अंतरराष्ट्रीय

आसमान में ड्रोन जाम से कैसे निपटा जाए
18-Oct-2021 7:17 PM (35)

इस्राएल के हवाई क्षेत्र में ड्रोन की बढ़ती संख्या के कारण, पूर्व वायु सेना कर्मियों की सेवाओं का उपयोग "ट्रैफिक जाम" की स्थिति और संभावित ड्रोन टकराव को रोकने के लिए किया जा रहा है.

(dw.com)  

इस्राएल को ड्रोन तकनीक का प्रमुख केंद्र माना जाता है. सूशी, आइसक्रीम और बीयर की डिलीवरी तक के लिए फिलहाल ड्रोन का इस्तेमाल इस्राएल में किया जा रहा है. लेकिन ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल से टक्कर का खतरा बढ़ रहा है और इस स्थिति में इस्राएली वायु सेना के पूर्व कर्मियों की मदद ली जा रही है.

हवा में ट्रैफिक जाम

ड्रोन को तेल अवीव के तट से विभिन्न वस्तुओं को पहुंचाते हुए देखा जा सकता है. कभी ये ड्रोन सूशी पहुंचाते हैं तो कभी बीयर की डिलीवरी करते हैं. आइसक्रीम पहुंचाने के लिए भी इन दिनों ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है.

हाईलैंडर के विशेषज्ञ ड्रोन की बढ़ती संख्या के साथ-साथ टकराव के बढ़ते जोखिमों को रोकने के लिए काम कर रहे हैं. विभिन्न कंपनियां ड्रोन डिलीवरी में लगी कंपनियों को अपनी सेवाएं दे रही हैं, जिसमें ड्रोन की रणनीति भी तैयार की जाती है.

हाईलैंडर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इलॉन एबेलसन कहते हैं, "ड्रोन उड़ाना कोई समस्या नहीं है. समस्या ये है कि एक ही समय में कई कंपनियों द्वारा बनाए गए अलग-अलग ड्रोन उड़ते हैं. इन ड्रोन की निगरानी हमारे सॉफ्टवेयर द्वारा की जाती है और हम सुनिश्चित करते हैं कि ये आपस में न टकराएं."इस्राएल ने ड्रोन तकनीकी को प्रोत्साहित करने के लिए निजी और सार्वजनिक सहयोग की मदद से 60 लाख डॉलर का निवेश किया है. इसी परियोजना के तहत हाईलैंडर कंपनी ने यह नई तकनीक प्रदर्शित की है, जिसे ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है. इस्राएल इनोवेशन अथॉरिटी के तहत ड्रोन पहल की प्रमुख डानिएला पार्थम के मुताबिक, "भविष्य में किसी भी समय इस्राएल के शहरों में सैकड़ों ड्रोन होंगे, और इस स्थिति से पहले टकराव को रोकने के लिए एक रणनीति विकसित की जा रही है. हमारा लक्ष्य इस्राएल में प्रतिस्पर्धी बाजार बनाना है न कि किसी एक कंपनी का वर्चस्व."

वह कहती हैं, "हमारे लक्ष्यों में से एक है यातायात की भीड़ को कम करना, प्रदूषण को कम करना और माल की डिलीवरी के लिए एक बेहतर और सुरक्षित वातावरण बनाना है."

इस्राएली ड्रोन कार्यक्रम और देशों के मुकाबले बहुत आधुनिक है. कार्यक्रम के बारे में सबसे बड़ी चिंता गजा में रहने वाले फलस्तीनियों द्वारा व्यक्त की गई है, जो मानते हैं कि घिरी हुई गजा पट्टी में इस्राएली ड्रोन डर का माहौल पैदा करते हैं. हालांकि इस्राएल का कहना है कि वाणिज्यिक ड्रोन कार्यक्रम एक नया दृष्टिकोण देगा.(dw.com)

एए/वीके (एएफपी)

बांग्लादेश में उपद्रवियों ने हिंदुओं के 20 घरों में लगाई आग, पुलिस के साथ झड़प
18-Oct-2021 5:06 PM (30)

ढाका. बांग्लादेश में हिंदुओं के प्रति हिंसा जारी है. दुर्गा पूजा पंडालों और इस्कॉन मंदिर में तोड़फोड़ और हिंसा के बाद अब रंगपुर में उपद्रवियों ने हिंदुओं के 20 घरों को जला दिया है. वहीं, स्थानीय संघ परिषद के अध्यक्ष के मुताबिक उपद्रवियों ने कम से कम 65 घरों में आग लगाई है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, उपद्रवियों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई है.

ढाका ट्रिब्यून के अध्यक्ष मोहम्मद सादकुल इस्लाम के अनुसार, उपद्रवी जमात-ए-इस्लामी और छात्र शाखा इस्लामी छात्र शिविर की स्थानीय इकाई के थे.

बांग्लादेश के प्रमुख न्यूज मीडिया हाउस dhakatribune.com की खबर के अनुसार, रविवार को रंगपुर के उपजिला पीरगंज में हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ के बाद आग लगाई गई. रामनाथपुर यूनियन में माझीपारा के जेलपोली में इस्लामिक कट्टरपंथियों के एक समूह ने हिंदुओं के घरों पर हमला किया. इसमें 20 घरों को जला दिया गया.

बांग्लादेश में हिन्दू मंदिरों पर हमले 13 अक्टूबर से शुरू हुए. अष्टमी के दिन मूर्ति विसर्जन के मौके पर कई पूजा मंडपों में तोड़फोड़ हुई. सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ी थी कि पूजा पंडाल में कुरान मिली है, जिसके बाद कई जगहों पर हिंसक घटनाएं हुईं. उपद्रवियों ने चिट्टागांव के कोमिला इलाके में दुर्गा पंडालों पर हमले किए, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी.  इसके अलावा चांदपुर, चिट्‌टागांव, गाजीपुर, बंदरबन, चपाईनवाबगंज और मौलवीबाजार में कई पूजा पंडालों में तोड़फोड़ की गई.

आपत्तिजनक पोस्ट के बाद भड़की हिंसा
पुलिस का कहना है कि एक हिंदू व्यक्ति ने फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट की थी. इसके बाद तनाव पैदा हो गया. तनाव बढ़ने के तुरंत बाद पुलिस मौके पर पहुंची और युवक के घर के चारों ओर पहरा दे दिया. पुलिस का कहना है कि उन्होंने उसके घर को तो बचा लिया, लेकिन उपद्रवियों ने आस-पास के करीब 15 से 20 घरों में आग लगा दी.

फायर ब्रिगेड को घटना की सूचना रात करीब 9.30 बजे पता चली. इसके बाद पीरगंज, मीठापुकुर और रंगपुर शहर से दमकल की गाड़ियां आग बुझाने के लिए पहुंचीं. यहां अभी भी बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात है.

इन इलाकों में तनाव की स्थिति
हमलों और झड़पों के बाद चांदपुर, कॉक्स बाजार, बंदरबन, सिलहट, चटगांव और गाजीपुर में स्थिति गंभीर बनी हुई है. अधिकारियों को स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के जवानों, पुलिस और RAB की बड़ी टुकड़ियों को तैनात करना पड़ा है.

अब तक 100 से ज्यादा संदिग्ध गिरफ्तार
BGB के संचालन निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल फैजुर रहमान ने कहा कि संबंधित उपायुक्तों के अनुरोध पर और गृह मंत्रालय के निर्देश पर बीजीबी कर्मियों को तैनात किया गया था. हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करने के आरोप में 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है. (news18.com)

अब चांद पर भी ऑल टाइम रहिए कनेक्टेड, वाई-फाई लगाने की तैयारी कर रहा NASA
18-Oct-2021 12:45 PM (42)

वॉशिंगटन. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा अब चांद पर वाई-फाई नेटवर्क लगाने की तैयारी कर रही है. एक हालिया स्टडी में ये जानकारी दी गई है. नासा के ग्लेन रिसर्च सेंटर में डायरेक्टर मैरी लोबो ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि यह आर्टेमिस के तहत चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने में आने वाली चुनौतियों और हमारे समाज में बढ़ती समस्याओं का समाधान विकसित करने का एक शानदार मौका है.

वाई-फाई प्रोग्राम को लेकर हालिया स्टडी नासा की कम्पास लैब ने किया है. इन्साइडर से बात करते हुए कम्पास लैब के स्टीव ओल्सन ने कहा कि यह स्टडी बेहद अहम है, क्योंकि आर्टेमिस बेसकैंप से जुड़े क्रू, रोवर्स, विज्ञान और खनन उपकरणों को पृथ्वी से संपर्क में रहने के लिए एक बेहतर कनेक्शन की जरूरत होगी.

नासा ने प्रेस रिलीज में बताया कि डिजिटल असमानता और बेहतर इंटरनेट सेवा तक पहुंच की कमी पूरे अमेरिका में फैली एक सामाजिक आर्थिक चिंता है. एक रिपोर्ट के अनुसार क्लीवलैंड के लगभग 31 फीसदी घरों में ब्रॉडबैंड की सुविधा नहीं है. इससे पहले खबर आई थी कि नासा चांद को लेकर अपने अगले ‘मून मिशन’ शुरुआत करने जा रहा है. इस मिशन का लक्ष्य चांद की सतह पर एक स्थायी क्रू स्टेशन का निर्माण करना है.

इसके लिए किसी अंतरिक्ष यात्री को चांद पर भेजने से पहले एजेंसी चंद्रमा के ठंडे, छायादार दक्षिणी ध्रुव पर गोल्फ-कोर्ट के आकार का एक रोबोट लॉन्च कर रही है. इस रोवर का नाम VIPER यानी Volatiles Investigating Polar Exploration Rover होगा. यह रोवर चंद्रमा की सतह पर जल स्रोतों की खोज में 100 दिन बिताएगा. यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से जुड़ा पहला सर्वे होगा.

