अंतरराष्ट्रीय

तहलका मचा रही है एक टांग वाली मॉडल, 6 साल की उम्र में बोन कैंसर के चलते खोया था पैर
21-Oct-2021 12:42 PM (64)

मॉडल चेरी लुइस सोशल मीडिया पर अपनी खूबसूरत पिक्चर्स पोस्ट करती हैं और दुनिया के सामने अपने आत्मविश्वास को दिखाती हैं. उनके इस आत्मविश्वास की तारीफ करने के बजाय यहां भी ट्रोल्स ये तक कहने लगते हैं कि उनका पैर न होना फोटोशॉप का कमाल है, ताकि उन्हें लोगों का अटेंशन मिल सके.

चेरी महज 6 साल की थीं, जब उन्हें बोन कैंसर की बीमारी थी. बीमारी ने उन्हें बाएं पैर से अपंग कर दिया. उन्हें तेज़ बुखार हुआ और बाएं पैर में बेतहाशा दर्द होने लगा. उन्हें दौड़ने में भी दिक्कत थी. तमाम डॉक्टर के पास जाने और जांच-पड़ताल करने के बाद उन्हें रेयर बोन कैंसर की पुष्टि हुई.

Osteosarcoma नाम के बोन कैंसर में उनकी हड्डियों की सेल्स में ट्यूमर की तरह लंप होने लगे, जिसमे नए टिश्यूज़ बनना बंद हो गए. डॉक्टर्स ने उनके बाएं पैर और आधे पेल्विस को निकालने की सलाह दी, ताकि चेरी की ज़िंदगी बचाई जा सके. इस ऑपरेशन के बाद उनका आत्मविश्वास खो गया था और वे डिप्रेस भी हो गई थीं.

29 साल की चेरी ने अपनी ज़िंदगी की राह फैशन इंडस्ट्री में ढूढ ली. वे अब मॉडल और फैशन स्टायलिस्ट हैं. न्यूज़ीलैंड के न्यू प्लाइमाउथ में रहने वाली चेरी ने 20 की उम्र पार करने के बाद ये जाना कि अगर उन्हें उनकी अपंगता से ही अटेंशन मिल रही है, तो इसे सकारात्मक तरीके से लेने की ज़रूरत है.

अब चेरी Bluebella और Modibodi जैसे ब्रैंड्स के लिए मॉडलिंग करती हैं और अपनी पिक्चर्स को सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. चेरी बताती हैं कि टीनएज में वे टीवी पर पैराओलंपिक्स के अलावा कभी भी किसी एम्पुटी को नहीं देखती थीं. उन्हें लगता था कि उन्हें न तो कभी कोई नौकरी मिलेगी, न ही कोई उन्हें प्यार करेगा. इस बात को लेकर वे रात-रात भर रोती रहती थीं.

उन्होंने जब देखा कि लोग उनकी तरफ इतना ध्यान देते ही हैं, तो इसे दूसरी तरह से इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने सोशल मीडिया पर मॉडलिंग करके अपना आत्मविश्वास वापस लाना शुरू कर दिया. 16 साल की उम्र में उन्होंने फैशन स्कूल में जाना शुरू कर दिया था. उन्हें अपनी आधिकारिक नौकरी Bluebella लिंजरी ब्रैंड के साथ मिली. फिर उन्होंने Modibodi के साथ काम किया, जो पीरियड पैंट्स बनाती है.

हालांकि चेरी के फोटोज़ को देखकर लोग ऐसा भी कहने लगते हैं कि वे फोटोशॉप का इस्तेमाल करती हैं, ताकि उन्हें लोगों का अटेंशन और पब्लिसिटी मिल सके. खुद चेरी को इन चीज़ों से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनको लेकर क्या कहानियां गढ़ रहे हैं. वे अपना काम शान से कर रही हैं और चमक रही हैं.  (news18.com)

TV पर मौसम का हाल बता रही थी एंकर, अचानक स्क्रीन पर चलने लगा Porn Video और फिर...
21-Oct-2021 12:42 PM (22)

अमेरिका के वाशिंगटन में मौसम का पूर्वानुमान देख रहे दर्शकों को रविवार की शाम उस समय थोड़ा झटका लगा जब एक स्थानीय समाचार चैनल ने गलती से एक अश्लील क्लिप प्रसारित कर दी. वाशिंगटन के स्पोकेन में स्थित एक स्थानीय सीबीएस-संबद्ध समाचार आउटलेट केआरईएम ने शाम 6 बजे न्यूजकास्ट के दौरान 13-सेकंड का वीडियो प्रसारित किया.

मौसम विज्ञानी मिशेल बॉस मौसम का अपडेट दे रही थीं, तभी उनके पीछे स्क्रीन पर अश्लील वीडियो चलने लगा. न वो और न ही उनके को-एंकर, कोडी प्रॉक्टर, किसी को भी इस वीडियो के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उन दोनों ने अपनी रिपोर्ट जारी रखी क्योंकि ग्राफिक वीडियो बैकग्राउंड में चलाए जाने से पहले मौसम फुटेज में कटौती कर रहा था.

एडवीक की रिपोर्ट के अनुसार, केआरईएम ने अपने 11 बजे प्रसारण के दौरान "अनुचित" वीडियो के लिए माफी मांगी. स्टेशन ने कहा, "केआरईएम 2 में आज रात 6 बजे हमारे न्यूजकास्ट में कुछ हुआ, हम सभी उसके लिए माफी मांगना चाहते हैं." "शो के पहले भाग में एक अनुचित वीडियो प्रसारित किया गया. हम यह सुनिश्चित करने के लिए लगन से काम कर रहे हैं कि ऐसा दोबारा न हो."

KREM की मूल कंपनी के एक कार्यकारी ने पुष्टि की कि चैनल ने गलती से एक्स-रेटेड फ़ुटेज प्रसारित करने के लिए माफ़ी मांगी थी. TEGNA के मुख्य संचार अधिकारी ऐनी बेंटले ने कहा, "हमने कल रात अपने 11 बजे के न्यूजकास्ट के दौरान अपने दर्शकों से माफी मांगी.

दर्शकों से कई संबंधित कॉल आने के बाद स्पोकेन पुलिस विभाग अब घटना की जांच कर रहा है.

विभाग ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, "स्पोकेन पुलिस विभाग की विशेष पीड़ित इकाई ने रविवार शाम को एक स्थानीय समाचार आउटलेट को जवाब दिया, जब स्टेशन की मौसम रिपोर्ट के दौरान दर्शकों की स्क्रीन पर एक पॉर्न वीडियो दिखाई दिया."

2017 में इसी तरह की एक घटना में सामने आई थी, जब बीबीसी के एक सतर्क दर्शक ने एक कर्मचारी को काम पर एक्स-रेटेड क्लिप देखते हुए देखा. एक लाइव प्रसारण के दौरान समाचार देने वाले एक एंकर के पीछे बीबीसी कर्मचारी की स्क्रीन दिखाई दे रही थी. (ndtv.in)
 

बच्चे की जान पर बनी, तो हथिनी ने मगरमच्छ को रौंद डाला ! खूनी खेल देख खड़े हो जाएंगे रोंगटे
21-Oct-2021 12:40 PM (54)

जंगली जानवरों की ज़िंदगी से जुड़े हुए वीडियो इंटरनेट पर आए दिन वायरल होते जाते हैं और इन्हें लोग पसंद भी खूब करते हैं. खासतौर पर अगर वीडियो सर्वाइवल के संघर्ष का हो, तो इन्हें देखकर हम कई बार सहम भी जाते हैं. इस वक्त एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में लड़ाई एक हथिनी और मगरमच्छ के बीच की है.

वीडियो अफ्रीकी देश जाम्बिया का है. वीडियो में एक हथिनी मगरमच्छ से लड़ते हुए दिखाई दे रही है. चूंकि मगरमच्छ हथिनी के बच्चे पर तब हमला कर देता है, जब वो अपने झुंड के साथ नदी किनारे पानी पीने के लिए रुकता है. हथिनी की नज़र जैसे ही मगरमच्छ पर पड़ती है, वो अपने बच्चे को बचाने के लिए खूंखार जानवर से भिड़ जाती है. इस लड़ाई को एक टूरिस्ट ने अपने कैमरे में कैद कर लिया और अब ये खूंखार जंग पूरी दुनिया देख रही है.

हथिनी ने सिखाया मगरमच्छ को सबक
Daily Mail में छपी खबर के मुताबिक हाथियों का झुंड जाम्बिया की ज़ाम्बेज़ी नदी के किनारे पानी पीने के लिए आया था. इस दौरान मगरमच्छ ने हाथी के बच्चे पर हमला बोल दिया था. मगरमच्छ की हरकत देखते ही बच्चे की मां एक्शन में आ गई. उसने उल्टा मगरमच्छ पर धावा बोल दिया और उसे पानी में पटक-पटककर चित कर दिया. हथिनी ने मगरमच्छ पर अपनी सूंड़ के कई बार वार किया. मगरमच्छ हथिनी के चंगुल से छूटने की कोशिश करने लगा, लेकिन हथिनी के सामने उसकी एक नहीं चली.

