बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 12 फरवरी। सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण संबंधी जारी दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) प्रकाश भारद्वाज की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीजे संचालक, मैरिज भवन संचालक, कार्यक्रम आयोजक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। साथ ही एसडीओपी बेमेतरा, थाना प्रभारी, नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक में ध्वनि विस्तारक यंत्रों लाउडस्पीकर, डीजे के प्रयोग, समय-सीमा, ध्वनि की अधिकतम सीमा तथा प्रतिबंधित समयावधि के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। एसडीएम श्री भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के आदेशानुसार रात्रि 10 बजे से प्रात: 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा, सिवाय शासन द्वारा घोषित विशेष अवसरों के। निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक ध्वनि का प्रसारण दंडनीय अपराध माना जाएगा।उन्होंने कहा कि आवासीय क्षेत्रों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, न्यायालय परिसरों एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित संचालकों को ध्वनि नियंत्रण यंत्र (साउंड लिमिटर) का अनिवार्य रूप से उपयोग करने तथा सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। बिना अनुमति ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पाए जाने पर उपकरणों की जब्ती, चालानी कार्रवाई तथा दंडात्मक प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
एसडीओपी एवं थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा नियमित रूप से निगरानी की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों एवं आयोजकों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 तथा ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। बार-बार उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई भी की जाएगी। नगर पालिका अधिकारी ने मैरिज हॉल एवं कार्यक्रम स्थलों के संचालकों को निर्देशित किया कि वे अपने परिसर में ध्वनि नियंत्रण संबंधी शर्तों का स्पष्ट उल्लेख करें तथा आयोजकों से नियमों के पालन का लिखित आश्वासन लें। कार्यक्रम समाप्ति के पश्चात परिसर की शांति व्यवस्था बनाए रखना भी संचालकों की जिम्मेदारी होगी। एसडीएम भारद्वाज ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण से आम नागरिकों, विशेषकर वृद्धजनों, विद्यार्थियों एवं मरीजों को गंभीर असुविधा होती है।
अत: सभी संचालक सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए न्यायालय के आदेशों का अक्षरश: पालन सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी विवाह सीजन एवं अन्य आयोजनों को दृष्टिगत रखते हुए प्रशासन द्वारा सघन जांच अभियान चलाया जाएगा।
बैठक के अंत में उपस्थित डीजे एवं मैरिज भवन संचालकों से नियमों का पालन करने का संकल्प लिया गया तथा सभी को निर्देशों की प्रति उपलब्ध कराई गई। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि ध्वनि प्रदूषण संबंधी किसी भी शिकायत की सूचना तत्काल पुलिस या प्रशासन को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके। जिला प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया कि न्यायालयीन आदेशों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा और नियमों के कड़ाई से पालन हेतु निरंतर निगरानी एवं विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।