चांद का निर्माण 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी और थेया नाम के एक ग्रह के टकराने से बचे अवशेषों से चंद्रमा का निर्माण हुआ था. अपोलो मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद से कुछ टुकड़े लेकर आए थे. ये टुकड़े उसी ग्रह के हैं. चांद का वजन लगभग 81 अरब टन है. चांद पूर्णता गोल नहीं है, यह अंडे के आकार का है. (news18.com)

बर्फबारी के चलते मनाली-लेह हाईवे बंद, सरचू में ऑक्सीजन की कमी से एक पर्यटक की मौत
18-Oct-2021 12:44 PM (34)

 

हिमाचल प्रदेश के मनाली-लेह हाइवे को इस सप्ताह संभावित बर्फबारी के कारण अधिकारियों ने दो दिनों के लिए बंद कर दिया है. मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग-21 पर 18 अक्टूबर तक बर्फबारी की संभावना अधिक है. 

उपायुक्त लाहौल ने बताया कि बारालाचा टॉप पर करीब दो फीट बर्फ पड़ी है. जब मौसम साफ होगा तो रोड को खोलने में 48 घंटे लगेंगे. बता दें कि हिमाचल प्रदेश में रविवार को बारिश और बर्फबारी हुई है. रोहतांग दर्रे में एक बार फिर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है.

बारालाचा, कुंजुम पास, मनाली, लाहौल-स्पीति, धौलाधार और चंबा की ऊंची चोटियों के अलावा मणिमहेश में ताजा हिमपात हुआ है.

बर्फबारी के बाद दो दिन के लिए रोहतांग दर्रे में पर्यटकों के जाने पर रोक लगा दी है.

हालांकि अटल टनल से आवाजाही सुचारु रहेगी. लाहौल के सरचू में ऑक्सीजन की कमी से पर्यटक की मौत हो गई है. जबकि कुंजुम दर्रे से सात पर्यटकों को रेस्क्यू किया. (news18.com)

31 करोड़ जीतकर भी हार गए पति-पत्नी, अब टूट गया दोनों का रिश्ता
18-Oct-2021 12:32 PM (32)

 

आपने सुना होगा कि कोई किस्मत की वजह से बैठे-बैठे करोड़पति बन गया, या फिर उनसे कोई खजाना मिल गया. हालांकि ये सुनने में कम आता है कि किस्मत के चलते किसी के हाथ में पैसे आते-आते चले जाएं. एक ब्रिटिश कपल इस वक्त अपने दुर्भाग्य की वजह से दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहा है. इस कपल को 3 मिलियन पाउंड यानि भारतीय मुद्रा में करीब 31 करोड़ रुपये की लॉटरी लगी, लेकिन इनके हाथ में एक पाई भी नहीं आई.

मार्टिन और के टॉट नाम के पति-पत्नी की लॉटरी की टिकट ही उन्हें नहीं मिली, ऐसे में उनकी 31 करोड़ रुपये की इनाम राशि भी उनके हाथ से निकल गई. उन्होंने इसके लिए कोर्ट में भी अर्जी लगाई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इससे भी बुरा तो ये हुआ कि इस घटना के बाद पति-पत्नी के बीच मनमुटाव इतना बढ़ा कि दोनों का ब्रेक अप हो गया.

Lottery Company ने पैसे देने से किया इनकार
Mirror की रिपोर्ट के मुताबिक 2001 नेशनल लॉटरी ड्रॉ के 6 महीने बाद जाकर इस कपल को एहसास हुआ कि उन्होंने इनाम के तौर पर 31 करोड़ की भारी-भरकम रकम जीती है. फिर मार्टिन और के टॉट ने लॉटरी कंपनी को इस बात की जानकारी दी, लेकिन उन्हें लॉटरी का टिकट नहीं दे पाए. उन्होंने कम्प्यूटर रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज़ के ज़रिये खुद को विजेता साबित करने के तमाम प्रयास किए, लेकिन कंपनी ने उनकी कोई भी दलील नहीं मानी. पति-पत्नी ने कंपनी के खिलाफ अदालत में भी अपील की, लेकिन ये भी काम नहीं आया. कंपनी के मुताबिक उनका नियम है कि लॉटरी टिकट खोने के 30 दिन अंदर रिपोर्ट की जानी चाहिए, जो नहीं किया गया था. ऐसे में इनाम राशि उन्हें नहीं दी जा सकती.

इनाम राशि भी नहीं मिला, हो गया तलाक
पति-पत्नी के बीच लॉटरी का टिकट खोने के बाद तनाव बढ़ने लगा. कुछ दिन झेलने के बाद आखिरकार दोनों का ब्रेक अप हो गया. अदालत में जब केस हारने के बाद टॉट ने कहा कि उन्हें पैसे मिलने का दुख ज़रूर है, लेकिन इससे उनकी ज़िंदगी थम नहीं जाएगी. उन्हें ब्रिटेन का Unluckiest Couple कहा जा रहा है. वैसे भी अगर किसी के हाथ में 31 करोड़ का लॉटरी टिकट हो और उसे एक भी पाई न मिले, तो ये दुर्भाग्य ही तो है. (news18.com)

पेट्रोल पंप पर टॉयलेट के लिए गई थी महिला, लौटी तो हाथ में बेटा था !
18-Oct-2021 12:30 PM (45)

 

प्रेगनेंसी किसी भी महिला की ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत एहसास होता है. हर कोई इसको लेकर अपनी अलग-अलग योजनाएं और सपने रखता है. यहां तक कि बच्चे की डिलीवरी को लेकर भी महिलाएं ड्रेसेज़ तैयार कराने लगी हैं. वे ये भी तय करती हैं कि उन्हें किस अस्पताल में डिलीवरी करानी है. ऐसे में अगर बच्चा किसी वॉशरूम में हो जाए तो? कैटलिन नाम की महिला के साथ ऐसा ही हुआ, उसका बेटा तब इस दुनिया में आ गया, जब वो टॉयलेट करने एक पेट्रोल स्टेशन के वॉशरूम में गई थीं.

कैटलिन अपने पति सर्गियो के साथ गाड़ी में कहीं जा रही थीं. इसी बीच उन्हें वॉशरूम का इस्तेमाल करने के लिए एक पेट्रोल स्टेशन पर रुकना पड़ गया. उनके पति को भी इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि उनकी पत्नी गईं अकेली हैं, लेकिन लौटेंगी तो उनके साथ एक प्यारा सा बच्चा होगा. उनके लिए ये बड़ा सरप्राइज़ था कि कैटलिन उधर से बच्चे को हाथ में उनका दूसरा बच्चा लेकर लौट रही थीं.

10 मिनट में हो गई डेलीवरी
कैटलिन और सर्गियो का ये दूसरा बच्चा था. उनके लिए ये सामान्य प्रेगनेंसी थी. उन्हें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि उनका बच्चा इस तरह दुनिया में आएगा. फैमिली ड्राइव पर जाते वक्त कैटलिन को टॉयलेट जाने की ज़रूरत महसूस हुई. उनके पति ने एक पेट्रोल स्टेशन के वॉशरूम पर गाड़ी रोकी और उनकी पत्नी अंदर गईं. जब वे 10 मिनट बाद कैटलिन वापस आईं, तो उनके साथ उनका नवजात बच्चा था. उनके पति को इस सुखद आश्चर्य पर यकीन ही नहीं हुआ. उन्होंने इसका वीडियो बना लिया. बाद में उन्हें आनन-फानन में शुगर लैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया. अब मां और बेटे दोनों ही स्वस्थ हैं.

20 मिलियन लोगों ने देखा वीडियो
ये कपल अमेरिका में टेक्सस का रहने वाला है. उन्होंने अपनी ये अनोखी कहानी TikTok के ज़रिये लोगों के सामने शेयर की. इस वीडियो को अब तक 20 मिलियन लोग देख चुके हैं. दुनिया भर के लोग इस पर कमेंट कर रहे हैं. लोग कैटलिन की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. एक यूज़र ने लिखा कि वो वाकई एक मजबूत महिला हैं. एक अन्य यूज़र ने लिखा कि आपने जिस आसानी से बच्चे को जन्म दिया, वो तारीफ के काबिल है. कुछ लोगों ने मज़ाक में ये भी कहा कि उन्होंने इस तरह जन्म देकर लाखों की सेविंग कर ली. (news18.com)

बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप के बाद कार में रहने को मजबूर हुई महिला, कहा- 'गाड़ी में झांकते हुए निकलते हैं लोग'
18-Oct-2021 12:28 PM (48)

 

बेघर की तरह जिंदगी बिताना किसी भी इंसान के लिए मुश्किल है. ना ही सर पर छत होती है और ना ही घर के अन्य ऐश-ओ-आराम नसीब होते हैं. मगर इस तरह की मुश्किल परिस्थिति में भी लोग जीवन जीना सीख जाते हैं. ऐसी जिंदगी इंग्लैंड (England) की एक महिला (Homeless Woman) बिताने पर मजबूर है. पिछले काफी दिनों में उसे एक कार में रहना पड़ रहा है. हाल ही में उसने अपने लाइफ से जुड़े एक्सपीरियंस को शेयर किया जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

केंट के फोकस्टोन में रहने वाली कारना स्टीफेंस एक कुरियर कंपनी में डिलिवरी गर्ल का काम करती हैं. वो जिस कार से लोगों के घर उनका पार्सल पहुंचाती हैं, वही कार उनका घर भी है. कारना हर्मीज नाम की एक कंपनी में काम करती हैं मगर उनकी सैलेरी इतनी नहीं है कि वो घर पर रहने का रेंट दे सकें. कारना की लाइफ हमेशा से ऐसी नहीं थी. केंट लाइव वेबसाइट से बात करते हुए कारना ने कहा- “मेरे पिता के घर में कई लोग रहते थे. मेरे सौतेले भाई-बहन भी वहां रहने लगे थे इसलिए घर में काफी भीड़ हो गई थी.” उसी वक्त वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ उसके फ्लैट में शिफ्ट हो गईं. उन्होंने कहा- “बॉयफ्रेंड के साथ शिफ्ट होने के कुछ वक्त बाद हमारा ब्रेकअप हो गया और मुझे वहां से निकलना पड़ा. ना मेरे पास इतने रुपये थे कि मैं कहीं और रेंट देकर रह पाती और ना मेरे पिता के घर में रहने की जगह थी. इस वजह से मुझे कार में ही रहना पड़ा.”