मगरमच्छ की हालत हो गई खराब
हथिनी से मार खाकर मगरमच्छ की हालत इतनी खराब हो जाती है कि वो शांत पड़ जाता है. हथिनी उसे घसीटकर पानी के बाहर ले आती है, लेकिन मगरमच्छ कोई भी हरकत नहीं करता है. ऐसे में माना जा रहा है कि मगरमच्छ की मौत हो चुकी होती है. इस घटना को वहां मौजूद डेनमार्क के सैलानी हंस हेनरिक हार ने अपने कैमरे में शूट कर लिया. वीडियो में हथिनी और मगरमच्छ के बीच की ये लड़ाई देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. खासकर तब, जब हथिनी 7-8 फीट के मगरमच्छ पटक-पटकर चित कर देती है. (news18.com)

खुद का सोशल मीडिया नेटवर्क लॉन्च करेंगे डोनाल्ड ट्रंप, बोले - ट्विटर पर तालिबान है, लेकिन मुझे चुप करा दिया
21-Oct-2021 12:36 PM (26)

वाशिंगटन : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेकर घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा है कि वह खुद का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लॉन्च कर रहे हैं, जिसका नाम ट्रूथ सोशल रखा गया है. इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का स्वामित्व ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप के पास होगा. इसमें वीडियो ऑन डिमांड सेवा भी शामिल होगी, जिसमें नॉन वोक मनोरंजन प्रोग्रामिंग की सुविधा भी होगी. डोनाल्ड ट्रंप ने बयान में कहा कि मैंने बिग टेक कंपनियों के अत्याचार के खिलाफ खड़े होने के लिए ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी और ट्रूथ सोशल को शुरू किया है.  ट्रंप को 6 जनवरी को उनके समर्थकों द्वारा किए विरोध प्रदर्शन के बाद ट्विटर और फेसबुक पर बैन कर दिया गया था. ट्रंप ने आगे कहा कि हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां तालिबान की ट्विटर पर बड़ी मौजूदगी है, लेकिन आपके पसंदीदा अमेरिकी राष्ट्रपति को चुप करा दिया गया. यह अस्वीकार्य है.

बता दें कि कैपिटॉल बिल्डिंग (अमेरिकी संसद भवन) में अपने समर्थकों द्वारा की गई हिंसा के बाद डोनाल्ड ट्रंप की चारों तरफ आलोचना हुई, जिसके बाद माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर (Twitter) ने डोनाल्ड ट्रंप के ट्विटर अकाउंट पर स्थायी रूप से बैन लगाने के बाद उनकी टीम का अकाउंट भी सस्पेंड कर दिया था. इससे पहले, ट्विटर ने घोषणा की थी कि उसने निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खाते (अकाउंट) को ‘आगे हिंसा और भड़कने के जोखिम' के चलते स्थायी रूप से निलंबित कर दिया था.

दरअसल, ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप का निजी अकाउंट स्थायी रूप से बैन कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्विटर पर निशाना साधा था.  ट्रंप ने आरोप लगाते हुए किए ट्वीट में लिखा था कि मैं लंबे वक्त से कहता आया हूं कि ट्विटर "फ्री स्पीच को बैन" कर रहा है और आज "डेमोक्रेट और कट्टर लेफ्ट" के साथ मिलकर मुझे चुप करने के लिए मेरे अकाउंट को बंद कर दिया. ट्रंप के इस ट्वीट के कुछ देर बाद कंपनी ने ट्रंप के कैंपेन अकाउंट (@TeamTrump) को बंद कर दिया था.  (ndtv.in)
 

पाकिस्तान बनने वाला है बांग्लादेश!, 40 साल में 4% घटे हिंदू, जानें कट्‌टरपंथी कैसे देते हैं हमलों को अंजाम
21-Oct-2021 12:17 PM (36)

ढाका. क्या भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश अब पाकिस्तान या अफगानिस्तान की बनने की राह पर है. बीते दिनाें दुर्गा पूजा के दौरान हिंदू समुदाय के साथ जो हिंसक घटनाएं देखने को मिली, उससे यही पता चलता है कि बांग्लादेश में कट्‌टरपंथी ताकतें हावी हो रही हैं.

अगर बांग्लादेश के बीते 40 साल के इतिहास पर नजर डालें तो हम पाएंगे कि यहां हिंदुओं की आबादी 13.5% से सिर्फ 8.5% रह गई है. बड़ी संख्या में हिंदुओं का पलायन भारत में होता रहा है. बांग्लादेश में परंपरागत रूप से हिंदू सत्तारूढ़ अवामी लीग की मुखिया भले ही हिंदुओं समुदाय की सुरक्षा की गारंटी देती हों, लेकिन हाल ही घटनाओं पर उनकी सरकार की नाकामी दिखाती है कि वह भी इन पर रोक लगाने में असमर्थ हैं.

हिंदुओं पर हमलों का पूरा पैटर्न समझिए
वामपंथी रुझान वाले गणसमिति आंदोलन के जुनैद साकी का कहना है कि सत्तारूढ़ अवामी लीग अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं को सुरक्षा देने का बस वादा करती है. ये जमीन पर कहीं दिखाई नहीं देते. हिंदुओं पर हमले एक निश्चित पैटर्न पर होते हैं.

कुछ सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाती है और इसे इस्लाम के खिलाफ करार दिया जाता है. फिर कट्‌टरपंथी संगठन हिंदुओं पर हमले का फरमान जारी कर देते हैं. इसके बाद हमलों का दौर शुरू हो जाता है. अल्पसंख्यक खासकर हिंदू समुदाय भी समझ चुका है, वे राजनीतिक रूप से हाशिये हैं और कुछ नहीं कर सकते.

बांग्लादेश की जनसंख्या बढ़ी, हिंदुओं की घटी
बांग्लादेश में 1971 से 2011 के चार दशकों के दौरान कुल आबादी 110 फीसदी बढ़ी है. 1971 में आबादी 7 करोड़ 14 लाख थी. जो 2011 में बढ़कर लगभग 15 करोड़ हो गई. जबकि इसी अवधि के दौरान हिंदुओं की आबादी लगभग 96 लाख से सवा करोड़ ही हुई. हिंदुओं की आबादी केवल 30% ही इजाफा हुआ, जो कि देश की तुलना में काफी कम है. (news18.com)

बांग्लादेश कानूनों में हिंदू पुरुष कर सकता है कई शादियां लेकिन महिलाएं क्यों लाचार
21-Oct-2021 10:25 AM (92)

बांग्लादेश का अपना कानून है. इस कानून में हिंदुओं के लिए हिंदू कोड लागू है. लेकिन इस कानून में विवाह को लेकर कई ऐसी बातें हैं, जिसके खिलाफ वहां हिंदू कई बार विरोध की आवाज बुलंद कर चुके हैं लेकिन कुछ नहीं होता है. ये ऐसा कानून है, जो अब हिंदुओं के लिए भारत में भी नहीं है. कुछ हद तक ये कानून हैरान करने वाला भी है.

भारत में जहां विवाह के बाद हिंदू महिलाओं को तमाम अधिकार दिए गए हैं, जिसमें संपत्ति, गुजारा भत्ता, तलाक जैसे अधिकार शामिल हैं, वहीं बांग्लादेश में हिंदू पर्सनल लॉ लागू है और वो सारे कानून जो हिंदू कोड के तहत अंग्रेजों के शासनकाल में लागू थे, इसमें महिलाओं को काफी लाचार स्थिति में रहना होता है.

बांग्लादेश में करीब 88 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है जबकि 10 फीसदी हिंदू और 02 फीसदी ईसाई, बौद्ध और अन्य धर्म के लोग. 1971 में जब बांग्लादेश एक देश के तौर पर हरकत में आया और उसने अपना संविधान लागू किया तो हिंदू के पारिवारिक मामलों के लिए उन्हीं पर्सनल कानूनों पर चलने का फैसला किया, जो तमाम एक्ट के तहत ब्रिटिश दौर में लागू होते थे.

हिंदू पर्सनल लॉ में दयाबाग संस्था के तहत प्रावधान
बांग्लादेश में हिंदू पर्सनल लॉ को दयाबाग संस्था के हिंदू प्रावधानों के तहत रखा गया, जिसकी मान्यता पूर्वात्तर भारत में आजादी से पहले काफी ज्यादा रही है. इन कानून के तहत बांग्लादेश में रहने वाला हिंदू पुरुष कितने भी विवाह कर सकता है लेकिन विवाह के बाद पत्नी के पास संपत्ति से लेकर तलाक का अधिकार नहीं होता.

बांग्लादेश में हिंदू मैरिज एक्ट के खिलाफ वहां की महिला अधिकार संस्थाओं ने कई बार आवाज उठाई है. इस कानून में हिंदू पुरुषों को तो कई विवाह की आजादी है लेकिन हिंदू स्त्री तलाक भी नहीं ले सकती. 

क्यों तलाक नहीं ले सकतीं बांग्लादेश में हिंदू महिलाएं
चूंकि हिंदू मान्यताओं और संहिताओं में विवाह के बाद पुरुष और स्त्री के बंधन को पवित्र माना गया है तो ये भी माना गया है कि वो अलग नहीं हो सकते हैं, ये बात अक्षरशः बांग्लादेश में लागू होती है.

लगातार होती है इस कानून को बनाने की मांग
हालांकि हिंदू पर्सनल के इन कानूनों का बांग्लादेश में भी काफी विरोध होता रहा है. कई संस्थाएं लगातार इसके खिलाफ आवाज उठाती रही हैं लेकिन बांग्लादेश सरकार ने इसमें कभी बदलाव नहीं किया. इसे लेकर कई बार सर्वे भी होते रहे हैं.

