बिलासपुर
विवेचना मजबूत करने पर न्यायाधीशों के साथ पुलिस की कार्यशाला
छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 18 दिसंबर। पॉस्को जैसे संवेदनशील मामलों में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को विवेचना का अनिवार्य हिस्सा बनाकर ही अपराधियों को सजा दिलाई जा सकती है। यह बात वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने पॉस्को एक्ट से जुड़े मामलों की विवेचना को लेकर आयोजित कार्यशाला में कही।
बुधवार को बिलासपुर पुलिस द्वारा पॉस्को अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में जिले के सभी थाना-चौकी प्रभारी, महिला पुलिस अधिकारी और 80 से अधिक विवेचक शामिल हुए।
कार्यशाला का उद्देश्य पॉस्को मामलों की जांच में सामने आ रही कमियों को दूर करना और विवेचना को कानूनन मजबूत बनाना रहा।
कार्यशाला में जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर की एडीजे पूजा जायसवाल ने नाबालिग बालक-बालिकाओं से जुड़े अपराधों को अत्यंत गंभीर बताते हुए सख्त और संवेदनशील कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अपराध के समय पीड़िता नाबालिग थी, तो बाद में बालिग हो जाने पर भी उसे नाबालिग मानकर ही विवेचना की जानी चाहिए।
उन्होंने उम्र निर्धारण के लिए 10वीं की अंकसूची, जन्म प्रमाण पत्र, नगर निकाय के रजिस्टर और हड्डी परीक्षण रिपोर्ट जैसे दस्तावेजों को आधार बनाने की जानकारी दी। साथ ही पॉस्को एक्ट से जुड़ी कई व्यावहारिक कानूनी जानकारियां साझा कीं।
एडीजे वेसनलास टोप्पो ने विवेचना और चालान पेश करने में होने वाली आम गलतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि पॉस्को मामलों में घटनास्थल का पटवारी नक्शा एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है, जिसका उपयोग विवेचक को अवश्य करना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि यदि पीड़िता बयान से मुकर जाए, तब भी भौतिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी सिद्ध किया जा सकता है। मुकबधिर बालक-बालिकाओं से जुड़े मामलों में साक्ष्य संकलन की विशेष प्रक्रिया पर भी उन्होंने मार्गदर्शन दिया।
एसएसपी रजनेश सिंह ने बिलासपुर पुलिस द्वारा अब तक की जा रही कार्रवाई की सराहना करते हुए विवेचकों को भविष्य में और अधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने फोटो, वीडियो, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों के उपयोग पर विशेष जोर दिया, ताकि विवेचना मजबूत हो और अदालत में दोषसिद्धि सुनिश्चित की जा सके।
कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर राजेंद्र जायसवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण डॉ. अर्चना झा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एसीसीयू अनुज कुमार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे, डीएसपी मुख्यालय रश्मित कौर चावला, डीएसपी आजाक डेरहा राम टंडन, डीएसपी आईयूसीए अनिता मिंज, डीएसपी लाइन मंजुलता केरकेट्टा सहित जिले के सभी थाना-चौकी प्रभारी और विवेचक उपस्थित रहे।