अब करीब एक साल से कारना को अपनी कार में रहना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि कार में रहना कई बार शर्मिंदगी होती है तो कई मौकों पर डर भी लगता है. कारना के कहा कि अक्सर वो कार में आराम कर रही होती हैं या सोने की कोशिश करती रहती हैं तो आसपास से जा रहे लोग गाड़ी के अंदर झांककर देखने लगते हैं. कारना ने कहा कि उनके ऑफिस वाले उनका बहुत सपोर्ट करते हैं. हर कोई उनकी स्थिति को समझता है. ऑफिस के लोग उन्हें समय से पहले ऑफिस के अंदर आने की अनुमति दे देते हैं जिससे वो अपना फोन चार्ज कर सकें. उन्होंने कहा कि वो अगर काम नहीं करेंगी तो अपने खर्चे नहीं उठा पाएंगी. इसलिए उनका काम करना जरूरी है. मगर पैसों की कमी के चलते वो घर किराये पर नहीं ले सकती हैं. उन्होंने बताया कि उनका परिवार भी उनका बहुत ख्याल रखता है. कुछ दोस्त या परिवार के लोग तो उन्हें एक-एक महीने के लिए अपने यहां रहने को भी कहते हैं. हाल ही में उन्होंने फेसबुक पर भी अपने इस एक्सपीरियंस के बारे में सबको बताया. (news18.com)

कैनवस पर गिरी कॉफी और बन गई खूबसूरत पेंटिंग, तस्वीरें देख आप भी रह जाएंगे चकित !
18-Oct-2021 12:28 PM (62)

1987 में गुलिया का जन्म मैंटुआ में हुआ. उन्होंने Accademia of Fine Arts of Bologna से ग्रैजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने अपना आर्टिस्टिक करियर सेट किया.

उनकी ढलकी हुई कॉफी से तस्वीर बनाने की कला देखकर हर कोई दंग रह जाता है. खासतौर पर इंस्टाग्राम पर उनकी ये कला सुपरहिट है.

गुलिया अब अपनी इस कला को नए आयाम दे रही हैं. वे कॉफी के बाद आइस क्रीम और पाइ फिलिंग से भी इसी तरह के आर्ट वर्क्स तैयार कर रही हैं. इतना ही नहीं उन्हें अब अलग-अलग ब्रांड्स से प्रोफेशनल एंडोर्समेंट भी मिलने लगे हैं.

कॉफी से बनाए गए आर्टवर्क्स में गुलिया आम तौर पर रोज़ाना की ज़िंदगी से इंस्पायर्ड चीज़ें बनाती हैं. वे मशहूर कलाकृतियों, आर्किटेक्चर या फिर मानवीय चित्रों को कॉफी लिक्विड से बनाती हैं. वे भविष्य में काफी कुछ करना चाहती हैं, लेकिन एक वक्त में एक ही चीज़ करती हैं.

गुलिया का कहना है कि वो हर दिन सुबह उठकर कुछ नया और रचनात्मक ढूंढती हैं, जो वे अपनी ज़िंदगी में करना चाहती हैं. उनकी इस कला ने उन्हें अलग पहचान दी है और वे इसे आगे ले जाना चाहती हैं.  (news18.com)

दुकान में शॉपिंग करने जाती है महिला तो पीछा करने लगते हैं गार्ड्स, हर वक्त रखते हैं नजर! बतायी वजह
18-Oct-2021 12:26 PM (38)

दुनिया में कई लोगों को बंजारों की जिंदगी बिताना अच्छा लगता है. वो चाहते हैं कि वो अलग-अलग जगह घूमें और जिंदगी का आनंद उठाएं. ट्रैवेलर्स जिम्मेदारियां नहीं लेते इस वजह से बंजारों की जिंदगी से जलते भी हैं और उनको नापसंद करते हैं. मगर लोगों के ऐसे व्यवहार से ट्रैवेलर्स खुश नहीं रहते हैं. हाल ही में एक महिला ने अपनी लाइफ से जुड़ी ऐसी बात का खुलासा किया जिसे जानकर हर कोई हैरान हो जा रहा है. महिला ने बताया कि कैसे लोग उसे शक की नजर से देखते हैं.

डेनियल जो ली एक रोमानी ट्रैवलर हैं. वो पूरी तरह से ट्रैवलिंग से जुड़ी हुई हैं. इसके साथ ही वो टिकटॉक पर वीडियोज बनाती हैं. हाल ही में डेनियल ने टिकटॉक पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्होंने अपनी ट्रैवलिंग लाइफ से जुड़ा एक एक्सपीरियंस शेयर किया है. डेनियल ने बताया कि जब भी वो किसी दुकान में जाती हैं तो वहां के सिक्योरिटी गार्ड्स उन्हें घूर-घूर कर देखने लगते हैं. यही नहीं वो उनका दुकान के अंदर पीछा भी करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि गार्ड्स को डेनियल पर शक होता है कि कहीं वो दुकान से कुछ चुरा ना लें. दरअसल, लोगों के मन में बंजारों के लिए ये भावना होती है कि वो चोर होते हैं और शॉप लिफ्टिंग करते हैं. इस कारण से उनको लोग शक की नजरों से देखने लगते हैं.

वीडियो में डेनियल ने वैसे तो बड़े ही फनी तरीके से बताया कि गार्ड्स कैसे उनके पीछे-पीछे घूमते हैं मगर डेली स्टार वेबसाइट से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ये देखकर बहुत बुरा लगता है. गार्ड्स की इन हरकतों से उनके एंग्जाइटी होने लगी है. जब भी वो सुपरमार्केट्स में जाती हैं वहां के सिक्योरिटी गार्ड्स उनको ही देखते रहते हैं. वो बताना चाहती हैं कि वो चोरी नहीं करेंगी मगर उन्हें समझ नहीं आता है कि उनपर लोग इस तरह से क्यों नजर रखते हैं. उन्होंने कहा- “मैंने आज तक कभी चोरी नहीं की है. मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो दुकानों से जाकर सामान चुराऊं.”  (news18.com)

जर्मनी में अब ये काम नहीं किया तो नहीं खरीद पाएंगे रोजमर्रा के जरूरी सामान
18-Oct-2021 12:25 PM (26)

बर्लिन. दुनियाभर में कोरोना वायरस से निपटने के लिए कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं. ऐसा ही एक नियम जर्मनी के हेस्से राज्य में देखने को मिला है, जहां बिना वैक्सीन लगवाए लोगों को दुकानों और अन्य जरूरत की जगहों पर जाने से बैन कर दिया गया है.

हेस्से राज्य ने बुनियादी जरूरतें मुहैया कराने वाली जगहों पर बिना वैक्सीन लगवाए लोगों की एंट्री बैन कर दी है. ये नियम ऐसे समय पर लाया गया है, जब इसके पड़ोसी राज्यों में वैक्सीनेशन को अनिवार्य बनाने के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन हो रहे हैं.

हेस्से राज्य के सुपरमार्केट को ये अनुमति दी गई है कि वे अब बिना वैक्सीन लगवाए लोगों को भोजन और अन्य आवश्यक चीजें खरीदने के अधिकार से रोक सकते हैं. राज्य के चांसलर ने जर्मन पत्रिका BILD को इसकी जानकारी दी. वायरस पर नई नीति के तहत स्टोर ये तय कर सकते हैं कि उन्हें ‘2जी नियम’ को लागू करना है या नहीं.

‘2जी नियम’ का मतलब ये है कि केवल वैक्सीनेटेड और रिकवर लोगों को ही स्टोर में एंट्री दी जाएगी. जबकि इससे अधिक ढील देने वाले नियम का नाम ‘3 जी नियम’ है. इसके तहत वैक्सीनेटेड और रिकवर लोगों के साथ-साथ उन लोगों को भी स्टोर में एंट्री दी जाएगी, जो कोविड निगेटिव हैं.

राज्य के प्रमुख वोल्कर बाउफियर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नए नियमों को बड़े पैमाने पर लागू नहीं किया जाएगा. उन्होंने ये कहा कि हमें उम्मीद है कि इस नियम का प्रयोग सिर्फ आने वाले कुछ दिनों के लिए होगा और जो बिजनेस रोजमर्रा की चीजें मुहैया कराते हैं, वे इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे.

राज्य प्रमुख ने कहा कि सबसे अधिक सुरक्षा वैक्सीनेशन के जरिए ही मिलती है. यही वजह है कि वैक्सीन बिना किसी झंझट के आसानी से लगाई जा रही है. उन्होंने कहा कि मास्क लगाना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना सभी बिजनेस के जरिए होगा, क्योंकि इससे वायरस को रोकने में मदद मिलती है. (एजेंसी इनपुट के साथ) (news18.com)

'मोदी फोन नहीं उठा रहे, बाइडन की नहीं आ रही कॉल...' इमरान खान पर मरियम नवाज ने लिए मजे
18-Oct-2021 12:25 PM (41)

इस्‍लामाबाद. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मौजूदा स्थिति को लेकर विपक्ष भी मज़ाक बना रहा है. पाकिस्‍तान की प्रमुख विपक्षी पार्टी पीएमएल एन की नेता मरियम नवाज शरीफ ने आईएसआई चीफ के इंटरव्‍यू लेने की खबरों पर इमरान को घेरा. मरियम ने कहा, ‘विदेशी मोर्चे पर इमरान खान फेल साबित हुए हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इमरान खान का फोन नहीं उठा रहे हैं, वहीं अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन की कॉल नहीं आ रही.’