बांग्लादेश में एक हालिया सर्वे के अनुसार 26.7 फीसदी पुरुष और 29.2 फीसदी महिलाएं इस पर्सनल लॉ के विरोध में हैं. वो चाहते हैं कि महिलाओं को तलाक का अधिकार दिया जाए लेकिन सरकार इससे साफतौर पर ये कहकर इनकार करती रही है, क्योंकि इसका प्रावधान हिंदू सिविल लॉ में नहीं है.

भारत में हिंदू कोड को आजादी के बाद बदला था नेहरू सरकार ने
भारत में भी यही हिंदू संहिता अंग्रेजी राज तक लागू थी. नेहरू सरकार ने जब संविधान के तहत इसे बदलकर महिलाओं को पारिवारिक औऱ वैवाहिक मामलों में अधिकार संपन्न किया तो इसका काफी विरोध हुआ था. बड़े पैमाने पर तब हिंदू संतों औऱ संस्थाओं ने देशभर में इसके खिलाफ आक्रामक प्रदर्शन किये थे लेकिन तत्कालीन सरकार ने इस पर डटे रहने का फैसला किया था.

बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं की स्थिति खराब
वैसे बांग्लादेश में इन कानूनों के चलते हिंदू पुरुष कई शादियां करते रहे हैं तो महिलाओं की हालत पर इसका बुरा असर पड़ा है. कुछ हद तक हिंदू विवाह को रजिस्ट्रेशन के दायरे में लाने के लिए बांग्लादेश संसद ने 2012 में एक कानून बनाया था लेकिन उसमें महिलाओं को कोई अधिकार नहीं दिए गए हैं, बस स्वैच्छा से शादियों को सरकारी कार्यालय में रजिस्टर्ड करने की बात है.

तलाक नहीं ले सकतीं लेकिन अलग रह सकती हैं
बांग्लादेश में हिंदू महिलाएं किसी भी हालत में पति से तलाक नहीं ले सकतीं लेकिन अगर वो चाहें तो अदालत में अलग रहने और हर्जाना भत्ता देने का मुकदमा जरूर कायम कर सकती हैं लेकिन ऐसे सारे मुकदमों में उन्हें वाजिब कारण बताने और उसे साबित करने में बहुत मुश्किलें होती हैं. (news18.com)

मदीना रियासत का हवाला देते हुए इमरान ने पाक सेना प्रमुख बाजवा पर साधा निशाना
21-Oct-2021 9:59 AM (64)

मृत्युंजय कुमार झा
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर:
इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस के प्रमुख के पद को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के बीच व्याप्त तनाव अभी भी बना हुआ है।

दो सप्ताह हो गए हैं, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खान ने अभी तक आईएसआई प्रमुख के पद के लिए तीन नामों में से एक का चयन नहीं किया है, जो उनके और सेना प्रमुख के बीच टकराव का मुख्य कारण बना हुआ है।

खान के मंत्रियों के दावों के बावजूद कि बाजवा के साथ मामला सुलझा लिया गया है, खान हर संभव सार्वजनिक मंच से सैन्य प्रतिष्ठान को लेकर कई तरह के बयान दे रहे हैं, जो बेहद असामान्य है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने एक बार फिर दोहराया है कि वह 'नया पाकिस्तान' को एक ऐसा इस्लामिक कल्याणकारी राष्ट्र बना देंगे, जो कि पैगंबर के मार्गदर्शक सिद्धांतों पर मदीना के मॉडल पर आधारित होगा, जहां शक्तिशाली लोगों और जनरलों सहित कानून के समक्ष सभी समान होंगे।

खान ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख बाजवा के साथ अपने चल रहे संघर्ष के परोक्ष संदर्भ में कहा, "मदीना की व्यवस्था न्याय और योग्यता पर आधारित है, यहां तक कि एक जनरल को भी प्रदर्शन के आधार पर उच्च पद पर पदोन्नत किया जाता है।"

खान ने मंगलवार को रहमतुल-लील-आलामीन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "कानून पैगंबर मुहम्मद (पीबीयूएच) के मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित होगा।"

पाकिस्तानी दैनिक द न्यूज ने खान के हवाले से कहा, "भविष्यवक्ताओं ने मुसलमानों को ज्ञान प्राप्त करने पर जोर दिया है, भले ही उन्हें इस उद्देश्य के लिए चीन जाना पड़े। ज्ञान प्राप्त करके, मुसलमान अतीत में दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिक बन गए।"

हालांकि इमरान खान प्रधानमंत्री बनने के बाद से 'नया पाकिस्तान' के बारे में बात कर रहे हैं, मगर उन्होंने कभी इस बारे में बात नहीं की कि वह इसे कैसे हासिल करने की योजना बना रहे हैं? क्या मदीना पाकिस्तान के राजनीतिक, सैन्य और न्यायिक पुनर्निर्माण का एक नमूना है या सिर्फ एक नारा है?

मदीना रियासत को लेकर इमरान खान की व्याख्या अलग है। पिछले हफ्ते, उन्होंने पाकिस्तान के लोगों को पश्चिमी संस्कृति से बचाने के लिए रहमतुल-लील-आलामीन प्राधिकरण - मुल्लाओं और धार्मिक मौलवियों की एक परिषद के गठन की घोषणा की थी।

उन्होंने कहा, "वे (प्राधिकरण) हमें बताएंगे कि किन चीजों को बदलने की जरूरत है।"

दिलचस्प बात यह है कि पिछले हफ्ते पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खान ने मुल्लाओं से वादा किया था कि उनके शासन के दौरान इस्लामी नियमों के खिलाफ कोई भी कानून नहीं बनाया जाएगा और जो दो प्रमुख विधेयक हैं, पहला घरेलू हिंसा के मुद्दे को संबोधित करने के लिए और दूसरा जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए है, उन्हें लागू नहीं किया जाएगा, क्योंकि वे इस्लामी कानून के खिलाफ हैं।

पिछले साल उनकी सरकार ने मदरसों को मुख्यधारा में लाने के प्रयास में विवादास्पद एकल राष्ट्रीय पाठ्यचर्या नीति (एसएनसीपी) पेश की थी। उन्होंने प्रांतीय सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर पवित्र कुरान की शिक्षा अनिवार्य की जाए। आवश्यक परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना कोई भी छात्र बीए, बीएससी, बीई, एमई, एमए, एमएससी, एमफिल, पीएचडी या मेडिकल डिग्री प्राप्त नहीं कर पाएगा।

एक पूर्व क्रिकेटर और पश्चिमी सभ्यता से मेल खाने वाले प्लेबॉय के रूप में खान की प्रतिष्ठा कभी-कभी विदेशियों को यह मानने के लिए गुमराह करती है कि वह पाकिस्तान के लिए एक उदार ²ष्टिकोण का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। वास्तव में, खान पाकिस्तान के आगे रूढ़िवाद और निर्लज्ज कट्टरता में उतरने का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

जबकि पाकिस्तानी समाज के उदारवादी वर्गों को हाशिए पर रखा जा रहा है, धार्मिक दल और उनके मंसूबे फल-फूल रहे हैं।

(यह आलेख इंडियानैरेटिव डॉट कॉम के साथ एक व्यवस्था के तहत लिया गया है)  (आईएसआई)

मां ने बनाए घर आने वाले मेहमानों के लिए नियम, बच्चे से मिलना है पूरी करनी होंगी सभी शर्तें !
21-Oct-2021 9:55 AM (65)

नई मां अपने बच्चे को लेकर कितनी प्रोटेक्टिव होती है, ये हर कोई जानता है. वे बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर वो काम करना चाहती हैं, जो उनके बस में है. यूनाइटेड किंगडम के लंदन में रहने वाली लोला जिमेनेज़ भी नई-नवेली मां बनी हैं. अब उन्होंने अपने बच्चे से मिलने आने वाले मेहमानों के लिए भी एक रूलबुक तैयार कर दी है. जो भी बच्चे से मिलने आने वाला है, उसे इन्हीं नियम-कायदों के मुताबिक चलना होगा.

Coronavirus महामारी के बीच ही लाला जिमिनेज़ ने एक बेटे को जन्म दिया है. बच्चे के इस दुनिया में आने की खबर मिलते ही दोस्तों और परिवार वालों ने उससे मिलने की प्लानिंग कर ली. हालांकि लोला ने जानने वालों की खुशी देखते हुए फटाफट अपने बेटे की सुरक्षा के लिए एक नियम-कायदों की लिस्ट बना दी और साफ कर दिया कि अगर बच्चे से मिलना है तो इन सख्त नियमों का पालन करना ही होगा.

Instagram पर मां ने शेयर की लिस्ट
लोला ने बेटे डेनियल को इसी साल अगस्त में जन्म दिया है. उन्होंने अपनी प्रेगनेंसी के दौरान कोविड वैक्सीन भी इसीलिए नहीं लगवाई, कि इसका कोई भी दुष्प्रभाव उनके बेटे पर नहीं पड़े. ऐसे में जब बच्चा दुनिया में आ गया है, तो वे कोई रिस्क लेना नहीं चाहतीं. Mirror की रिपोर्ट के मुताबिक मां ने Instagram पर रूल्स की लिस्ट शेयर की है और कहा है कि वे बच्चे को कोरोना से दूर रखना चाहती हैं. लोला के इस कदम के बाद से उन्हें न तो दोस्तों और न ही परिवार वालों से किसी तरह का रेस्पॉन्स मिला है. हालांकि वे कहती हैं कि सभी मांओं को बच्चे की सुरक्षा को लेकर अपनी सीमाएं तय करनी चाहिए.

