बस्तर
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच का व्याख्यान
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 1 मार्च। मंगलवार को नगर के चेंबर्स ऑफ कॉमर्स भवन में एक भारत श्रेष्ठ भारत को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच द्वारा व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें वर्तमान में भारत की वस्तुस्थिति पर वक्ताओं ने चिंतन व्यक्त किया। उपमुख्य वक्ता डॉ. वर्णिका शर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष,(जनजातीय क्षेत्र अध्ययन समूह) राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच ने कहा कि वर्तमान परिवेश पर आधारित जीवनवृत्त में छोटे-छोटे परिवर्तन कर आत्मबोध प्राप्त कर जीवन को सुरक्षित व आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उन्होंने मंच के निर्माण और ध्येय पर आधारित विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक आत्मबोध नहीं होगा, आत्मचिंतन नहीं होगा तब तक आत्मनिर्भरता की बात केवल और केवल ख्याली पुलाव है।
सेवानिवृत्त डीआईजी धर्मेंद्र गर्ग ने कहा कि सबको एक दूसरे की व्यवस्था सिस्टम में सुधार की अपेक्षा स्वयं को सुव्यवस्थित करते हुए सुव्यवस्थित रूप देने में यथेष्ट सहयोग करना चाहिए। व्यक्तित्ववादिता से अव्यवस्था उत्पन्न होती है, इसके विपरीत ध्येयनिष्ठा से सुव्यवस्थित जीवनवृत्त यापन कर मानव को दानव बनने से रोक कर सामाजिक विकृतिकरण को दूर कर समाज को सुरक्षित किया जा सकता है।
मुख्य वक्ता गोलोक विहारी राय, राष्ट्रीय महासचिव, राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच ने अपने उद्धबोधन में आंतरिक व वाह्य सुरक्षा से सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करते हुए अपने भारत के अस्मितानुगत पहचान, मर्यादा, मानदंड को सुव्यवस्थित सुसज्जित सुसंस्कृत सुसंगठित करते हुए मानव जीवन मूल्यों, सनातन परम्पराओं को अभेद्य बनाकर अपने-आप सह समाज एवं राष्ट्र को सुरक्षित व आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने बस्तर के वर्तमान परिपेक्ष्य पर कहा कि जनजातीय समुदाय को सेवा के नाम पर उनकी मूल संस्कृति से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, ये एक तरह देश को वैचारिक गुलामी को तरफ ले जाने का कुचक्र है। गोलोक बिहारी राय ने राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच की वर्तमान परिस्थितियों में उपयोगिता के विषय में बताते हुए कहा कि ये मंच राष्ट्र की आंतरिक, बाह्य और सांस्कृतिक सुरक्षा पर अध्ययन कर उसको सशक्त बनाने का कार्य करेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के संगठन महामंत्री गोलोक बिहारी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच का ध्येय है कि 54 देश हिमालय हिंद महासागर का ही विस्तार है, जो एशिया में स्थित है। इस क्षेत्र में संपूर्ण विश्व की 41 प्रतिशत आबादी रहती है तथा यह क्षेत्र संयुक्त रूप से सभी चुनौतियों का सामना कर सकता है।
उन्होंने कहा कि ‘हिमालय हिंद महासागर राष्ट्र समूह’ कि स्थापना भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का ही मूर्तरूप है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से भारत तथा मध्य एशियाई देशों के मध्य संबंधों का विवरण प्रस्तुत किया।