फैसलाबाद के धोबीघाट मैदान में दिए अपने भाषण में मरियम नवाज शरीफ ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने केवल एक वादा पूरा किया है. वह है हर व्‍यक्ति को रुलाने का. आज पूरा देश रो रहा है. उन्‍होंने कहा, ‘अमेरिकी टीवी चैनलों पर लोगों की टिप्‍पणी है कि इमरान की असली सत्‍ता इस्‍लामाबाद के मेयर से ज्‍यादा की नहीं है.’ मरियम नवाज ने पाकिस्‍तान की जनता से अपील की कि वे इमरान सरकार को उखाड़ फेकने में उनकी मदद करें.

दरअसल, इमरान खान ने सत्‍ता में आने के बाद लगातार कोशिश की कि पीएम मोदी उनसे बात करें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने भी अभी तक इमरान खान से बात नहीं की है, जबकि सत्ता संभालने के बाद बाइडन ज्यादातर राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात कर चुके हैं. इसे लेकर इमरान खान ने कई बार प्रत्‍यक्ष रूप से अपना दर्द बयान किया है. हाल ही में खान ने कहा था कि बेशकर जो बाइडन बहुत बिजी रहते हैं, इसलिए अब तक कॉल नहीं किया होगा.

वहीं, पिछले दिनों पाकिस्तान के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोइद यूसुफ ने हास्‍यास्‍पद बयान देते हुए अमेरिका को धमकी तक दे डाली थी.मोईद यूसुफ ने कहा था कि अगर बाइडन उनके नेतृत्व की अनदेखी करते रहे, तो पाकिस्तान के पास अन्य विकल्प मौजूद हैं. यूसुफ का इशारा चीन की ओर था. (news18.com)

अब बांग्लादेश से भी निकाले जाएंगे रोहिंग्या मुस्लिम? शेख हसीना बोलीं- ये बन गए भारी बोझ
18-Oct-2021 12:24 PM (46)

ढाका. म्यांमार में हिंसा के बाद भारी संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों ने बांग्लादेश में शरण ली थी, लेकिन अब ये इस देश के लिए भी बोझ बन गए हैं. खुद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ये बयान दिया है. पीएम हसीना ने रविवार को कहा कि ये लोग उनके देश पर भारी बोझ बन गए हैं. हसीना ने इन पर संसाधनों की बर्बादी का भी आरोप लगाया.

ढाका ट्रिब्यून की एक खबर के मुताबिक, शेख हसीना ने राजधानी में नीदरलैंड्स के नवनियुक्त राजदूत एनी गेरार्ड वेन लीयूवेन से मुलाकात के दौरान कहा, ‘रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश पर भारी बोझ बन गए हैं. कोक्स बाजार में पर्यावरण और जंगल के संसाधन बर्बाद किए जा रहे हैं.’ कोक्स बाजार में बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान अस्थायी कैंपों में रह रहे हैं.

म्यांमार की सेना की बर्बरता का शिकार होकर 2017 में समुदाय के लाखों लोग जान बचाकर बांग्लादेश पहुंचे थे. अधिकांश रोहिंग्या मुसलमानों ने कॉक्स बाजार कैंप में शरण ली है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर कहा जाता है. बांग्लादेश को उम्मीद थी कि म्यांमार में हालात सुधरने के बाद ये वापस लौट जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब रोहिंग्या मुसलमानों को कॉक्स बाजार से भाषणचार द्वीप पर शिफ्ट किया जा रहा है. कॉक्स बाजार से यहां करीब 1 लाख लोगों को लाए जाने की योजना है.

2016-17 संकट से पहले म्यांमार में करीब 8 लाख रोहिंग्या लोग रहते थे. यह लोग इस देश की सरज़मीन पर सदियों से रहते आए हैं, लेकिन बर्मा (म्यांमार का पुराना नाम) के बौद्ध लोग और वहां की सरकार इन लोगों को अपना नागरिक नहीं मानते. यहां रोहिंग्याओं को अत्याचार और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग बांग्लादेश और थाईलैंड की सरहदों पर स्थित शरणार्थी कैंपों में अमानवीय हालातों में रहने को मजबूर हैं. (news18.com)

Squid Game की वजह से Netflix को अरबों का मुनाफा, होगी 660 करोड़ रुपए से ज्यादा की रिकॉर्ड तोड़ कमाई
18-Oct-2021 11:27 AM (39)

मुंबई. कोरियाई वेब सीरीज ‘स्क्विड गेम’ पूरी दुनिया में पॉपुलर हो रही है. भारत में भी इसे काफी पसंद किया जा रहा है. ये सीरीज 17 सितंबर को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुई है. इसकी स्ट्रीमिंग के बाद से ही हर कोई इसकी तारीफ कर रहा है. इतना ही शो की वजह से मेकर्स को काफी फायदा हुआ है और इससे कहीं ज्यादा ओटीटी प्लेटफॉर्म को भी फायदा होने वाला है. फिल्म क्रिटिक और ट्रेड एनालिस्ट रमेश बाला का मानना है कि ओटीटी इससे 891 मिलियन डॉलर यानी 660 करोड़ रुपए से ज्यादा का फायदा होगा. ओटीटी ने मेकर्स को सिर्फ 21 मिलियन डॉलर यानी 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया हैं.

रमेश बाला ने अपने एक ट्वीट में लिखा,”नेटफ्लिक्स ने सबसे बड़े शो ‘स्क्विड गेम’ के लिए 21 मिलियन डॉलर दिए हैं. इससे 891 मिलियन डॉलर की कमाई होगी. टीवी/ओटीटी प्लेटफॉर्म इंटरनेशनल मार्केट में स्क्विड गेम जैसे ब्लॉकबस्टर शो की तलाश में हैं…” नेटफ्लिक्स पर कोरियन सीरिज स्क्विड गेम्स सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो बन चुका है. इस सीरिज के स्टार्स को अंतर्राष्ट्रीय लोकप्रियता मिल रही है. नौ एपिसोड वाली यह सीरिज लोगों को बांधे रखती है.

क्या खास है इस शो में?
यह सीरिज दरअसल, साउथ कोरिया की आर्थिक स्थिति को लेकर है. सीरिज में दिखाया गया है कि कैसे 456 लोगों को एक जगह जमा किया जाता है. हर किसी में एक चीज यहां कॉमन है पैसे की जरूरत. किसी के ऊपर बैंक का कर्ज है तो किसी पर माफिया का. यहां तक कि किसी को मां के इलाज के लिए पैसे चाहिए तो किसी को भाई की परवरिश के लिए. इन खिलाड़ियों के कैरेक्टर भी हैं.

कुछ ऐसा है गेम
जैसे खिलाड़ी नंबर 456 को जुए की लत है. जिसके चलते उसने अपना सारा पैसा गंवा दिया. बीवी भी छोड़कर चली जाती है. वहीं, खिलाड़ी नंबर 218 एक इंवेस्टमेंट कंपनी का हेड है. वो अपनी यूनिवर्सिटी का टॉपर छात्र रह चुका है. होनहार, समझदार. लेकिन सैंग पर क्लाइंट्स के पैसों का गबन करने के आरोप हैं और पुलिस उसके पीछे है. (news18.com)

ब्रिटिश सांसद के हत्यारे के पिता ने कही बड़ी बात, बोले- मैं तो हैरान रह गया था...
17-Oct-2021 9:56 PM (37)

लेह-ऑन-सी (यूके). ब्रिटिश सांसद को चाकू मारकर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार हमलवार के पिता ने ब्रिटिश मीडिया से कहा है कि वह अपने बेटे की गिरफ्तारी से स्तब्ध और ‘आहत’ है. वहीं, पुलिस आतंकवाद कानूनों के तहत संदिग्ध से पूछताछ कर रही है.

‘संडे टाइम्स’ के अनुसार, सोमालिया के प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार, हर्बी अली कुल्ने ने कहा कि आतंकवाद रोधी पुलिस ने उनसे मुलाकात की थी. उनके हवाले से कहा गया है, ‘मैं बहुत आहत महसूस कर रहा हूं. मैंने ऐसी उम्मीद नहीं की थी या सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था.’

ब्रिटिश अधिकारियों ने 69 वर्षीय कंजरवेटिव सांसद डेविड एमेस की शुक्रवार को हुई घातक चाकूबाजी में संदिग्ध का नाम जारी नहीं किया है, लेकिन ब्रिटिश मीडिया ने बताया कि संदिग्ध 25 वर्षीय अली हर्बी अली था, जिसे सोमाली मूल का ब्रिटिश नागरिक बताया जा रहा है.

लंबे समय से सांसद रहे एमेस पर लंदन से लगभग 40 मील (62 किलोमीटर) पूरब स्थित शहर लेह-ऑन-सी के एक गिरजाघर में अपने समर्थकों के साथ एक नियमित बैठक के दौरान हमला किया गया था.

मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने हमले को आतंकवाद के रूप में वर्णित किया है और कहा है कि प्रारंभिक जांच से ‘इस्लामी चरमपंथ से जुड़े एक संभावित उकसावे’ का षड्यंत्र प्रतीत होता है. यह स्पष्ट नहीं है कि संदिग्ध का एमेस से क्या लेना-देना था.