आप भी जान लीजिए नियम-कानून
नई-नवेली मां की रूलबुक के मुताबिक परिवार और दोस्तों के अलावा वे और किसी विज़िटर को घर पर इजाज़त नहीं देंगे. घर आने वाले मेहमानों को अपने जूते और ऊपर के कपड़े उतारने होंगे और हाथ धोकर सैनेटाइज़ करना होगा. अगर आप घर आ रहे हैं अपना लेटरल फ्लो टेस्ट करा लें और उसकी निगेटिव रिपोर्ट दिखा दें. अगर ये पॉजिटिव है, तो आप फिर कभी आएं. घर में स्मोकिंग नहीं करनी है न ही शराब पीकर बच्चे से मिलने आना है. आप बच्चे को पकड़ नहीं सकते हैं, न ही आपको उसे प्यार से चूमना है. आप प्रेजेंट्स लेकर न आएं और सेकेंड हैंड चीज़ें बिल्कुल नहीं खरीदें. मां जब भी बच्चा वापस मांगे और गेस्ट से जाने के लिए कहे तो आप बिना विवाद के चले जाएं. (news18.com)

मगरमच्छ से भरे तालाब में गिर गया महिला का iPhone, पानी में तैरते ऊदबिलाव ने दिखाई ऐसी चतुराई
21-Oct-2021 9:54 AM (96)

जानवरों की समझदारी के कई मामले सामने आते हैं. कुछ मामलों को जानकर तो यकीन नहीं हो पाता कि कोई जानवर ऐसा कर सकता है. वैसे तो कुत्तों की समझदारी के ज्यादातर मामले सामने आते हैं. कुत्ते इंसान के साथ रहते हैं ऐसे में उनका इंसानों से खास रिश्ता रहता है. लेकिन हाल ही में चीन के एक एनिमल पार्क के तालाब में रहने वाले ऊदबिलाव की हरकत चर्चा बटोर रही है. पार्क में घूमने आए एक टूरिस्ट का मोबाइल वीडियो बनाते हुए अचानक तालाब में गिर गया. बताया जा रहा है कि तालाब में मगरमच्छ भी थे. ऐसे में सभी को लगा कि अब उसे मोबाइल नहीं मिलेगा. लेकिन तालाब में मौजूद ऊदबिलाव ने महिला को मोबाइल लौटा दिया.

इस ऊदबिलाव की समझदारी की चर्चा हो रही है. उसने टूरिस्ट का फोन गलती से गिरने के बाद उसे तालाब के नीचे से निकाल कर वापस कर दिया. घटना तब घटी जब तालाब के पास एक जू कीपर जानवरों को खाना खिला रहा था. जानवरों को खाते देखने के लिए वहां अच्छी-खासी भीड़ जमा हो गई. इंस्ट्रक्टर के कहने पर ऊदबिलाव कुछ-कुछ कलाकारी भी कर के दिखा रहे थे. इसी समय ज़ू में आई एक महिला का फोन तालाब में गिर गया. ऐसा होते वहां मौजूद ऊदबिलाव ने देख लिया. उसने तुरंत महिला का मोबाइल तालाब के तले से निकाला. मुंह में दबाकर ऊदबिलाव ने मोबाइल महिला को लौटा दिया.

ये पूरी घटना वहां मौजूद दूसरे टूरिस्ट ने अपने कैमरे में कैद कर ली. जैसे ही ऊदबिलाव ने मोबाइल निकाला, लोगों ने ताली बजाकर उसकी तारीफ की. इतना ही नहीं, ज़ूकीपर ने इनाम के तौर पर ऊदबिलाव को एक्स्ट्रा मछली भी खाने को दिया. बताया जा रहा है कि जिस टूरिस्ट का मोबाइल तालाब में गिरा था जो बीजिंग की रहने वाली है. उसने अपना मोबाइल वापस देने के लिए ऊदबिलाव को गिफ्ट भेजने का प्रॉमिस किया था. शंघाई ज़ू ने कन्फर्म किया कि महिला ने अपना वादा निभाया और ऊदबिलाव के लिए गिफ्ट भेजे.

जैसे ही इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आई, ये वायरल हो गई. लोगों ने ऊदबिलाव की समझदारी की काफी तारीफ की. इसका वीडियो जैसे ही सामने आया, लोगों ने ऊदबिलाव की इस हरकत को क्यूट बताया. ज़ू ने भी नन्हे ऊदबिलाव की इस करकट के बदले उसे रिवार्ड दिया. डिनर में ऊदबिलाव को एक्स्ट्रा मछली खाने को दी गई. (news18.com)

पापा का फोन देख बच्चे ने डायल किया पुलिस का नंबर, बोला- 'घर आ जाओ, मेरे पास बहुत सारे खिलौने हैं'
21-Oct-2021 9:54 AM (134)

बच्चों की शरारतों का क्या ही कहिए, कभी ये मुसीबत बन जाती हैं, तो कभी ये बेहद प्यारी होती हैं. न्यूजीलैंड में एक बच्चे ने भी ऐसी ही शरारत की. जब उसके पापा किसी दूसरे काम में व्यस्त थे, तभी बच्चे ने उनका फोन उठाया और सीधा घर पर पुलिस बुला ली. हालांकि एमरजेंसी में पुलिस बुलाने की उसकी वजह बेहद अलग थी.

न्यूजीलैंड की साउथ आइलैंड पुलिस ने इस वाक्ये को खुद ही बताया है और बच्चे की कॉल को रिलीज़ करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है कि ये इतना ज्यादा क्यूट कॉल था, कि हम शेयर किए बिना नहीं रह पा रहे. 4 साल के छोटे से बच्चे ने एमरजेंसी नंबर 111 को अपने पापा के मोबाइल से डायल किया और छिपकर पुलिस से बातें करने लगा. बच्चे ने उन्हें अपने घर पर इनवाइट किया, ताकि वो उन्हें अपने अच्छे-अच्छे खिलौने दिखा सके और उनसे खेल सके.

बच्चे ने खिलौने दिखाने के लिए बुला ली पुलिस
जिस बच्चे ने पुलिस को कॉल किया था, उसकी मां की तबियत ठीक नहीं थी. ऐसे में पापा उसके छोटे बच्चे के साथ व्यस्त थे. इसी बीच लड़के छिपकर पुलिस को कॉल किया और उनसे पूछा क्या ये पुलिस लेडी का नंबर है? ऑपरेटर ने बच्चे से पूछा कि वो उनके लिए क्या कर सकते हैं? बदले में पुलिस ने बच्चे को कहा कि आप बताएं कि हम क्या करें? फिर क्या था, बच्चे ने उन्हें घर पर अपने खिलौने दिखाने के लिए बुला लिया. इसी बीच उसके पापा ने बच्चे को देखा और पुलिस को इस कॉल के बारे में सफाई दी.

कॉल के बाद पुलिस वाकई पहुंच गई घर
पुलिस ने कॉल रिसीव करने के बाद तय किया कि वो बच्चे के खिलौने देखने उसके जाएंगे. कर्ट नाम के पुलिस ऑफिसर बच्चे के घर पहुंचे और उसके कूल टॉयज़ का कलेक्शन भी देखा. इतना ही नहीं पुलिस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ये भी बताया है कि बच्चे के पास बहुत सारे खिलौने थे. पुलिस के इस एक्शन की खूब तारीफ हो रही है और लोग कह रहे हैं कि ये बहुत ही अच्छा जेस्चर था. हालांकि पुलिस का ये भी कहना है कि बच्चों को एमरजेंसी नंबर डायल करने के लिए प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए, लेकिन कॉल बहुत ही क्यूट था. (news18.com)

तालिबान ने अफगान महिला वॉलीबॉल टीम की सदस्य महजुबिन का सिर कलम किया
21-Oct-2021 9:04 AM (81)

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर| अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम की सदस्य महजुबिन हकीमी का तालिबान ने काबुल में सिर कलम कर दिया। वह युवा आयु वर्ग टीम की तरफ से खेलती थीं। फारसी इंडिपेंडेंट के साथ एक साक्षात्कार में, अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम के कोचों में से एक, सुराया अफजाली (छद्म नाम) ने पुष्टि की कि एथलीट की मौत हो गई है। उन्होंने कहा कि महजुबिन के परिवार के अलावा कोई मौत के समय और तरीके के बारे में नहीं जानता।

महजुबिन पिछली अफगान सरकार के पतन से पहले काबुल नगर पालिका वॉलीबॉल क्लब के लिए खेलती थीं और क्लब के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक थीं।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि बकौल सुराया अफजाली, महजुबिन हकीमी की हत्या संभवत: अक्टूबर की शुरुआत में हुई थी और यह मुद्दा अब तक छिपा हुआ था, क्योंकि उसके परिवार को धमकी देकर इस बारे में किसी को बताने से मना किया गया था।

अफजाली के अनुसार, पिछली सरकार के पतन के बाद, अफगानिस्तान में महिला एथलीटों को एक गंभीर सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ा और तालिबान ने उनका पीछा किया और विभिन्न शहरों में उनमें से कई के घरों की तलाशी ली।

कई महिला एथलीट, विशेष रूप से अफगान महिला वॉलीबॉल टीम की सदस्य, जिन्होंने विदेशी और घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लिया है और मीडिया कार्यक्रमों में दिखाई दी हैं, गंभीर खतरे में हैं।

अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम के कोच ने कहा कि टीम के केवल दो खिलाड़ी व्यक्तिगत कार्रवाई के माध्यम से अफगानिस्तान छोड़ने में सक्षम थे और अफगानिस्तान के अंदर टीम के बाकी सदस्य खतरे और आतंक में हैं।

अफजाली ने कहा, "वॉलीबॉल टीम के सभी खिलाड़ी और बाकी महिला एथलीट बुरी स्थिति में हैं और निराशा और डर में हैं।"

रिपोर्ट में कहा गया है, "सभी को पलायन करने और अज्ञात जगहों पर रहने के लिए मजबूर किया गया है। अफगानिस्तान छोड़ने के लिए विदेशी संगठनों और देशों का समर्थन हासिल करने के प्रयास अब तक असफल रहे हैं।"

महजुबिन की मौत ने तालिबान और उन लोगों द्वारा निशाना बनाए जाने की आशंकाओं को हवा दी है, जो लंबे समय से महिलाओं के खेल को बाधित करने की मांग कर रहे हैं।

तालिबान के अफगानिस्तान पर नियंत्रण के साथ खेल, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं की सभी गतिविधियां बंद हो गई हैं और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय महिलाओं के जीवन, काम और सुरक्षा पर जारी प्रतिबंध के बारे में अभी भी चिंताएं हैं। 

हर हफ्ते 10 हज़ार का फास्ट फूड खाकर फूल गई लड़की, 3 महीने के बाद मां भी नहीं पहचान पाई !
21-Oct-2021 9:02 AM (89)

फास्ट फूड-जंक फूड किसे अच्छे नहीं लगते? एक बार खाने के बाद इसे बार-बार खाने का मन करता है. वो बात अलग है कि इसका दुष्प्रभाव शरीर पर ज़बरदस्त तरीके से पड़ता है. ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली कोरा हेंडरसन के भी मुंह McDonald के फूड आइटम्स का ऐसा चस्का लगा कि वो इसे खा-खाकर फूल गई. हद तो तब हो गई, जब लड़की की अपनी मां भी उसे पहचानने में धोखा खा गई.

सिडनी की रहने वाली 22 साल की कोरा 3 महीने बाद अपने परिवार से मिलने के लिए आईं, तो उनका वज़न इतना ज्यादा बढ़ चुका था कि मां भी अपनी बेटी को नहीं पहचान पाईं. दिलचस्प बात तो ये है कि मां अगर कोरा को इस बात का एहसास न दिलातीं कि वो इतनी ज्यादा मोटी हो चुकी है, तो उसे खुद इस बात का एहसास ही नहीं था कि वो मोटी होती जा रही है.

बेतहाशा बढ़ता गया वज़न
कोरा पहले फ्लाइट अटेंडेंट का काम करती थीं. उस दौरान भी लंबी फ्लाइट्स में सफर करने के दौरान वे पीछे बैठकर कुछ न कुछ खाती रहती थीं और फ्लाइट के लैंड करते ही फूड कोर्ट पहुंच जाती थीं. उनकी इस आदत की वजह से भी वजन बढ़ रहा था. महामारी में फ्लाइट्स बंद होने के बाद उनकी नौकरी छूट गई और उनकी हालत और खराब होने लगी. वे पहले से ज्यादा आलसी महसूस करती थीं और उनका कुछ करने का मन ही नहीं होता था. वे बताती हैं कि घर बैठे-बैठे भी वे 2 हज़ार रुपये दिन में मैकडोनल्ड पर खर्च कर देती थीं, यानि हफ्ते में ये बिल 10 हज़ार से ऊपर पहुंच जाता था.

मां की सलाह के बाद घटाया वज़न
जब कोरा ने 3 महीने बाद घर वापसी की, तो मां उन्हें पहचान ही नहीं पाईं. ऐसे में उन्हें अपने मोटापे का एहसास हुा और उन्होंने इस पर ध्यान देना शुरू कर दिया. जिम में जाने के अलावा उन्होंने अपने जंक फूड पर एक महीने के लिए बैन लगा दिया, जबकि लिक्विड के नाम पर वे सिर्फ पानी पीती रहती थीं. उन्होंने पौष्टिक भोजन करना शुरू कर दिया. इसका परिणाम ये हुआ कि उनका वजन तो घटा ही, उनका एनर्जी लेवल भी तेज़ी से बढ़ा. कोरा बताती हैं कि वज़न का घटना आपकी ज़िंदगी को बिल्कुल बदलकर रख देता है. हेल्दी खाना खाने से शरीर को ईंधन मिलता है, जबकि जंक फूड आपकी एनर्जी को खत्म कर देता है. (news18.com)

कश्मीर में दुबई के निवेश से भड़का पाकिस्तान, पूर्व राजदूत बोले- हम मजाक बनकर रह गए
21-Oct-2021 8:35 AM (100)

नई दिल्ली. कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद से लेकर अब तक पाकिस्तान हर मंच पर भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है. लेकिन उसे कहीं भी कामयाबी नहीं मिली. इसके बाद उसने इस्लामी मुल्कों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन पर भी कश्मीर को लेकर मदद मांगी. लेकिन उसे चुप करा दिया गया. अब खबर है कि पाकिस्तान के कथित मुस्लिम बरादर मुल्क संयुक्त अरब अमीरात ने कश्मीर को लेकर भारत से डील साइन की है. दुबई जल्द ही कश्मीर में इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में निवेश करने जा रहा है. खबर सामने आने के बाद पाकिस्तान में बवाल मच गया है.

इस नए समझौते के तहत दुबई कश्मीर में IT टावर, औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक टावर के साथ ही मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी बनाएगा. हालांकि अभी इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि दुबई, कश्मीर में कितना निवेश करेगा. लेकिन दुबई भारत के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर भी कर चुका है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, कश्मीर के विकास के लिए दुनिया हमारे साथ आ रही है. यह करार बताता है कि भारत ग्लोबल पावर के तौर पर सामने आ रहा है.

पाकिस्तान बन गया मजाक: बासित
भारत में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने कहा कि पाकिस्तान में निरंतरता की कमी के चलते हम दूसरे देशों के लिए मजाक बनकर रह गए हैं. उन्होंने इस फैसले पर भड़कते हुए कहा कि यह पाकिस्तान के लिए डिप्लोमेटिक हार है. पहले ही OIC ने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन नहीं किया है.

दूसरे इस्लामी मुल्क भी करेंगे निवेश
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंधेरे में हाथ-पैर मार रहा है और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है. इस हाल के लिए पाकिस्तान की पुरानी सरकारें भी दोषी हैं. ऐसा नहीं है कि कश्मीर का हल नहीं निकाला जा सकता है. लेकिन इच्छाशक्ति की कमी है. वो दिन दूर नहीं जब कश्मीर में दुबई के बाद ईरान और दूसरे मुस्लिम देश भी निवेश करेंगे. (news18.com)

यूनिसेफ: यमन में 2016 से अब तक 10,000 बच्चे मारे गए या अपंग हुए
20-Oct-2021 9:12 PM (79)

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का कहना है कि यमन में 2016 से अब तक 10,000 बच्चे मारे गए हैं या अपंग हो चुके हैं. युद्ध के कारण देश इस समय दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकट का सामना कर रहा है.

(dw.com)  

यूनिसेफ ने मंगलवार, 19 अक्टूबर को कहा कि युद्धग्रस्त देश यमन में 10,000 से अधिक बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं. एजेंसी के अनुसार यमन हर दिन चार बच्चों के मारे जाने या घायल होने के "शर्मनाक मील के पत्थर" पर पहुंच गया है.

यमन में पिछले पांच वर्षों से युद्ध छिड़ा हुआ है, जिसमें ईरानी समर्थित हूथी विद्रोही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार से लड़ रहे हैं. इस युद्ध में सऊदी अरब और क्षेत्र में उसके सहयोगी भी सरकार का समर्थन कर रहे हैं.

यूनिसेफ के प्रवक्ता जेम्स एल्डर ने कहा कि उनकी एजेंसी का अनुमान है कि यमन में अब तक 10,000 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 2015 में युद्ध में सऊदी गठबंधन के हस्तक्षेप के बाद से हर दिन लगभग चार बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं.

यूनिसेफ ने इसे "शर्मनाक मील का पत्थर" बताया है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है मार्च 2015 से इस साल 30 सितंबर के बीच यमन में हुई लड़ाई में 3,455 बच्चे मारे गए और 6,600 घायल हुए.

युद्ध के परिणामस्वरूप अनगिनत यमनी बच्चे अप्रत्यक्ष रूप से घातक तरीकों से प्रभावित हो रहे हैं. यमन वर्तमान में संघर्षों, आर्थिक तबाही, सामाजिक विघटन और कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं से ग्रस्त है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यमन वर्तमान में दुनिया के सबसे खराब मानवीय संकट से जूझ रहा है, जिसमें लगभग दो करोड़ लोग या देश की एक तिहाई आबादी को किसी भी सहायता की सख्त जरूरत है. बच्चे इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हैं और कुल 1.1 करोड़ लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं. यानी पांच में से चार यमनी बच्चों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.

इसके अलावा यूनिसेफ के अनुसार लगभग चार लाख बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं. एजेंसी के जेम्स एल्डर ने कहा, "वे भूख से मर रहे हैं क्योंकि वयस्कों ने एक युद्ध शुरू कर दिया है जिसमें बच्चे सबसे ज्यादा पीड़ित हैं."

