बलरामपुर

हाथी दल से दहशत, ग्रामीणों ने प्रभावित गांवों को हाथी विचरण क्षेत्र घोषित करने की उठाई मांग
16-May-2026 11:58 PM
हाथी दल से दहशत, ग्रामीणों ने प्रभावित गांवों को हाथी विचरण क्षेत्र घोषित करने की उठाई मांग

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलरामपुर, 16 मई। जिले के ग्राम चिनियाँ, शिवपुर, छतरपुर, टकिया, कनकपुर एवं रामपुर में 22 हाथियों के दल की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। हाथियों के लगातार जंगल क्षेत्र में विचरण करने से ग्रामीणों की आजीविका पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने सोशल मीडिया और स्थानीय माध्यमों से शासन-प्रशासन से मांग की है कि इन गांवों को तत्काल ‘वन हाथी विचरण क्षेत्र’ घोषित किया जाए। साथ ही तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हितग्राहियों को प्रति सदस्य मिलने वाली आय की भरपाई वन विभाग और प्रशासन द्वारा किए जाने की मांग भी उठाई गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में तेंदूपत्ता तोड़ाई का समय चल रहा है, जो ग्रामीण परिवारों की आय का प्रमुख साधन है। तेंदूपत्ता सीजन में गांव के लोग जंगल जाकर पत्तियां तोड़ते हैं, जिससे उन्हें कुछ आर्थिक सहारा मिल जाता है। लेकिन क्षेत्र में 22 हाथियों का दल लगातार घूम रहा है, जिससे जंगल जाने में लोगों को डर महसूस हो रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले महुआ चुनाई के दौरान भी हाथियों की मौजूदगी के कारण एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। उस घटना के बाद से लोग जंगल जाने से डरने लगे थे और कई ग्रामीण महुआ भी पूरी तरह नहीं चुन पाए थे। अब तेंदूपत्ता सीजन में भी वैसा ही भय का माहौल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि वे जंगल पत्तियां तोडऩे जाते हैं, तो हर समय किसी अनहोनी और जनहानि का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि जंगल में घूम रहे हाथियों पर नियमित निगरानी रखी जाए और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। उनका कहना है कि यदि तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान किसी भी व्यक्ति को हाथियों से किसी प्रकार की जान-माल की हानि हो सकती  है,

इस संबंध में वन विभाग की रेंजर दिलरुबा बानो ने बताया कि 22 हाथियों का दल क्षेत्र में भ्रमण कर रहा है, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल है। उन्होंने कहा कि विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही है और कर्मचारियों को नियमित भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी प्रकार की जनहानि या नुकसान की स्थिति उत्पन्न न हो।


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