पुलिस को संदिग्ध से पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है, जिसे हत्या के संदेह में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अभी तक उसे आरोपित नहीं किया गया है.(news18.com)

जापान के नए PM ने इस मंदिर में ऐसा क्या भेजा, जिससे पूरे देश में मचा बवाल, चीन-कोरिया भी नाराज
17-Oct-2021 9:55 PM (46)

टोक्यो. जापान के नए प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने टोक्यो के एक धर्मस्थल में रविवार को दान भेजा, जिसे चीनी और कोरियाई लोग जापानी युद्ध हमलों का प्रतीक मानते हैं. हालांकि, किशिदा ने व्यक्तिगत रूप से मंदिर में जाकर दर्शन नहीं किए.

किशिदा ने यासूकुनी श्राइन के शरद उत्सव के मौके पर ‘मासाकाकी’ धार्मिक आभूषण दान स्वरूप भेजे. किशिदा ने चार अक्टूबर को पद संभाला था, जिसके बाद से उनकी यह पहली धार्मिक गतिविधि है.

20वीं सदी के पूर्वार्द्ध में जापान के हमले के पीड़ित चीनी और कोरियाई इस मंदिर को जापान के आक्रमण का प्रतीक मानते हैं. जापानी प्रधानमंत्री के इस कदम को आलोचक, देश के युद्ध अत्याचारों को लेकर पश्चाताप नहीं होने के तौर पर देखते हैं.

किशिदा सप्ताहांत में उत्तरी जापान के 2011 की सुनामी में प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे थे और वह मंदिर नहीं गए. उनके पूर्ववर्ती योशीहिदे सुगा ने भी अपने एक साल के कार्यकाल के दौरान केवल दान भेजा. वह सितंबर में पद से हटने के बाद रविवार को मंदिर पहुंचे.

सुगा ने कहा कि वह देश के लिए अपने बहुमूल्य जीवन न्योछावर करने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने और उनकी आत्माओं को शांति मिलने की प्रार्थना करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर मंदिर गये थे.

पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे 2013 में यासूकुनी गये थे, जिसके बाद चीन और कोरिया ने प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और जापानी नेता तब से पद पर रहते हुए वहां जाने से बचते रहे हैं.(news18.com)

रेस्टोरेंट में शख्स ने मांगी खास डिश तो वेट्रेस ने तान दी बंदूक! डर से भाग निकले ग्राहक
17-Oct-2021 9:52 PM (48)

कोई भी इंसान किसी रेस्टोरेंट में इसी इरादे से जाता है कि वो वहां बढ़िया खाना खा सके और रेस्टोरेंट के स्टाफ की खातिरदारी का आनंद उठाए. रेस्टोरेंट और होटल कर्मी भी इस चीज के लिए ट्रेन किए जाते हैं. उन्हें ग्राहकों से बेहद विनम्रता के साथ पेश आना होता है. मगर हाल ही में अमेरिका के शख्स ने बताया कि उस पर एक वेट्रेस ने बंदूक तान दी. शख्स की बात सुनकर हर कोई दंग हो गया है. चलिए आपको बताते हैं कि पूरा मामला है क्या.

अमेरिका के एटलांटा में रहने वाले कैंडी फ्रैंक्लिन हाल ही में वेफेल हाउस रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे. ये एक फूड चेन है. कैंडी ने बताया कि उन्होंने वेट्रेस के चीज एग मंगवाया. काफी देर इंतजार करने के बाद जब वेट्रेस उनका खाना लेकर आई तो उन्होंने देखा कि वो सिर्फ एग लाई है. इस बात को लेकर दोनों में बहस होने लगी. शख्स ने कहा कि उन दोनों के बीच आम सी बहस होने लगी जो किसी भी रेस्टोरेंट में खाने को लेकर होती है. मगर ये बहस हिंसक हो जाएगी, इस बात का शख्स को विश्वास नहीं था. कैंडी ने बताया कि झगड़े के बाद वेट्रेस ने उनकी ओर भरी हुई बंदूक तान . बंदूक देखकर कैंडी तो डर ही गए, साथ ही वहां मौजूद अन्य ग्राहक रेस्टोरेंट से भाग गए.

डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक कैंडी ने बताया कि वो भी वहां से डर कर निकले. वेट्रेस ने उनसे कहा कि वो उनका दिमाग बाहर निकाल देगी. कैंडी ने बताया कि इससे पहले भी वो एक बार ऐसी हिंसा के गवाह बन चुके हैं. एक लड़ाई में अनजान शख्स ने उनके भाई पर गोली चला दी थी जिसकी जान चली गई. रिपोर्ट के मुताबिक रेस्टोरेंट ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है. इस बीच कैंडी ने कहा कि अब वो कभी उस रेस्टोरेंट में दोबारा नहीं जाएंगे. अमेरिका में बंदूक चलाने की कई वारदातें हाल ही में सामने आई हैं. कैंडी ने बताया कि उनके और वेट्रेस के बीच का झगड़ा ऐसा कोई सीरियस नहीं था मगर वो बेहद हैरान हुए कि उतनी सी बात में वेट्रेस ने कैंडी के सामने बंदूक तान दी. (news18.com)

पहली टॉपलेस प्रधानमंत्री बनना चाहती है 31 साल की महिला, बिना कपड़े पहने चलाएगी देश!
17-Oct-2021 9:52 PM (64)

दुनिया में सत्ता और प्रशासन के खिलाफ विरोध जताना नई बात नहीं है. लोग अलग-अलग तरह से विरोध करते हैं. इनमें से कई लोग विरोध करने का बेहद अजीबोगरीब तरीका ढूंढ निकालते हैं जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है. ब्रिटेन की एक महिला भी क्लाइमेट चेंज को लेकर विरोध करती है मगर उसका तरीका भी सबसे अलग है. वो टॉपलेस होकर अपना विरोध जताती हैं. मगर अब उन्होंने एक ऐसी घोषणा कर दी है जिसके बाद हर कोई दंग रह गया है.

ब्रिटेन में एक्सटिंक्शन रेबिलियन नाम का एक एनवायरमेंटल ग्रुप है. ये ग्रुप अहिंसक विरोध कर के सरकारों का ध्यान जलवायु परिवर्तन की ओर आकर्षित करता है. इस ग्रुप से जुड़ी ससेक्स की रहने वाली 31 साल की महिला लौरा एमहर्स पिछले कुछ दिनों से काफी सुर्खियों में हैं. कुछ दिन पहले वो इंग्लैंड की सड़कों पर बिना कपड़े के जलवायु परिवार्तन की ओर ध्यान खींचने के लिए प्रदर्शन कर रही थीं जिसके बाद से वो चर्चा में आ गई हैं. अब उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाली घोषणा कर दी है. उनका कहना है कि वो ब्रिटेन की पहली टॉपलेस प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं. पीएम बनने के बाद वो बिना कपड़े पहने ही देश चलाएंगी. इस तरह वो अभी के प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन को भी सत्ता से बेदखल करना चाहती हैं.

लौरा, जलवायु परिवर्तन की ओर उठाए गए ब्रिटेन सरकार के कदम से चिंतित हैं. उनका कहना है कि सरकार इसके लिए कुछ नहीं कर रही इसलिए वो खुद ये काम प्रधानमंत्री बनकर करना चाहती हैं. कुछ दिन पहले लौरा ने एडल्ट सब्स्क्रिप्शन साइट ओन्ली फैंस पर अपना अकाउंट बनाया था. लौरा कॉलेज के फाइनल ईयर में हैं और पॉलिटिक्स की पढ़ाई कर रही हैं. उन्होंने कहा- मुझे प्रधानमंत्री बनने में खुशी होगी और मैं ये काम टॉपलेस होकर करना चाहती हूं. ये लुक काफी अलग होगा. मेरे हिसाब से लोगों को अपने आप को एक्सप्रेस करने पर शर्म नहीं मेहसूस करना चाहिए. लोगों को ये जानकर हैरानी होती है कि लौरा एक बच्चे की मां हैं और उसके बावजूद वो न्यूड प्रोटेस्ट करती हैं. लौरा ने कहा- राजनीति काफी बोरिंग विषय है इसलिए मैं इसे सेक्सी बनाना चाहती हूं. ये महिलाओं का निर्णय है कि वो कब कपड़े उतारें. कपड़े उतारने का ये मतलब नहीं कि उनकी बात न सुनी जाए. (news18.com)

मैक्सिको: भारी विरोध के बाद हटाई जाएगी कोलंबस की मूर्ति
17-Oct-2021 9:52 PM (37)

मैक्सिको सिटी की सबसे प्रमुख सड़क से क्रिस्टोफर कोलंबस की मूर्ति को हटाया जाएगा. इसकी जगह पर एक मूल निवासी महिला 'द यंग वुमेन ऑफ अमाजाक' की मूर्ति की प्रतिकृति को लगाया जाना है.

सड़क पर कोलंबस की मूर्ति की जगह औपनिवेशिक काल से पूर्व की एक मूल निवासी महिला की मूर्ति की प्रतिकृति को लगाया जाएगा. यह मूर्ति जनवरी में ही मैक्सिको के खाड़ी तट पर स्थित ह्वास्टेका क्षेत्र से मिली थी. इसे 'द यंग वुमेन ऑफ अमाजाक' के नाम से जाना जाता है.

इसे यह नाम उसी गांव से मिला है, जिसमें इसे एक खेत में दबा पाया गया था. हालांकि अब तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है कि यह पत्थर की कलाकृति वाकई किसे दर्शाती है.

असली मूर्ति से तीन गुना बड़ी

'द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एंथ्रोपोलॉजी एंड हिस्ट्री' का कहना है कि ऐसा लगता है कि मूर्ति में ह्वास्टेक संस्कृति की 'प्रजनन की देवी' का चित्रण किया गया है. लेकिन इंस्टीट्यूट से ही जुड़े पुरातत्व-शास्त्रियों का यह भी मानना है कि यह किसी राजपरिवार की सदस्य या शासकों में से एक भी हो सकती है.