यमन में गृहयुद्ध के चलते करीब 20 लाख बच्चे अब स्कूल नहीं जा पा रहे हैं जबकि हिंसा ने लगभग 17 लाख बच्चों और उनके परिवारों को विस्थापित कर दिया है. (dw.com)

एए/सीके (डीपीए, एपी)

UK ने फेसबुक पर लगाया 50 मिलियन यूरो से ज्यादा का जुर्माना, जानें क्या है मामला
20-Oct-2021 8:22 PM (92)

ब्रिटेन की कंपटीशन वॉचडॉग कंपटीशन एंड मार्केट अथॉरोटी (CMA) ने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म फेसबुक पर 50 मिलियन यूरो से ज्यादा (4,35,43,00,000 रुपये से ज्यादा) का जुर्माना लगाया है. फेसबुक पर ये कार्रवाई एनिमेटेड ग्राफिक्स स्टार्टअप Giphy के अधिग्रहण से जुड़े मामले में जानकारी नहीं देने के चलते की गई है.

कंपटीशन एंड मार्केट अथॉरोटी ने कहा कि फेसबुक पर 50.5 मिलियन यूरो का जुर्माना पिछले साल की खरीद से जुड़े मामले में जानबूझकर ज़रूरी जानकारी देने से इनकार करने के चलते लगाया गया है.

सीएमए में मरजर्स के वरिष्ठ निदेशक जोइल बैमफोर्ड ने अपने बयान में कहा, "हमने फेसबुक को चेताया था कि उनका ज़रूरी सूचनाओं को देने से इनकार करना आदेश का उल्लंघन है, लेकिन दो अदालतों में अपील खारिज होने के बावजूद फेसबुक अपनी कानूनी दायित्वों की अवहेलना जारी रखी."

उन्होंने कहा, "इसे उन कंपनियों को चेतावनी की तरह लेना चाहिए जो खुद को कानून से ऊपर समझती हैं." सीएमए ने कहा कि ये पहला मौका है जब कोई कंपनी जानबूझकर ऐसे किसी आदेश का उल्लंघन करती हुई पाई गई है. इसके अलावा सीएमए ने अलग से फेसबुक पर 5 लाख यूरो का जुर्माना भी लगाया है. ये जुर्माना चीफ कंप्लायंस अधिकारी को दो बार बिना मंज़ूरी के बदलने के मामले में लगाया गया है.

आपको बता दें कि फेसबुक ने मई 2020 में Giphy की खरीद का एलान किया था. रिपोर्ट्स की मानें तो ये खरीद 400 मिलियन डॉलर में हुई थी.(abplive)

सुअर की किडनी को मानव शरीर से जोड़ा, करने लगी काम, वैज्ञानिकों का सबसे बड़ा चमत्कार
20-Oct-2021 8:04 PM (134)

न्यूयॉर्क. अमेरिका में वैज्ञानिकों ने अस्थाई रूप से एक सुअर की किडनी को मानव शरीर से जोड़ने में सफलता हासिल की है. इतना ही नहीं, यह किडनी ठीक से काम भी कर रही है. वैज्ञानिकों के इस ट्रांसप्लांट को बड़ी खोजों में से एक देखा जा रहा है. इससे भविष्य में जानवरों के अंगों का मानव शरीर में इस्तेमाल कर जानें बचाए जाने की संभावना बढ़ी है. हालांकि इस केस में विस्तृत रिपोर्ट का अभी इंतजार है.

इस सर्जरी को बेहद चरणबद्ध तरीके से किया गया है.
मामला अमेरिका के न्यूयॉर्क का है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क सिटी में स्थित एनवाईयू लैंगन हेल्थ सेंटर में डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम ने इस सर्जरी अंजाम दिया. इस सर्जरी को बेहद चरणबद्ध तरीके से किया गया है. इसकी तैयारी भी काफी ठोस तरीके से की गई थी. किडनी ट्रांसप्लांट से पहले सुअर के जीन को बदल दिया गया था, ताकि मानव शरीर उसके अंग को तत्काल खारिज न कर पाएं.

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसप्लांट की यह प्रक्रिया एक ब्रेन डेड हो चुके पेशेंट पर की गई. पेशेंट की किडनी ने काम करना बंद कर दिया था, लेकिन उसे लाइफ सपोर्ट से हटाने से पहले डॉक्टरों ने उनके परिवारों से इस टेस्ट की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद उन्होंने यह प्रयोग किया. तीन दिन तक सुअर की किडनी ब्रेन डेड मरीज की रक्त वाहिकाओं से जुड़ा हुआ था. किडनी को शरीर के बाहर ही रखा गया था.

डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की इस पूरी प्रकिया को सामान्य करार दिया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब मानव शरीर में किसी दूसरे प्राणी की किडनी का सफल ट्रांसप्लांट किया गया है. हालांकि, इससे पहले भी कई तरह के परीक्षण हो चुके हैं, लेकिन हर बार प्रत्यारोपण असफल रहा. अमेरिकी डॉक्टरों की यह कामयाबी किडनी ट्रांसप्लांट की दिशा में वरदान साबित हो सकती है.

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि एक किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए औसतन करीब 3 से 5 साल का इंतजार करना पड़ता है. दुनियाभर में एक लाख से ज्यादा लोग ऑर्गन ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं. इसमें भी करीब 90 हजार ऐसे लोग हैं, जो सिर्फ किडनी ट्रांसप्लांट कराना चाहते हैं. (news18.com)

खौलते लावा के बीच फंसा आवारा कुत्ता, अब ड्रोन की मदद से पूरा किया आएगा रेस्क्यू ऑपरेशन
20-Oct-2021 7:52 PM (74)

ज्वालमुखी विस्फोट काफी खौफनाक होता है. इसके अंदर से निकलने वाले लावा की चपेट में आने के बाद किसी का जिन्दा बच पाना नामुमकिन ही होता है. बीते दिनों स्पेन के कैनरी आइलैंड में ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था. इससे अभी तक खौलते हुए लावा निकल रहा है. विस्फोट से पहले ही आसपास के लोगों से एरिया को खाली करवा लिया गया था. अब इस ज्वालामुखी के पास फंसे एक कुत्ते को बचाने का काम चल रहा है. ये कुत्ता ज्वालामुखी के मुंह के पास फंसा हुआ है.

स्पेनिश कंपनी ने इस कुत्ते के रेस्क्यू का प्लान बनाया है. इस कुत्ते को ड्रोन के जरिये बचाया जाएगा. किसी जानवर को ड्रोन के जरिये बचाने का ये पहला मामला है. पूरे एरिया को पहले ही खाली करवा लिया गया था. लेकिन ये बेचारा कुत्ता ज्वालामुखी के पास फंस गया. ज्वालामुखी से लगातार लावा निकल रहा है. साथ ही अभी इसके रुकने के कोई आसार नहीं है. ऐसे में अब कुत्ते को ड्रोन के जरिए बचाया जाएगा.

कुत्ते को बचाने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा सकता था. लेकिन उससे निकल रहे धुंए और गर्म मैग्मा की वजह से हेलीकॉप्टर उसके नजदीक नहीं जा पा रहा है. इस वजह से अब Aerocamaras नाम के ड्रोन ऑपरेटर ने अपने ड्रोन के जरिये कुत्ते को बचाने का प्लान बनाया है. अब लोकल अथॉरिटी द्वारा इस प्लान को अप्रूव करने भर की देरी है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये रेस्क्यू प्लान फेल भी हो सकता है, अगर ड्रोन की बैटरी खत्म हो गई तो ये ऑपरेशन नाकामयाब हो जाएगा.

हालांकि, अगर ऐसा हो गया तो ये दुनिया में किसी जानवर का ड्रोन के जरिये रेस्क्यू करने का पहला मामला होगा. कंपनी के पास इस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए सिर्फ 4 मिनट होंगे. इसी में उन्हें कुत्ते की जान बचानी होगी. आगे ये भी देखना है कि इतने दिन से ज्वालमुखी के पास फंसा ये कुत्ता कैसे रिस्पॉन्ड करेगा. अब सभी इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने का इन्तजार कर रहे हैं. (news18.com)

ब्रिटेन ने Facebook पर 500 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का लगाया जुर्माना, जानें वजह
20-Oct-2021 7:15 PM (78)

नई दिल्‍ली. ब्रिटेन ने सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक पर भारी भरकम जुर्माना लगाया है. बताया जा रहा है कि ब्रिटेन ने मार्क जुकरबर्ग की फेसबुक पर ये जुर्माने की कार्रवाई सूचना उल्‍लंघन के मामले में की है. ब्रिटेन ने सोशल मीडिया कंपनी पर 500 करोड़ रुपये (5 करोड़ डॉलर से अधिक) से ज्‍यादा का जुर्माना लगाया है.

फेसबुक ने जानबूझकर उल्‍लंघन किया: CMA
फेसबुक पर यह जुर्माना जीआईएफ प्लेटफॉर्म जिफी की खरीद के बाद जांच के दौरान नियामक के आदेश का उल्लंघन करने के लिए लगाया गया है. प्रतिस्पर्धा और बाजार प्राधिकरण ने कहा कि फेसबुक ने जानबूझकर ऐसा किया है. लिहाजा, उस जुर्माना लगाना जरूरी हो गया है. सीएमए ने कहा कि कोई भी कंपनी कानून से बढ़कर नहीं हो सकती है. नियामक का कहना है कि फेसबुक जिफी के अधिग्रहण के बारे में पूरी जानकारी देने में असफल रही है. इसके अलावा फेसबुक जांच के दौरान जिफी का अपने प्लेटफॉर्म के साथ संचालन करने में भी नाकाम हुई है.

