बस्तर

3 दिन, 3 घंटे छत्तीसगढ़ परिचारिका कर्मचारी कल्याण संघ करेगा काम का बहिष्कार
10-Jun-2023 9:35 PM
3 दिन, 3 घंटे छत्तीसगढ़ परिचारिका कर्मचारी  कल्याण संघ करेगा काम का बहिष्कार

स्टाफ नर्स की कमी के साथ ही बढ़ रहा है मानसिक तनाव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता 
जगदलपुर, 10 जून।
मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में स्टाफ नर्स की कमी को लेकर छत्तीसगढ़ परिचारिका कर्मचारी कल्याण संघ के द्वारा 3 दिनों तक रोजाना 3 घंटे तक काम को बंद करते हुए इसका बहिष्कार किया जाएगा. इस मामले को लेकर संघ के द्वारा संयुक्त संचालक सह अधीक्षक शहीद महेंद्र कर्मा स्मृति चिकित्सालय को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं।

छत्तीसगढ़ परिचारिका कर्मचारी कल्याण संघ के उप प्रांताध्यक्ष अनशिला बैस ने बताया कि 13 से 15 जून तक रोजाना सुबह 10 से लेकर 1 बजे तक काम को बंद करते हुए इसका बहिष्कार किया जाएगा। अगर जल्द ही मांग को पूरी नहीं किया जाएगा तो संघ के द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

संघ के सदस्यों ने यह भी बताया कि डिमरापाल में निरंतर स्टाफ की कमी एक बड़ा रूप ले चुकी है, जिसकी वजह से स्टाफ नर्स को अपनी क्षमता से अधिक काम करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से शारीरिक व मानसिक रूप से ग्रसित हो रहे हैं। इसके अलावा देखा जाए तो स्टाफ की कमी को लेकर कई बार अधिकारियों के पास मामले की जानकारी देने के बाद भी कोई भी परिणाम सामने नहीं आया है।

एकता की है कमी
कुछ स्टाफ नर्स ने नाम न छापने की शर्त में बताया कि हमारे यहां एकता की कमी है, जिसके कारण कोई भी खुलकर विरोध नहीं कर पाता है, अगर आधे से ज्यादा लोग हड़ताल करते भी हंै, तो बाकी के लोग अपने वार्ड में ड्यूटी करते नजर भी आते हैं।

जल्द आ जाती है नाइट ड्यूटी
स्टाफ नर्स ने यह भी बताया की वार्ड में ज्यादा स्टाफ होने के कारण महीने में एक बार नाइट ड्यूटी लगाई जाती थी, लेकिन लगातार स्टाफ नर्स के तबादले, नियमित होने व अन्य कारणों के चलते कई स्टाफ कम हो गए हैं, जिसके कारण अकेले की ही ड्यूटी लगाई जाती है। 

दिन हो या दोपहर करते हंै अकेले ड्यूटी
स्टाफ नर्स की सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक वार्ड में बिस्तर भले ही 30 रहते हैं, लेकिन वहां पर क्षमता से अधिक मरीजों को भर्ती किया जाता है, ऐसे में अकेले स्टाफ नर्स को डॉक्टर को राउंड कराने से लेकर मरीजों को इंजेक्शन से लेकर अन्य इलाज के लिए अकेले ही देखना पड़ता है।

100 से अधिक हंै नियमित स्टाफ नर्स
बताया जा रहा है कि इस मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में देखा जाए तो 100 से अधिक नियमित स्टाफ नर्स कार्यरत हंै, लेकिन हक की लड़ाई में इसमें भी संख्या में कमी देखने को मिलने वाली है, जिसके कारण अधिकारी तक इनकी आवाज नहीं पहुंच पाने व वार्ड में समस्या नहीं हो पाने के कारण इनके अधिकारों के ऊपर अधिकारी ध्यान नहीं दे पाते हैं।

विधायक से लेकर मंत्री तक दे चुके हंै ज्ञापन
मेडिकल कॉलेज डिमरापाल 2018 में शुरू किया गया था, उस समय भाजपा का शासनकाल चल रहा था, उस समय से लेकर अब कांग्रेस के शासनकाल तक जब भी मुख्यमंत्री से लेकर अन्य मंत्री बस्तर दौरे पर आए हंै, तब स्टाफ नर्स की भर्ती को लेकर ज्ञापन भी सौंपा गया। जिस पर उन्हें आश्वासन तो मिला, लेकिन स्टाफ की पूर्ति आज तक नहीं हो पाई है, जिसके कारण लगातार स्टाफ नर्स बढ़ते कार्य के लगातार बीमार हो रहे हैं।


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