‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 30 मार्च। गुरु घासीदास सेवा समिति सेक्टर 6 भिलाई जिला दुर्ग तत्वाधान में बलिदानी गुरु बालक दास की शहादत दिवस सतनाम भवन के प्रांगण में शनिवार 28 मार्च को आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संध्या बंजारे (एसडीओ)लोक निर्माण विभाग खैरागढ़ कार्यक्रम के अध्यक्षता बी.एल. कुर्रे अध्यक्ष गु. घा.से. स.से.6 कार्यक्रम के विशेष अतिथि उर्मिला भास्कर गैंदलाल राय मंशाराम कुर्रे संयोजक गुरु वंदना भिलाई राजेंद्र बंजारे एवं वरिष्ठ समाजसेवियों की गरिमामय उपस्थिति मे संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों तथा समाज प्रमुखों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं राजा बलिदानी गुरु बालक दास के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर किया गया । इस अवसर पर सतनाम भजन मंडली के द्वारा गुरु बालक दास जी के जीवनी पर भक्ति मय गीत प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात सभी अतिथियों ने राजा गुरु बालक दास जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए उद्बोधन दिया ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संध्या बंजारे ने अपने उद्बोधन में गुरु बालक दास को नमन करते हुए कहा कि सतनाम पंथ के पुरोधा राजा गुरु ने जीवन पर्यंत पूरे मानव समाज के सेवा के लिए सामंत शाही व अन्याय के खिलाफ वीरता से संघर्ष किया, सामाजिक क्रांति के महान योद्धा ,सभी वर्गों के लिए समान शिक्षा की क्रांति लाए ,मालिक मकबुजा कानून पास कर किसानो को उनका हक दिलाया, सती प्रथा बाल विवाह व दहेज प्रथा के खिलाफ निर्णायक संघर्ष किया।
उन्होंने समाज को मजबूत एवं संगठित करने का अनुकरणीय कार्य किया है। रोटी कपड़ा और मकान के अधिकार हेतु जन जागरूकता के साथ ही, पिंडारियों और सामंतों से लडक़र समाज की रक्षा की। गुरु बालक दास का जीवन संघर्ष और बलिदान हमें प्रेरणा देता है कि हम भी अपने समाज को संगठित करें और अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहते हुए सतनाम के अलख को निरंतर जलाएं रखें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बी. एल. कुर्रे ने अपने उद्बोधन में बताया कि राजा बलिदानी गुरु बालक दास बाबा गुरु घासीदास के द्वितीय सुपुत्र थे जो बचपन से सतनाम पंथ के प्रचारक समाज में व्याप्त कुरीतियां उच्च नीच भेदभाव को मिटाने के लिए सतनाम सेना का गठन किया जिससे समाज को सशक्त मजबूत शक्तिशाली बनाने के लिए जन्म से लेकर मरण तक सभी संस्कारों के बारे में जागरूक किया तथा साटीदार, भंडारी, महंत, जिला महंत, राजमहंत जैसे पद देकर समाज को एकता के सूत्र में पिरोने का काम बाबा गुरु बालक दास ने किया उस समय अंग्रेजों का शासन था तथा देश राजा रजवाड़ों मे बटा था गुरू बालक दास नेतृत्व क्षमता को दखते हुए अंग्रेज शासक कर्नल ईग्नू ने बालकदास को राजा की पदवी से नवाजा तथा स्वर्ण जडि़त तलवार भेंट किया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मंशाराम कुर्रे के द्वारा आज के दिन हमारे बलिदानी राजा गुरु बालक दास का मुंगेली के पास औराबांधा नामक गांव में सामंत वादियों के द्वारा 28 मार्च 1860 को, षडयंत्र पूर्वक निर्मम हत्या किए जाने का उल्लेख किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि श्री गैंद लाल राय राजेंद्र बंजारे एवं उर्मिला भास्कर ने भी अपने विचार रखें।
कार्यक्रम में वरिष्ठ समाज सेवी भागवत बंजारे ,रामजी गायकवाड़ ,सरयू प्रसाद बारले, जवाहर कौशल, शांतिलाल मिर्चे, कृष्णा पात्रे, शोभा खिलाड़ी, प्रमिला डहरे व समिति के सम्मानित कोषाध्यक्ष आर .सी. देश लहरा, सचिव दिवाकर गायकवाड़ ,टेकराम बंजारे एस.आर.नौरंगे ,रूपेश बारले, त्रिलोचन डेहरे, सतीश डहरे, शंभू लाल डहरिया, किशोर भारद्वाज, सागर टंडन, मनबोधी कुर्रे, योगेश्वर चतुर्वेदी, नोहर सिंह कुर्रे, कैलाश चतुर्वेदी, उषा देश लहरा, बिसाहू राम बघेल, भामनी बंजारे व अन्य समाजिक जनों की उपस्थिती मे कार्यक्रम का संचालन नेतराम गिलहरे महासचिव एवं आभार प्रदर्शन राजेन्द्र महिलांग के द्वारा किया गया।