नियामक ने बार-बार दी थी फेसबुक को चेतावनी
नियामक ने कहा है कि फेसबुक ने जिफी के अधिग्रहण के बारे में जरूरी सूचनाएं नहीं दी हैं. नियामक की ओर से इसे लेकर उसे कई बार चेतावनी भी दी गई. रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक अपनी री-ब्रांडिंग की तैयारी कर रहा है. अगले हफ्ते फेसबुक के नए नाम की घोषणा की जा सकती है. फेसबुक के सीईओ मार्क जुकगरबर्ग 28 अक्‍टूबर को होने वाले इवेंट में कंपनी के नए नाम की घोषणा कर सकते हैं. फेसबुक ऐप के अलावा कंपनी इंस्‍टाग्राम , वॉट्सऐप, Oculus के नए नामों को लेकर भी ऐलान कर सकती है. हालांकि इस बारे में फेसबुक ने अब तक कोई जानकारी साझा नहीं की है. (news18.com)

‘जिंदगी आसान बनाने के लिए’ 4,000 फलस्तीनियों को पहचान पत्र देगा इस्राएल
20-Oct-2021 4:42 PM (88)

वेस्ट बैंक में रहने वाले फलस्तीनी इस्राएल के चेक नाकों पर बेरोकटोक जा सकेंगे. इस्राएल उन्हें पहचान पत्र जारी करेगा. 1967 से वेस्ट बैंक पर इस्राएल का कब्जा है.

    (dw.com)  

इस्राएल ने कहा है कि वेस्ट बैंक में रहने वाले 4,000 फलस्तीनियों को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे जिसके बाद वे चेक नाकों से बेरोक टोक आ जा सकेंगे. आधिकारिक पंजीकरण का यह अभियान बरसों से बंद पड़ा था.

इस्राएल की सरकार का यह कदम उन 2,800 लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद होगा जो गजा पट्टी के पूर्व नागरिक हैं. सरकार ने उन्हें कानूनी दर्जा देने का फैसला किया है. ये लोग 2007 में गजा पट्टी से भागकर तब वेस्ट बैंक आ गए थे जब हमास के साथ आंतरिक संघर्ष चल रहा था.
क्यों चाहिए पहचान पत्र?

फलस्तीनी जनता का पंजीकरण होने पर वेस्ट बैंक के नागरिकों को इलाके में बने इस्राएली सेना के नाकों से आने जाने में सुविधा हो जाएगी. इस्राएल ने छह दिन चले युद्ध में इस इलाके पर कब्जा कर लिया था और तब से यहां रहने वाले लोगों के साथ इस्राएली सेना की झड़पें होती रहती हैं.

इस्राएल की सरकार ने इन सैन्य नाकों को सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है. लेकिन फलस्तीनी और मानवाधिकार कार्यकर्ता इन नाकों से असहमत हैं और कहते रहे हैं कि इस कारण लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई है.

इस्राएली सेना की नागरिक मामले देखने वाली शाखा COGAT ने कहा है कि पहचान पत्र देने से गजा पट्टी के 2,800 पूर्व बाशिंदों के अलावा 1,200 उन लोगों को भी लाभ पहुंचेगा जो पंजीकृत नहीं हैं. इनमें वेस्ट बैंक के लोगों के रिश्तेदार आदि शामिल हैं.

इस्राएल ने शांति समझौते के तहत पहचान पत्र देने की यह योजना बनाई थी. इन पहचान पत्रों को हर साल नवीनीकृत किया जाना था. लेकिन साल 2,000 में यह योजना तब ठंडे बस्ते में चली गई जब कथित दूसरे इंतिफादा के तहत लोगों ने संघर्ष किया.

2008-09 में इस्राएल ने 32 हजार लोगों को परिवारों के पुनर्मिलन योजना के तहत परमिट दिए थे लेकिन कुछेक मामलों को छोड़कर ज्यादातर के लिए यह योजना लागू नहीं हो पाई.
क्या बोले नेता?

पहचान पत्र देने की योजना फिर से शुरू करने को लेकर देश के रक्षा मंत्री बेनी गांत्स ने ट्विटर पर लिखा कि यह एक मानवतावादी कदम है. उन्होंने सात हफ्ते पहले ही वेस्ट बैंक के शहर रामल्लाह में फलस्तीनी नैशनल अथॉरिटी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मुलाकात की थी.

ट्वटिर पर उन्होंने कहा कि यह कदम उनकी "देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और फलस्तीनियों की जिंदगी बेहतर बनाने की कोशिशों का हिस्सा है.”

फलस्तीनी अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारी हुसैन अल-शेख ने भी इस कदम पर ट्वीट किया. उन्होंने कहा, "आज चार हजार लोगों के नामों का ऐलान किया जाएगा, जिन्होंने नागरिकता का अधिकार हासिल किया है. उन्हें फलस्तीनी पहचान के साथ-साथ अपने निवास स्थान का पता भी मिलेगा.”

वेस्ट बैंक में चार लाख 75 हजार इस्राएली यहूदी रहते हैं, जिनकी रिहायश को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता है. इस्राएल के प्रधानमंत्री ने फलस्तीनी अथॉरिटी के साथ औपचारिक शांति वार्ता की संभावना से इनकार कर दिया है.

वीके/सीके (रॉयटर्स, एएफपी)

 

ब्रिटेन जाने की ऐसी दीवानगी: ट्रकों पर छलांग लगा रहे आप्रवासी
20-Oct-2021 4:41 PM (72)

ब्रिटिश और फ्रांसीसी नेता आव्रजन संकट पर बहस कर रहे हैं. दोनों देश एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. कई आप्रवासी बेहद खतरनाक तरीकों से ब्रिटेन पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.

(dw.com)  

फ्रांस के कलै क्षेत्र में फंसे कई आप्रवासी या शरण चाहने वाले हर कीमत पर यूके पहुंचना चाहते हैं. कुछ के लिए आर्थिक संकट उन्हें सबसे खतरनाक रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रहा है, जबकि अन्य गहरे पारिवारिक या सामुदायिक संबंधों पर भरोसा करते हुए यूके की ओर रुख करना चाहते हैं. फ्रांस के अधिकारियों का कहना है कि प्रवासियों की चिंताजनक स्थिति और इंग्लिश चैनल को पार करने की खतरनाक कोशिशें लंदन सरकार के कमजोर नियमों के कारण अवैध रूप से या कानूनी दस्तावेजों के बिना ब्रिटेन जाने वाले प्रवासियों के संबंध में हैं.
यूके आकर्षक क्यों है

ब्रेक्जिट के बाद से ब्रिटेन यूरोप का एक अनूठा देश बन गया है. ब्रिटेन के कई कानून यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों से अलग हैं. इन दिनों यूरोपीय स्तर पर चर्चा के तहत कुछ सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी मुद्दों में आव्रजन का मुद्दा सबसे आगे है, खासकर अफगानिस्तान की स्थिति के संदर्भ में. इंग्लिश चैनल के दोनों तरफ के नेता एक-दूसरे पर इमिग्रेशन संकट पैदा करने का आरोप लगा रहे हैं. सबसे कठिन सवाल यह है कि इंग्लिश चैनल को पार करने और ब्रिटिश मुख्य भूमि में प्रवेश करने वाले प्रवासियों की बाढ़ को कैसे रोका जाए. पिछले कुछ महीनों में हजारों शरण चाहने वालों ने विभिन्न तरीकों और साधनों का इस्तेमाल करके यूके में प्रवेश किया है और इससे आप्रवासियों या शरण चाहने वालों के खिलाफ बयानबाजी में तेजी हुई है.

मोहम्मद और जाबेर एक ट्रक के लिए कई दिनों से इंतजार कर रहे थे कि वे उसपर सवार हो सके और किसी तरह इंग्लिश चैनल पार कर ब्रिटेन में दाखिल हो सके. वे इस वक्त फ्रांस के कलै इलाके में मौजूद हैं. उन्हें यह एहसास हुआ कि वह आज अपने अभियान में सफल हो सकते हैं. उन्होंने एक ट्रक चुना. विशेष रूप से मालवाहक ट्रक, ये वो ट्रक होते हैं जिसपर आप्रवासी चुपके से सवार हो जाते हैं और ब्रिटेन में दाखिल हो जाते हैं. कई बार वे चलते हुए ट्रक से दूसरे ट्रक पर छलांग भी लगाते हैं. अब इस तरह का जोखिम भरा काम कई और लोग कर रहे हैं.

