बस्तर

बादल अकादमी में होगा सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार, कलाकारों को मिलेगा बेहतर मंच
19-May-2023 3:50 PM
बादल अकादमी में होगा सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार, कलाकारों को मिलेगा बेहतर मंच

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता 
जगदलपुर, 19 मई।
कलेक्टर विजय दयाराम के ने बादल अकादमी में सांस्कृतिक गतिविधयों को तेज करने के साथ ही कलाकारों को अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने की बात कही। 

श्री विजय ने गुरुवार को आसना में स्थापित बादल अकादमी का अवलोकन किया। उन्होंने यहां प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण भवन और आवासीय भवन, नृत्य मंडप, ओपन एयर थियेटर सहित विभिन्न समाजों के लिए बनाए गए कुटियों का अवलोकन किया और बस्तर में बसने वाली विभिन्न जनजातियों की समृद्ध संस्कृति और परंपरा, आदिवासियों की रीति-नीति, बोली गीत-संगीत, नृत्य आदि के संरक्षण के लिए स्थापित इस अकादमी द्वारा संचालित गतिविधियों की जानकारी ली। 

कलेक्टर श्री विजय ने कहा कि विभिन्न जनजातियों की अपनी विशेष संस्कृति और सभ्यताएं हैं, जिन्हें समाजों के लिए आबंटित कुटियों में उभारना चाहिए। उन्होंने इसके साथ ही यहां संचालित समर क्लास में दिए जा रहे चित्रकला और लोक संगीत के प्रशिक्षण का भी अवलोकन किया। कलेक्टर ने इसके साथ ही इस अवसर पर यहां के कर्मचारियों से परिचयात्मक भेंट भी किया।

इस अवसर पर बादल अकादमी की प्रभारी श्रीमती पूर्णिमा सरोज ने इस दौरान बताया कि बस्तर में कोया, हल्बा, भतरा, धुरवा, मुंडा आदि जनजातियां हैं, जिनकी परंपराएं, रीति-नीति के अभिलेखीकरण का कार्य किया जा रहा है। यहां इंदिरा संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के सहयोग से लोक संगीत का एक और दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स, शास्त्रीय संगीत के अंतर्गत गायन और वादन, सुगम संगीत के लिएगीतांजलि पाठ्यक्रम तथा चित्रकला का पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही यहां हल्बी बोली का शब्दकोष भी तैयार किया जा चुका है तथा गोंडी बोली का शब्दकोष तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही यहां विभिन्न अवसरों पर गाई जाने वाली गीतों का संग्रह भी किया गया है। उन्होंने बताया कि यहां शास्त्रीय नृत्य और ड्रामा में भी युवाओं द्वारा रुचि ली जा रही है।

कलेक्टर का बस्तरिया परंपरा अनुसार हुआ आत्मीय स्वागत
इस अवसर पर बादल अकादमी में उपस्थित समाज प्रमुखों और कलेक्टर श्री विजय का बस्तरिया परंपरा के अनुसार आत्मीय स्वागत किया गया। उन्होंने पूरे परिसर का भ्रमण करते हुए यहां की जनजातीय परंपराओं के संबंध में जानकारी ली। इस अवसर पर भतरा समाज के रतन कश्यप, मुंडा समाज के  बाबूलाल बघेल, हल्बा समाज के मानसराम राणा, भतरा समाज के  डीएस नेताम, मुरिया समाज के श्रभ् सामुराम मौर्य, धुरवा समाज के  गंगाराम कश्यप उपस्थित सहित अकादमी के कर्मचारी उपस्थित थे।


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