बस्तर
97 घंटे वेंटिलेटर में रहने के बाद भी लड़ी जिंदगी की जंग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर,26 जून। बीजापुर जिले के मद्देड तोयनार में रहने वाले अनिल उरसा की 11 माह की बच्ची को सोने के दौरान एक करैत सांप ने डस लिया, जिसके बाद परिजनों ने बच्ची को बेहतर उपचार के लिए बीजापुर के जिला अस्पताल ले जाया गया। उसे बेहतर उपचार के लिए मेकाज रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने 4 दिनों तक कड़ी मशक्कत के बाद बच्ची को नया जीवनदान दिया।
मेकाज के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू ने बताया कि 17 जून को बीजापुरजिले के मद्देड़ तोयनार निवासी अनिल उरसा अपनी 11 माह की बच्ची अल्पना को बेहोशी की हालत में लेकर जगदलपुर पहुँचा। उसने बताया कि 16 जून की रात को परिवार के साथ सो रहा था कि अचानक से एक करैत सांप ने बच्ची के हाथ की उंगली में डस लिया। बच्ची की आवाज को सुन परिजनों ने सांप को देखा।
बच्ची को तत्काल ही बीजापुर अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे बेहतर उपचार के लिए 17 जून को मेकाज रेफर किया गया। बच्ची को जिस समय अस्पताल लाया गया, वह बेहोश थी। बच्ची की हालत को देखते ही उसे तत्काल वेंटिलेटर में डाल दिया गया,जहाँ 4 दिनों तक शिशु वार्ड के चिकित्सकों से लेकर स्टाफ नर्स ने 24 घंटे बच्ची को निगरानी में रखा, जहाँ 97 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बच्ची को बाहर निकाला गया, जहाँ बच्ची की जान बचाई गई।
इस दौरान शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू के साथ ही डॉ. डी आर मंडावी, डॉ. तुषार, डॉ. उदित यादव, डॉ. सायली, डॉ. प्रियंका, डॉ. दिवाकर, डॉ. पवन, डॉ. अपूर्व के अलावा स्टाफ नर्स आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सर्पदंश में न करे लापरवाही
बताया जा रहा है कि अगर किसी भी क्षेत्र में अगर कोई सर्पदंश का शिकार होता है तो उसे आसपास के पीएचसी, सीएचसी के अलावा स्वास्थ्य केंद्र या फिर नजदीकी किसी अस्पताल में उपचार कराया जाए।