कोलंबस की मूर्ति की जगह लगाई जाने वाली प्रतिकृति असली छह फुट की मूर्ति से तीन गुना ज्यादा बड़ी होगी. असली मूर्ति को मैक्सिको सिटी के एंथ्रोपोलॉजी म्यूजियम में रखा गया है.

शहर के प्रशासन ने यह फैसला किया कि कोलंबस की मूर्ति को एक कम प्रमुखता वाली जगह पर लगा दिया जाए और एक मूल निवासी महिला की मूर्ति को उसकी मूर्ति की जगह लगाया जाए क्योंकि इतिहास में मूल निवासियों को पर्याप्त जगह नहीं मिली है.

मैक्सिको सिटी की रिफॉर्मा सड़क पर पहसे से ही कई मूल निवासी लोगों की मूर्तियां हैं लेकिन सामान्य रूप से उन्हें नियो-क्लासिकल ढंग से बनाया गया है. "द यंग वुमेन ऑफ अमाजाक" की मूर्ति इस मायने में अलग होगी, हालांकि इसे भी कोलंबस की मूर्ति के लिए बने नियो-क्लासिकल ढांचे पर ही रखा जाएगा.

कोलंबस की मूर्ति का भारी विरोध

पिछले साल भी कोलंबस की मूर्ति को 12 अक्टूबर से तुरंत पहले कथित तौर पर मरम्मत के लिए हटा लिया गया था. 12 अक्टूबर को कोलबंस के अमेरिका पहुंचने की सालगिरह होती है. साल 1492 में इसी दिन वह यहां पहुंचा था.

अमेरिका में इस दिन को 'कोलंबस दिवस' कहा जाता है लेकिन मैक्सिकन इसे 'दिया दे ला रजा' या 'नस्लीय दिन' कहते हैं. यहां कोलंबस की मूर्ति को लेकर पहले भी विरोध प्रदर्शन होता रहा है और इसे कई बार मूल निवासी लोगों के साथ बर्बर बर्ताव के लिए ग्राफिटी के जरिए निशाना भी बनाया गया है.

इस साल 12 अक्टूबर को मैक्सिको की केंद्रीय सरकार ने 'नस्लीय दिन' का नाम बदलकर 'बहुसांस्कृतिक राष्ट्र दिवस' करने का फैसला किया था, जिसे मैक्सिको के 70 मूलनिवासी संगठनों ने स्वीकृति भी दी थी.

बिना हटाए मुश्किल है सुरक्षा

हाल ही में मरम्मत कराने के बावजूद इस मूर्ति को हटाने के फैसले पर संगठन प्रमुख डिएगो प्रीतो हर्नांडेज ने माना कि कोलंबस की मूर्ति पर लगातार बना खतरा इसे हटाकर किसी पॉश इलाके के शांत पार्क में रखने के फैसले की वजह बना, जहां विरोध प्रदर्शन न हों.

उन्होंने यह सफाई भी दी, "यह उसके (कोलंबस के) चरित्र को लेकर किए किसी वैचारिक फैसले पर आधारित नहीं है बल्कि मूर्ति को बचाने के लिए है, जो शायद इसी जगह छोड़ दी जाती तो धमकी और विरोध प्रदर्शनों का निशाना बनती."

कोलंबस एशिया का छोटा रास्ता ढूंढने के लिए स्पेन के पूर्वी तट से अटलांटिक के रास्ते निकला लेकिन अमेरिका पहुंच गया. इस तरह तब तक दुनिया के लिए अछूते रहे अमेरिकी महाद्वीप के बारे में लोगों को जानकारी मिली.

तब तक यूरोप में माना जाता था कि दुनिया में तीन ही महाद्वीप हैं. हालांकि बाद में कोलंबस और अन्य व्यापारियों ने इन इलाकों को उपनिवेश बनाने में भूमिका निभाई, इन पर अमेरिका के मूल निवासियों पर बर्बर अत्याचार के आरोप भी हैं. (dw.com)

एडी/सीके (एपी)

चीन में कोयले के दामों में रिकॉर्ड उछाल, गहराया ऊर्जा संकट
17-Oct-2021 9:47 PM (30)

चीन में ठंड बढ़ गई है और ऊर्जा संयंत्र कोयले की जमाखोरी में लग गए हैं, जिसकी वजह से कोयले के दामों में रिकॉर्ड उछाल आ गया है. देश में पहले से मौजूद ऊर्जा संकट और गहरा गया है.

(dw.com)

उत्तरी चीन से निकली ठंडी हवाएं पूरे देश में फैल रही हैं जिसकी वजह से घरों और दफ्तरों को गर्म रखने के लिए बिजली की मांग में काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है. पूर्वानुमान है कि अगले 2-3 दिनों में कुछ केंद्रीय और पूर्वी इलाकों में औसत तापमान में 16 डिग्री तक की गिरावट आ सकती है.

कोयले की कमी, ईंधनों के बढ़े हुए दाम और महामारी के बाद बढ़ रही औद्योगिक मांग की वजह से दुनिया की इस दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बिजली कटौती बहुत बढ़ गई है.

बिजली की कटौती

देश के 30 प्रांतों में से 17 में बिजली की आपूर्ति में राशन व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है, जिसकी वजह से कुछ फैक्ट्रियों को मजबूरन उत्पादन रोकना पड़ा है. इसकी वजह से सप्लाई चेन भी बाधित हो गयी हैं.

पूर्वोत्तर के तीन प्रांत जिलिन, हेलोंगजियांग और लियाओनिंग और इनर मंगोलिया और गांसु जैसे उत्तरी प्रांतों में बिजली की सबसे ज्यादा कटौती की गई है. मौसम सामान्य से ज्यादा ठंडा हो गया है और इन सभी प्रांतों में ठंड से निपटने के लिए घरों और दफ्तरों को गर्म करना शुरू कर दिया गया है.

इस गर्मी के लिए मुख्य रूप से कोयले का इस्तेमाल किया जाता है. कोयले के दामों को कम करने के लिए चीन ने अब कई कदम उठाए हैं. देश के अंदर कोयले के उत्पादन को बढ़ा दिया गया है, बिजली की ज्यादा खपत करने वाले उद्योगों और फैक्ट्रियों को बिजली की आपूर्ति में कटौती की जा रही है. 

सरकार बार बार उपभोक्ताओं को भरोसा दिला रही है कि ठंड से बचने के लिए आवश्यक ऊर्जा मिलती रहेगी. लेकिन आशंका है कि बिजली संकर अगले साल की शुरुआत तक चलता रहेगा.

एक बड़ा कदम

समीक्षकों और व्यापारियों ने पूर्वानुमान लगाया है कि कोयले की कमी और आवासीय उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दिए जाने की वजह से चौथी तिमाही में औद्योगिक बिजली खपत में 12 प्रतिशत गिरावट आएगी.

चीन एक दशक से बिजली क्षेत्र में कई सुधार ला रहा है. इसी सप्ताह इस श्रंखला में सबसे साहसी सुधार के एक कदम की घोषणा की गई. सरकार ने कहा कि वो अब कोयले से मिलने वाली बिजली के दामों में 20 प्रतिशत तक के उतार-चढ़ाव की अनुमति देगी.

इससे बिजली संयंत्रों को बिजली उत्पादन की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर डालने का मौका मिलेगा. अनुमान लगाया जा रहा है कि नई नीति के तहत स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट और रसायनों के उत्पादकों को ज्यादा दामों का सामना करना पड़ सकता है. इससे इनके लाभ सीमा पर भी दबाव पड़ेगा.

कई देशों में ऊर्जा संकट

ताजा आंकड़े दिखा रहे हैं कि सितंबर में थोक मुद्रास्फीति में रिकॉर्ड उछाल आया था. चीन का लक्ष्य है 2060 तक कार्बन न्यूट्रल बन जाना और इस वजह से वो प्रदूषण फैलाने वाले कोयले पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है. वो हवा, सौर और पनबिजली के इस्तेमाल को भी बढ़ाना चाह रहा है.

लेकिन आने वाले कम से कम कुछ समय तक तो यही अपेक्षा है कि उसकी बिजली की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा कोयले से ही पूरा होगा.

चीन एकलौता ऐसे देश नहीं है जो बिजली की आपूर्ति के संकट से जूझ रहा है. कुछ देशों में तो ईंधन की कमी और बिजली कटना भी देखा गया है. इस संकट ने इस समस्या को रेखांकित किया है कि जीवाश्म ईंधनों पर वैश्विक अर्थव्यवस्था की निर्भरता को कम करना जरूरी तो है लेकिन यह कैसे होगा यह एक पहेली है.

सीके/एए (रॉयटर्स) (dw.com)

नरम कोयले से कार की बैट्री बनाने में कामयाबी मिली
17-Oct-2021 9:44 PM (31)

एस्टोनिया के वैज्ञानिकों ने दलदल में मिलने वाले कोयले से सोडियम आयन बैट्री बनाने में कामयाबी पाई है. अगर यह प्रयोग व्यवसायिक तौर पर सफल रहता है तो वाहनों के लिए बैट्री उपलब्ध कराने में बड़ा योगदान दे सकता है.

(dw.com)

एस्टोनिया के वैज्ञानिकों ने दलदल में मिलने वाले कोयले से सोडियम आयन बैट्री बनाने में कामयाबी पाई है. अगर यह प्रयोग व्यवसायिक तौर पर सफल रहता है तो वाहनों के लिए बैट्री उपलब्ध कराने में बड़ा योगदान दे सकता है.

उत्तरी यूरोप के दलदली मैदानों में नरम कोयला प्रचुर मात्रा में मिलता है. एस्टोनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस कोयले से सोडियम आयन बैट्री बनाई जा सकती है, जिन्हें कारों में इस्तेमाल किया जा सकता है.

