बेमेतरा

राजिम कुंभ,छत्तीसगढ़ की आत्मा, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक आध्यात्मिक चेतना का महासंगम - डॉ.सौरव
11-Feb-2026 4:40 PM
राजिम कुंभ,छत्तीसगढ़ की आत्मा, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक आध्यात्मिक चेतना का महासंगम - डॉ.सौरव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 11 फरवरी। छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आयोजित हो रहे राजिम कुंभ सनातन संस्कृति, शाही स्नान परंपरा और छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक चेतना का महापर्व है। इस अवसर पर धर्म स्तंभ काउंसिल एवं राम जानकी मंदिर, नर्मदा कुण्ड निर्वाणी अखाड़ा की ओर से श्रद्धालुओं व क्षेत्रवासियों के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं।

राम जानकी मंदिर, नर्मदा कुण्ड के महंत सुरेंद्र दास ने बताया कि राजिम कुंभ के दौरान निर्वाणी अखाड़ा के टेंट में क्षेत्रवासियों एवं दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहराव, सेवा एवं मार्गदर्शन की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही राम जानकी मंदिर नवागढ़,बाघुल स्थित भगवान कृष्ण मंदिर एवं नर्मदा कुण्ड की ओर से धार्मिक निशान (ध्वज) लेकर महंत सुरेंद्र दास ,डॉ सौरव निर्वाणी राजिम कुंभ की ओर प्रस्थान करेंगे।

महंत सुरेंद्र दास ने कहा कि राजिम कुंभ संगम की पावन भूमि पर आत्मशुद्धि, साधना और सनातन एकता का अनुपम अवसर है। यहाँ किया गया स्नान, जप, दान और सेवा अनंत पुण्य प्रदान करता है। धर्म स्तंभ काउंसिल की ओर से साधु संतों और महंतों और अखाड़ा परंपरा से जुड़े संतों के लिए व्यवस्थाए की गई है।

धर्म स्तंभ काउंसिल की ओर से डॉ. सौरव निर्वाणी ने कहा कि राजिम कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सनातन पहचान, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यह कुंभ समाज को धर्म, संस्कृति और सेवा के सूत्र में बाँधने का कार्य करता है। धर्म स्तंभ काउंसिल सभी श्रद्धालुओं से आह्वान करती है कि वे परिवार सहित राजिम कुंभ में सहभागिता करें, पुण्य लाभ अर्जित करें और सनातन परंपरा को सशक्त बनाएं।आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी राजिम कुंभ जैसे आयोजनों से जुड़े, ताकि हमारी आध्यात्मिक विरासत आने वाली पीढिय़ों तक सुरक्षित और सशक्त रूप में पहुँचे। धर्म स्तंभ काउंसिल ने सभी साधु-संतों, सामाजिक संगठनों, युवाओं एवं मातृशक्ति से राजिम कुंभ में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस महापर्व को ऐतिहासिक बनाने की अपील की है।


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