर बढ़ाकर 6 से 10 गुना तक दर्शाया गया। आरोप है कि बढ़े हुए रकबे के आधार पर तोरेसिंहा सहकारी बैंक से केसीसी ऋण निकाला गया। किसानों का कहना है कि उन्हें ऋण की जानकारी तब हुई, जब वे स्वयं ऋण लेने के लिए बैंक पहुंचे और उनके नाम पर पहले से ऋण दर्ज होने की जानकारी दी गई।
किसानों का आरोप
किसानों का दावा है कि उन्होंने न तो केसीसी ऋण के लिए आवेदन किया था और न ही ऋण निकासी से संबंधित कोई दस्तावेज भरा था। इसके बावजूद उनके नाम पर लाखों रुपये का ऋण दर्शाया गया। किसानों के अनुसार, इस प्रक्रिया में उनके भूमि रकबे को रिकॉर्ड में बढ़ाया गया, जिससे वे बिना ऋण लिए ही ऋणी दर्शाए गए।
किसानों ने आरोप लगाया है कि इस कथित अनियमितता में केना सहकारी समिति के प्रभारी भीष्मदेव पटेल, तोरेसिंहा शाखा के पूर्व सुपरवाइजर श्याम सुंदर पटेल, वर्तमान सुपरवाइजर राजकुमार प्रधान और शाखा प्रबंधक युवराज नायक की भूमिका रही है। किसानों का कहना है कि इस मामले में शासन को वित्तीय नुकसान पहुंचा है।
कुछ मामलों का उल्लेख
किसानों द्वारा बताए गए उदाहरणों में बनमाली, निवासी इच्छापुर, के मामले का हवाला दिया गया है। उनका कहना है कि उनकी 0.4000 हेक्टेयर भूमि को रिकॉर्ड में 8.31 हेक्टेयर दर्शाया गया और उनके नाम पर 3.65 लाख रुपये का केसीसी ऋण बताया गया, जबकि उन्होंने ऋण के लिए आवेदन नहीं किया था।
इसी तरह, वर्तमान केना समिति अध्यक्ष प्रसन्न प्रधान के पिता सचिदानंद, निवासी नानकपाली, के संबंध में भी रकबा बढ़ाकर ऋण निकाले जाने का आरोप लगाया गया है। किसानों के अनुसार, उनके पास लगभग 0.8000 हेक्टेयर भूमि है, जिसे रिकॉर्ड में 7.69 हेक्टेयर दर्शाया गया और उनके नाम पर 2.03 लाख रुपये का ऋण दिखाया गया।
अन्य मामलों में भीष्मनाद, उत्तर कुमार भोई और कमलेश दास द्वारा भी इसी तरह के आरोप लगाए गए हैं। कमलेश दास ने बताया कि उनके पिता रामेश्वर दास का निधन जनवरी 2023 में हो चुका था, इसके बावजूद उनके नाम की भूमि में कूटरचना कर ऋण निकाले जाने का दावा किया जा रहा है।