बिलासपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 9 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रदेशभर के मुक्तिधामों की बदहाल स्थिति को गंभीर मुद्दा मानते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों से फोटोग्राफ सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। अदालत को यह रिपोर्ट सौंप दी गई है, जिसके बाद कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को स्वयं पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर पालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई जनवरी में तय की गई है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि अंतिम संस्कार में गरिमा का संरक्षण, संविधान के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
इसलिए राज्य सरकार का दायित्व है कि हर मुक्तिधाम में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि साफ-सफाई, ग्रीन फेंसिंग या कंटीला तार, शेड की मरम्मत, बिजली-पानी की सुविधा, पुरुष व महिला के लिए अलग शौचालय आदि संबंधी दिशा-निर्देश 6 और 8 अक्टूबर 2025 को जारी किए जा चुके हैं। अदालत ने कहा केवल दिशानिर्देश जारी कर देने से काम पूरा नहीं होता, जमीनी कार्रवाई ज़रूरी है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब बीते 29 सितंबर को चीफ जस्टिस बिलासपुर के रहंगी स्थित मुक्तिधाम में एक अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे।
यहां चारों ओर गंदगी मिली रास्ते का अभाव था। पानी-बैठने की व्यवस्था नहीं थी और प्लेटफॉर्म जर्जर था। कोर्ट ने इसके बाद स्वत: संज्ञान जनहित याचिका दर्ज की।
बिलासपुर कलेक्टर द्वारा दायर शपथपत्र में बताया गया कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बने हॉल को प्रतीक्षालय बनाया गया है। पेयजल व्यवस्था की गई और अंतिम संस्कार प्लेटफॉर्म की मरम्मत हो गई है। मुख्य सडक़ से मुक्तिधाम तक सीसी रोड निर्माण हेतु 10 लाख रुपए की मंजूरी दी गई है।


