बस्तर

नक्सलियों ने जारी किया पर्चा, नक्सल हमले को बताया झूठा
08-Sep-2023 9:06 PM
नक्सलियों ने जारी किया पर्चा, नक्सल हमले को बताया झूठा

कहा- पुलिस ने जबरन ग्रामीणों को जंगल ले जाकर की हत्या
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर,  8  सितंबर।
दक्षिण बस्तर डिविजनल कमेटी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सचिव गंगा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए 5 सितंबर को हुए पुलिस नक्सली मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए पर्चा जारी किया है।

जारी विज्ञप्ति ने सचिव गंगा ने 5 सितंबर को ताड़मेटला गाँव के रवा देवा और सोड़ी कोसा को मोरपल्ली गाँव के पास जंगलों में मुठभेड़ के नाम पर की गई निर्मम हत्या की कड़ी से कड़ी शब्दों में निंदा की है।

 सुकमा जिला के चिंतागुफा, चिंतानार थाना क्षेत्र के डीआरजी, सीआरपीएफ 223 वीं बटालियान जिला बल और कोबरा बलों ने  5 सितंबर को गश्त के नाम पर ताडमेटला, मोरपल्ली, कुम्मडतोंग गाँवों के जंगलों में अभियान चलाया, ताडमेटला गाँव के निवासी रवा देवा पिता बण्डी, पत्नी सोनी, इनको बच्चे नहीं है, घर में एक छोटी सी किराना दुकान भी है, और सोड़ी कोसा पत्नी नन्दे व 3 बच्चे हैं। इन दोनों भी तिम्मपुराम मोटर साइकिल के साथ सगा के घर गये थे।

वापस आते वक्त बण्डा मोरपल्ली और गरगड़ पारा के बीच बड़ा सा जंगल है, इस जंगल में मोटर साइकिल को रोककर उन दोनों को पुलिस जंगल में ले गये थे, बाद में उन को यातनाएं देकर फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दिया गया, बाद में इस घटना को लेकर सुकमा एसपी किरण चौहान ने 5 सितंबर की सुबह 6 बजे ताड़मेटला, दुलेड़ के बीच हुई मुठभेड़ में दो वर्दीधारी नक्सली मारे जाने की बात कही, साथ ही उनकी शिनाख्त जगरगुण्डा एरिया कमेटी के मिलिशिया सदस्य सोड़ी कोसा, और ताडमेटला एरिया कमेटी का रवा देवा के रूप में हुई, इनके ऊपर एक-एक लाख रूपये का ईनाम था, इनके पास एक डबल बैरल रायफल, एक पिस्तौल बरामद किये जाने की झूठी बयान जारी किया गया है, ये सरासर झूठ है,  इन लोग उनके सगा के पास गये थे, इनके पास कुछ हथियार नहीं है।  ताड़मेट्ला के साधारण आम जनता एवं खेती किसानी करके जीने वाले लोग थे।

केंद्र-राज्य जन विरोधी सरकारें तेजी से कॉर्पेट सुरक्षा कैम्पों, सडक़ों, मोबाइल टॉवरों का विस्तार कर रही है। हर दो-तीन किलो मीटर के दायरे में एक पुलिस कैम्प का बिठा रही है, यहां 2022 नवंबर से अभी तक डब्बाकोंटा, पिडमेल, नम्बीधारा, कुंदेड, गुण्ड्राय सिलंगेर, दरमा और पेद्दातर्रेम में नया पुलिस कैंप बिठाकर आसपास के गांवों पर दिन-रात हमले तेज किये हैं। पुलिस दमन व नये कैंपों, सडक़ों का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों पर लाठी- गोली जेल जैसे क्रूर दमन का प्रयोग कर रहे है। इन दिनों थानों-कैंपों, गाँव- गलियों में बख़्तरबंद गाडिय़ों व पुलिस, अर्ध सैनिक बलों से खचखच भरा हुआ है। बस्तर संभाग में भीषण युद्ध-सा माहौल बना रहे हैं। हर दिन गॉओं पर हमला कर जनता का संपत्ति को लूट के ले जाना, लोगों को गिरफ्तार करके यातनाएं देकर जल भेजना, फर्जी मुठभेड में मारना यहां का आम बात है. इसी अंतर्गत ही सितम्बर 5 का फर्जी मुठभेड़ है।

इस अमानवीय हरकत की कड़ी शब्दों में खण्डन करते हैं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं मीडिया कर्मियों, जनहितैषियों, आदिवासी प्रेमियों से अपील कि है कि वे इस झूठी मुठभेड़ की सच्चाई को जानने उक्त घटना स्थल का दौरा कर पीडि़त परिवारों से मुलाकत करें और पुलिस कैंपों, सडक़, पुल-पुलियों का निर्माण के खिलाफ जल जंगल जमीन, संसाधानों को बचाने के लिए जारी जनांदोलनों का समर्थन करें, जनता पर चलाई जा रही भीषण दमन यानी हवाई बमबारी, झूठी मुठभेड़ों अत्याचारों, अवैध गिरफ्तारियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें। दोषी पुलिस- डीआरजी गुडों पर कड़ी कार्रवाई करने पद से बर्खास्त करने की मांग को लेकर संघर्ष करें और जनता से आहवान करती है कि इस अन्यायपूर्ण, नजायज हमलों से बचने के लिए हर मौकों में दुश्मन का डटकर प्रतिरोध करें।


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