सोडियम आयन बैट्री में लीथियम, कोबाल्ट या निकल नहीं होता. बैट्री बनाने की यह नई तकनीक है जो लीथियम बैट्री के विकल्प के तौर पर उभर रही है.

एस्टोनिया की तारतू यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कहा है कि उन्होंने नरम कोयले से सोडियम आयन बैट्री बनाने का तरीका खोजा है. इस तरीके से लागत कम होती है. हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में है.

यूनिवर्सिटी के रसायन विभाग की अध्यक्ष एन लुस्ट बताती हैं, "नरम कोयला बहुत सस्ता कच्चा माल है. सच कहूं तो इसकी कीमत कुछ भी नहीं है.”

कैसे बनाई बैट्री?

नरम कोयले से सोडियम आयन बैट्री बनाने के लिए उसे एक भट्टी में उच्च तापमान पर 2-3 घंटे जलाया जाता है. यूनिवर्सिटी को उम्मीद है कि सरकार इस तकनीक का परीक्षण करने के लिए जरूरी एक छोटी फैक्ट्री बनाने के वास्ते धन उपलब्ध कराएगी.

स्कॉटलैंड में शराब बनाने वाले जौ को सुखाने के लिए नरम कोयले की आग का ही इस्तेमाल करते हैं. इससे व्हिस्की में एक अलग स्वाद आता है. उत्तरी यूरोप के कुछ देशों में नरम कोयले को फैक्ट्रियों और घरों में ईंधन के तौर पर और खेतों में खाद के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है.

नरम कोयला निकालने के लिए दलदलों को सुखाया जाता है. इस प्रक्रिया में कार्बन डाई ऑक्साइड निकलती है, जो पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय है. लेकिन एस्टोनिया के वैज्ञानिकों का कहना है वे डिकंपोज हो चुका नरम कोयला इस्तेमाल कर रहे हैं जो आमतौर पर फेंक दिया जाता है.

कितनी कामयाब होगी सोडियम बैट्री?

इस प्रक्रिया से बनी सोडियम आयन बैट्री व्यवसायिक तौर पर कितनी कामयाबी हासिल कर पाएगी, इस बारे में अभी संदेह बना हुआ है. बैट्री पर किताब लिखने वाले बाजार विशेषज्ञ लुकास बेडनार्स्की कहते हैं कि इस तरह की बैट्री को अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी.

वैसे, कुछ जगहों पर सोडियम आयन बैट्री का प्रयोग शुरू हो गया है. चीन की सीएटीएल ने जुलाई में कारों के लिए सोडियम आयन बैट्री बनाने का ऐलान किया था.

बेडनार्स्की कहते हैं, "मुझे लगता है कि कंपनियां तेजी से सोडियम आयन बैट्रियों को प्रयोग करना चाहेंगी, खासकर चीन में हुए ऐलान के बाद. सोडियम आयन बैट्री की ताकत कम होती है इसलिए संभव है कि उन्हें लीथियम बैट्री के साथ ही प्रयोग किया जाए.” (dw.com)

वीके/सीके (रॉयटर्स)

चीन में उइगर मुस्लिम कैसे होते हैं टॉर्चर, देखने के बाद भूल जाएंगे तालिबान की सजाएं
17-Oct-2021 9:36 PM (41)

बीजिंग. चीन उइगर मुसलमानों पर तालिबान जैसा क्रूर अत्याचार करता है. कम्युनिस्ट सरकार की बात न मानने पर उइगरों को शिन्जियांग प्रांत के डिटेंसन सेंटर्स में कई तरह की अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं. चीनी शासन की इन ज्यादतियों से भागे कई पीड़ित पहले ही अपने और साथी उइगुर मुस्लिमों पर किए जा रहे जुर्मों का ब्योरा पेश कर चुके हैं. पहली बार चीन के एक पुलिसकर्मी ने खुद उइगरों को दिए जाने वाले भयानक टॉर्चर का खुलासा किया है.

कुर्सी से बांधकर शुरू होता है टॉर्चर
‘द मेल’ को दिए इंटरव्यू में चीनी पुलिसकर्मी ने बताया कि सुरक्षाबल के जवान शिनजियांग में बंद रखे गए जिन भी उइगर मुस्लिमों को पकड़ कर लाते हैं, उन्हें टॉर्चर के लिए कुर्सी से बांध कर रखा जाता है. उन्हें मारपीट से टॉर्चर देने की शुरुआत होती है. पुलिस के जवान उन्हें लात-घूंसों से पीटते हैं और उनकी नंगी पीठ पर कोड़े बरसाते हैं. ऐसे ज्यादातर टॉर्चर में लोगों की जान तक चली जाती है.

झपकी लेने पर बेरहमी से होती है पिटाई 
इंटरव्यू लेने वाले रिपोर्टर के मुताबिक, चीन के इस पूर्व पुलिसकर्मी ने उसे टॉर्चर के तरीकों का प्रदर्शन कर के भी दिखाया. उसने बताया कि ज्यादातर मामलों में पिटाई से लोगों की आंखों की रोशनी तक चली जाती है. टॉर्चर का अगला चरण होता है पीड़ितों को नींद न लेने देने का. हल्की झपकी पर भी उन्हें इतना मारा जाता है कि वे होश गंवा देते हैं और फिर उन्हें होश में लाकर दोबारा पीटा जाता है. कई पुलिसवाले हथौड़े लेकर पीड़ितों के पैर तक तोड़ देते हैं, जिससे उन्हें अस्थायी तौर पर दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है. इतना ही नहीं भागने के डर से उइगरों को शौचालय तक नहीं जाने दिया जाता है.

प्राइवेट पर पार्ट लगाया जाता है करंट
जियांग ने बताया कि तीसरे चरण के टॉर्चर में उइगरों के गुप्तांगों में करंट लगा दिया जाता है. महिलाओं के लिए टॉर्चर का एक तरीका यह है कि उनके हाथों में हथकड़ी लगा दी जाती है और फिर उनके हाथों को बार-बार मेज पर पटका जाता है. कुछ ही मिनटों बाद उनके हाथ खून से सने होते हैं. इस व्हिसलब्लोअर ने बताया कि उसने कई 14 साल के बच्चों को भी इन टॉर्चर का शिकार होते हुए देखा है. खास तौर पर उइगर बच्चों को जिन्हें सिर्फ इसलिए सजा दी जाती है, क्योंकि वे मुस्लिम हैं.

गरीबी का खुलासा करने पर गिरफ्तारी
जियांग ने बताया कि अगर कोई उइगर अपनी गरीबी या शिनजियांग से बाहर जाने की भी अपील करता है, तो उसकी गिरफ्तारी हो जाती है. उइगर मुस्लिमों को रोकने के लिए शहर में हर 300 से 500 कदमों पर एक पुलिस चेकपॉइंट बनाया गया है. इस पर लगातार उन्हें नियम-कायदे से चलने और राष्ट्र की एकता बनाए रखने के संदेश दिए जाते हैं. अगर तीन उइगर एक साथ घूमते दिखते हैं, तो पुलिस उनसे अलग-अलग जाने को कहती है और जिनकी भी बढ़ी दाढ़ी दिखती है, उन्हें आपराधिक जांच का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा सोशल मीडिया पर इस्लामिक वीडियो भेजने पर भी युवाओं को 10-10 साल तक जेल में रखा जाता है.

इस्लाम को खत्म करना चाहता है चीन
इस पुलिसकर्मी ने बताया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का इस्लाम के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान इतना विस्तृत है कि शासन इससे लोगों को नियंत्रित करना चाहता है. सरकार इस्लाम खत्म करने के साथ उनकी परंपराओं और मान्यताओं को भी मिटा देना चाहती है और उइगरों की पहचान भी बदलना चाहती है. (news18.com)

स्टायलिश शेफ की 87 हज़ार वाली डिश की घनघोर बेइज्ज़ती, ग्राहक ने कहा - 'इससे अच्छा है 700 वाला कबाब'
17-Oct-2021 9:35 PM (28)

आमतौर पर जितने बजट में लोग पूरी फैमिली के साथ खाना का लेते हैं या फिर छोटी-मोटी पार्टी निपटा लेते हैं, उतने में लंदन के नुस्र अत लंदन में सिर्फ एक कबाब मिल पाता है. ये रेस्टोरेंट तुर्की में पैदा हुए शेफ नुसरत गोक्से ने खोला है और रेस्टोरेंट के खाने से ज्यादा उसके हाई-फाई प्राइस की चर्चा दुनिया भर में हो रही है.

सॉल्ट बेई के नाम से दुनिया भर में मशहूर नुसरत के खाने के तमाम वीडियो और पिक्चर्स आपने सोशल मीडिया पर देखे होंगे. उन्होंने हाल ही में लंदन में जो रेस्टोरेंट खोला है, वहां खाना इतना महंगा है कि आपको पानी का ग्लास लेने से पहले भी सोचना पड़ेगा. अब 87 हज़ार में अगर स्टेक मिलेगा, तो उसे खाने के नाम पर लूटना ही कहेंगे. कुछ यही बात यहां आने वाले ग्राहकों ने ऑनलाइन लिख दी है, जिसके बाद रेस्टोरेंट की खासी बेइज्ज़ती कस्टमर्स के बीच हो रही है.

‘ऐसा खाना कबाब शॉप पर सस्ते में मिलता है’
ऑनलाइन रेस्टोरेंट का रिव्यू देते हुए एक ग्राहक ने लिख दिया कि खाने का दाम बेवजह ही इतना ज्यादा रखा गया है, जबकि यहां का खाना कुछ खास नहीं है. उसने लिखा है – ‘मुझे लगा कि ये कोई मज़ाक है… दुर्भाग्य से ये सच था. कमतर खाना और बुरी तरह से बढ़े हुए दाम. स्टेक्स मुश्किल से ही खाए जा रहे थे, ऊपर से दाम सुनकर ही आंख में आंसू आ जाए. मुझे नाइट्स ब्रिज में 700 से भी कम में इससे बेहतर कबाब मिल जाएंगे. यहां खाना खाना वाकई सदमे में चले जाने जैसा था.’ आखिरकार इस ग्राहक ने भी कह दिया कि इस स्कैम रेस्टोरेंट में आना भूल ही जाइए. इसके अलावा भी कई ग्राहकों ने इस बात को माना कि ये सिर्फ सोशल मीडिया पर दिखावे के लिए है, यहां खाने के पैसे देना वाकई बर्बादी है.

ग्राहक ने खाने के बाद लुटा दी थी सारी कमाई
इससे पहले भी एक शख्स ने नुस्र अत लंदन में खाने के बाद उसका बिल ट्विटर पर शेयर किया था, जिसके मुताबिक उसे तीन दोस्तों के साथ पार्टी के बाद 12 लाख का बिल भरना पड़ा था. ये बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था और लोगों ने तब भी रेस्टोरेंट में मिलने वाले खाने के दाम पर आश्चर्य व्यक्त किया था. आखिर सामान्य सी चीज़ों को इतने ऊंचे दाम पर बेचने की वजह क्या है, इसे लेकर इंटरनेट पर जब-तब बहस छिड़ जाती है. (news18.com)

मिल रही है बिस्तर पर पड़े रहने की शानदार नौकरी, कंपनी घर पर ही पहुंचा देगी गद्दे भी !
17-Oct-2021 9:34 PM (39)

हममें से बहुत से लोग तो घर में बैठ ही नहीं सकते हैं. उन्हें हर वक्त कुछ न कुछ करना होता है. वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो कुछ करना ही नहीं चाहते. वे इतने आराम पसंद होते हैं कि ऑफिस जाकर काम करना भी उनके लिए मुश्किल होता है. अब ब्रिटेन में एक कंपनी ऐसे ही आराम तलब लोगों के लिए खास नौकरी ऑफर कर रही है. इस नौकरी में सिर्फ बिस्तर पर पड़े रहकर टीवी देखना है और सोना है.

नौकरी की खासियत ये है कि कर्मचारी को कहीं जाना भी नहीं है. गद्दे भी कंपनी उसे घर पर ही भिजवा देगी, जिस पर उसे सोना है. आपको ये बेहद अजीब लग रहा होगा, लेकिन The Sun की रिपोर्ट के मुताबिक लग्ज़री बेड कंपनी क्राफ्टेड बेड्स ये नौकरी दे रहा है. इस नौकरी को ज्वाइन करने वाले को हर दिन 6-7 घंटे बिस्तर पर ही गुजारने होंगे

गद्दे पर घंटों सोने की नौकरी
दरअसल क्राफ्टेड बेड्स की ओर से मैट्रेस टेस्टर की नियुक्ति की जा रही है. इन नौकरी को करने वाले शख्स को कंपनी की ओर से 24,000 पाउंड्स यानि भारतीय मुद्रा में करीब 25 लाख रुपये का सालाना वेतन दिया जाएगा. मैट्रेस टेस्टर को साप्ताहिक आधार पर हाई क्वालिटी वाले मैट्रेस को टेस्ट करना होगा. कंपनी को ये बताना होगा कि इस्तेमाल करने में ये गद्दे कैसे हैं और इसमें आगे क्या सुधार करने की गुंजाइश है. शर्त ये है कि नौकरी करने वाले को हफ्ते में 37.5 घंटे गद्दे पर ही लेटकर गुजारने होंगे, यानि दिन में करीब 6 घंटे बिस्तर पर टीवी देखते हुए या सोते हुए गुजारने हैं. इसके लिए कंपनी ने बाकायदा विज्ञापन निकालकर एप्लिकेशन मांगे हैं.

नौकरी के लिए शर्तें भी हैं !
क्राफ्टेड बेड्स के मार्केटिंग मैनेजर ब्रायन डिलन ने कहा है कि ये नौकरी पूरी तरह से रिमोट जॉब है. कर्मचारियों को इसके लिए दफ्तर आने की कोई ज़रूरत नहीं है, गद्दे उनके घर पर ही पहुंचा दिए जाएंगे. इस नौकरी की सबसे पहली और अहम शर्त ये है कि आवेदक ब्रिटेन का ही निवासी होना चाहिए. उसे बिना की बाधा के अकेले ही मैट्रेस टेस्टिंग करनी होगी. उसकी संचार की क्षमता भी अच्छी होनी चाहिए, ताकि वो मैट्रेस का रिव्यू लिखकर भेज सके. ये रिव्यू साप्ताहिक तौर पर लिखकर देना होगा. (news18.com)

2 महीने तक मुर्दे से सिर्फ 3 फीट की दूरी पर सोती रही महिला, फिर यूं सामने आया रहस्य !
17-Oct-2021 9:33 PM (38)

सामने अगर किसी की डेड बॉडी पड़ी हो, तो यूं ही पूरा शरीर सिहर उठता है और बदन ठंडा पड़ने लगता है. ऐसे में सोचिए अगर को 8 हफ्ते तक शव से थोड़ी ही दूरी पर सोता रहे, तो उसका हाल क्या होगा? अमेरिका के लॉस एंजेलिस से ऐसा ही एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया. यहां रीगन बेली नाम की एक महिला लाश से महज 3 फीट की दूरी पर सोती रही और उसे असलियत पता भी नहीं चली.

सुनकर शायद ही इस बात पर कोई यकीन कर पाए, लेकिन मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक है. उसने खुद एक टिकटॉक वीडियो के जरिए अपने साथ हुई अजीबोगरीब घटना के बारे में सभी को बताया. रीगन का वीडियो देखने के बाद जो भी इस घटना के बारे में सुन रहा है, वो सोचने को मजबूर हो जाता है कि भला ये संभव कैसे हुआ?

शव से आ रही थी भयानक बदबू
@reaganbaylee नाम के TikTok अकाउंट से अपनी कहानी बताते ए रीगन ने बताया कि मई 2020 में उनके साथ ये घटना हुई. वे लॉस एंजेलस में 250 वर्गमीटर के स्टूडियो फ्लैट में रहती थीं. उन्हें अपने कमरे में कुछ अजीब की बदबू महसूस हुई. ये बदबू दिन पर दिन बढ़ रही थी, लेकिन इसके पीछे की सही वजह वे ढूंढ नहीं पा रही थीं. पहले उसे लगा कि बदबू मछली सड़ने की है, लेकिन आस-पा ढूंढने पर भी उन्हें कोई मछली नहीं मिली. घटना के कुछ दिन बाद ही घर में कीड़े आने भी शुरू हो गए. उनके सिर में दर्द और लगातार उल्टी जैसा भी महसूस होने लगा. उनकी रातों की नींद हराम हो गई और उन्हें डिप्रेशन रहने लगा.

जब सामने आया सच, तो उड़ गए होश !
रीगन ने बदबू पर सेकेंड ओपिनियन लेने के लिए अपने ब्वॉयफ्रेंड को भी बुलाया, तो उसने भी इस बात को कंफर्म किया कि वाकई ये बहुत ही गंदी बदबू है. रीगन ने मामले पर अपार्टमेंट मैनेजर से भी शिकायत की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनकर रेस्पॉन्स नहीं मिला. इसके बाद महिला ने पुलिस को बुलाया, तो पता चला कि उसके बेडरूम से लगे दूसरे घर में दरअसल एक शख्स का शव है. उसकी मौत 8 हफ्ते पहले ही हो गई थी. शख्स का शव जहां पड़ा था, वहां से रीगन के बेडरूम की दूरी महज 3 फीट थी, यही वजह है कि वो शव से आने वाली बदबू से परेशान थीं. (news18.com)

अफगानिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शाह अहमदज़ई का 78 साल की उम्र में निधन
17-Oct-2021 8:54 PM (28)

अफगानिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शाह अहमदजई का 78 साल की उम्र में निधन हो गया है. उनके मृत्यु की खबर एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी है. अहमद शाह अहमदजई 1992 से 1994 तक अफगानिस्तान सरकार में विभिन्न प्रमुख पदों पर कार्यरत रहे. इसके बाद साल 1995 से 1996 तक अफगानिस्तान के प्रधानमंत्री रहे थे. इसके बाद तालिबान ने देश पर कब्जा कर लिया था और पूर्व प्रधानमंत्री को देश छोड़ना पड़ा था. भारत में रह रहे अहमद शाह अहमदजई इसी महीने भारत से अफगानिस्तान लौटे थे.

कौन हैं अहमद शाह अहमदज़ई

अहमद शाह अहमदज़ई का जन्म काबुल प्रांत के खाकी जब्बार जिले के एक गांव मलंग में हुआ था. उन्होंने काबुल विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर कृषि मंत्रालय में काम किया. 1972 में उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका में कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति मिली. उन्होंने 1975 में मास्टर डिग्री प्राप्त की और सऊदी अरब में किंग फैसल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बन गए.

1978 में कम्युनिस्ट तख्तापलट के बाद, अहमदजई मुजाहिदीन में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान लौट आए. वह बुरहानुद्दीन रब्बानी के करीबी सहयोगी थे. वो जमीयत-ए-इस्लामी पार्टी के डिप्टी बने लेकिन फिर छोड़ दिया और 1992 में अब्दुल रसूल सय्यफ के इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ अफगानिस्तान पार्टी में शामिल हो गए. उन्होंने कम्युनिस्ट के बाद की अफगान सरकार में एक मंत्री के रूप में विभिन्न आंतरिक, निर्माण और शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया, और बाद में 1995 और 1996 के बीच प्रधान मंत्री बने. ( abplive)