सबसे कठिन और खतरनाक तरीके को अपनाने की हिम्मत केवल सबसे कम उम्र के और सेहतमंद आप्रवासी ही कर सकते हैं और ऐसा करने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता. मोहम्मद और जाबेर सूडानी युवक हैं. दोनों ट्रक में छिप गए. मौका पाकर एक निश्चित स्थान पर चलते ट्रक से कूदने की कोशिश कर रहे एक युवक ने दूसरे पर चिल्लाकर उसे कूदने का निर्देश दिया. ट्रक नहीं रुका यानी ड्राइवर को पता नहीं चला. कुछ ही समय बाद ट्रक चालक और ट्रक दोनों फ्रांसीसी राजमार्ग से गायब हो गए और इंग्लिश चैनल की ओर मुड़ गए. सूडानी लोगों को उम्मीद थी कि वे अपने गंतव्य ब्रिटेन तक पहुंच जाएंगे.
मोहम्मद और जाबेर दोनों अपने-अपने देशों में युद्ध से बच निकल कर आए हैं. लीबिया में पिटाई और अपहरण को सहने के बाद, उन्होंने इटली पहुंचने के प्रयास में भूमध्यसागरीय पार एक घातक यात्रा का अनुभव किया है और अब क्लै के उत्तरी फ्रांसीसी क्षेत्र में है. वहीं मोहम्मद सूडान का रहने वाला है और वह अपने देश से भाग निकला है. वह और पूर्वी अफ्रीका और मध्य पूर्व के सैकड़ों अन्य प्रवासी ट्रकों में छिपकर ब्रिटेन में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं. यह शरण चाहने वालों के लिए एक बहुत ही खतरनाक और संभावित घातक तरीका भी है.

दो तरह के आप्रवासी हैं जो यूके जाना चाहते हैं. ऐसे लोग हैं जिनके पास कुछ पैसे हैं और वे काम चलाऊ नावों में पैसे लगाने से नहीं हिचकिचाते जबकि उनकी नावें बहुत कमजोर और अस्थिर होती हैं और अपनी क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों को ले जाती हैं. प्रवासियों से भरी नावें अक्सर डूब जाती हैं या पलट जाती हैं.

दूसरी ओर आप्रवासी जिनके पास परिभ्रमण का जोखिम उठाने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, वे अंग्रेजी चैनल के आसपास के राजमार्गों पर भारी माल से लदे वाणिज्यिक ट्रकों का पीछा कर रहे हैं. जहां से चालक और उसकी आगे की सीट समाप्त होती है, ये प्रवासी किसी तरह ट्रक के पिछले हिस्से में चढ़ जाते हैं और सामान के बीच में छिप जाते हैं और उपयुक्त स्थान पर ट्रक से कूद जाते हैं. वे किसी भी कीमत पर ब्रिटेन में घुसने की कोशिश करते हैं. सिर्फ युवा और ऊर्जावान लोग ही इस खतरनाक साहसिक काम को करने का साहस करते हैं. ट्रक से कूदने की कोशिश हमेशा एक टीम या समूह के रूप में किया जाता है.

एए/सीके (एपी)

बांग्लादेश: सत्तारूढ़ अवामी लीग ने अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए निकाली रैली
20-Oct-2021 4:40 PM (67)

बांग्लादेश में साम्प्रदायिक हिंसा के एक बुरे दौर के बाद सत्तारूढ़ पार्टी अवामी लीग ने अल्पसंख्यक हिंदुओं के समर्थन में रैली निकाली है. रैली में "सांप्रदायिक हिंसा बंद करो" का नारा लगाते हुए हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए.

  (dw.com)  


बीते कुछ दिनों में मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश में हुई साम्प्रदायिक हिंसा में कम से कम छह लोग मारे गए और दर्जनों घर नष्ट कर दिए गए. पुलिस ने कहा है कि 450 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

हमले शुक्रवार 15 अक्टूबर को दक्षिणपूर्वी जिले नोआखली में शुरू हुए थे. मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों ने हिंदुओं पर कुरान से सम्बंधित ईशनिंदात्मक कार्य करने का आरोप लगाया था और उसका विरोध किया था. विरोध प्रदर्शन ही बाद में हिंसा में बदल गया. हिंदुओं के कई घरों और पवित्र स्थलों पर हमले हुए और वहां तोड़ फोड़ की गई.
अवामी लीग की अपील

इसी हिंसा के विरोध में प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी ने राजधानी ढाका में रैली का आयोजन किया. शहर के केंद्र में पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने चार किलोमीटर लंबी रैली निकाली और हिंसा को रोकने की मांग की.

कुछ महिला समर्थकों द्वारा हाथ में लिए हुए एक बैनर पर लिखा था, "इस साम्प्रदायिक दुष्टता को बंद करो, बांग्लादेश." ढाका में कुछ दूसरे इलाकों में सैकड़ों लेखक हाथों से लिखे हुए सन्देश और पोस्टर लेकर इकठ्ठा हुए. एक संदेश में लिखा था, "अपने बच्चों को प्रेम करना सिखाइए, मारना नहीं."

अवामी लीग के सांसद और संयुक्त महासचिव महबूबूल आलम हनीफ ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अगले दो सप्ताह में पूरे देश में कई रैलियां निकालने की योजना बनाई है. उन्होंने कहा, "इस भय को हटाना ही होगा." सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि दुर्गा पूजा के दौरान हुई हिंसा के संबंध में 71 मामले दर्ज किए गए हैं.
पंथनिरपेक्षता का समर्थन

संयुक्त राष्ट्र ने भी हाल ही में हुई हिंसा को रोकने की मांग की है. संयुक्त राष्ट्र की रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर मिया सेप्पो ने ट्वीट किया, "सोशल मीडिया पर हेट स्पीच की वजह से भड़के बांग्लादेश के हिंदुओं पर हाल ही में हुए हमले संविधान के मूल्यों के खिलाफ हैं और इनका रुकना जरूरी है."

मानवाधिकार समूह एम्नेस्टी इंटरनैशनल ने जांच की और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है. बांग्लादेश की करीब 17 करोड़ आबादी में लगभग 10 प्रतिशत हिंदू हैं. देश में सांप्रदायिक तनाव लंबे समय से रहा है. देश का संविधान इस्लाम को "स्टेट रिलिजन" की मान्यता देता है लेकिन पंथनिरपेक्षता के सिद्धांत का समर्थन भी करता है.

सीके/एए (रॉयटर्स)

फेसबुक अपना नाम बदल सकती हैः रिपोर्ट
20-Oct-2021 4:37 PM (82)

फेसबुक अपना नाम बदल सकती है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक द वर्ज नामक वेबसाइट ने इस बारे में खबर दी है. नया नाम छवि बदलने की कोशिश हो सकती है.

(dw.com)  

सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक इंक का नाम बदला जा सकता है. ऐसी खबरें हैं कि कंपनी अपनी छवि में बदलाव लाने के प्रयास कर रही है और इसी के तहत नया नाम रखा जा सकता है.

वेबसाइट द वर्ज ने मंगलवार को मामले से सीधे तौर पर जुड़े एक सूत्र के हवाले से यह खबर दी है. वर्ज का कहना है फेसबुक चूंकि अब मेटावर्स पर ध्यान देना चाहती है तो नया नाम उसी कड़ी का हो सकता है.

रिपोर्ट कहती है कि फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग की योजना 28 अक्टूबर को होने वाली कंपनी की सालाना कॉन्फ्रेंस में नए नाम के बारे में बात करने की योजना है. हालांकि नया नाम उससे पहले भी उजागर किया जा सकता है.

द वर्ज की रिपोर्ट कहती है कि फेसबुक की रीब्रैंडिंग के जरिए विभिन्न सोशल मीडिया ऐप जैसे इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप और ऑक्युलस आदि को एक छतरी के नीचे लाया जा सकता है.

इस बारे में जब फेसबुक से सवाल पूछा गया तो उसने कहा कि वह अटकलों या अफवाहों पर टिप्पणी नहीं करती.
छवि सुधारने की कोशिश

फेसबुक एक के बाद एक कई संकटों से जूझ रही है. हाल ही में कई बार उसकी सेवाएं कई घंटों तक ठप्प रहीं, जिस कारण उसे अरबों का नुकसान उठाना पड़ा. कंपनी के पूर्व कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे खुलासों ने भी फेसबुक की छवि को नुकसान पहुंचाया है.

पूर्व कर्मचारी फ्रांसिस हॉगेन ने कुछ दस्तावेज लीक करते हुए बताया था कि फेसबुक जानती थी कि उसकी वेबसाइट युवा लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है. इसके अलावा, कई देशों में फेसबुक के बढ़ते प्रभाव पर नियंत्रण की मांग तेज हो रही है.

पिछले महीने अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट में ऐसे संकेत दिए थे कि मेटावर्स की घोषणा के जरिए फेसबुक अपनी छवि को सुधारने की कोशिश कर सकती है. वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा था कि मेटावर्स में कंपनी की दिलचस्पी "नीति-निर्मातओं के बीच कंपनी की छवि को फिर स्थापित करने और फेसबुक को इंटरनेट तकनीकों की अगली लहर के लिए तैयार करने की कोशिशों का हिस्सा हो सकती है."
मेटावर्स पर केंद्रित भविष्य

इसी हफ्ते फेसबुक ने भविष्य के इंटरनेट ‘मेटावर्स' पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही थी. यूरोप में मेटावर्स टीम के लिए दस हजार लोगों को भर्ती का ऐलान करते हुए कंपनी ने एक ब्लॉग में लिखा था कि मेटावर्स भविष्य है.

फेसबुक ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, "मेटावर्स में रचनात्मक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर नए आयाम खोलने की संभावना है. यूरोपीय संघ के लोग इसके लिए बिल्कुल शुरुआत से तैयारी करेंगे. आज हम यूरोपीय संघ में 10,000 लोगों को भर्ती करने की योजना का ऐलान कर रहे हैं जिसे अगले 5 साल के दौरान अंजाम दिया जाएगा."

यह इस तरह की तकनीक है जिसके तहत मनुष्य डिजिटल जगत में वर्चुअली प्रवेश कर सकेगा. जानकार बताते हैं कि यह कुछ ऐसा महसूस होगा जैसे आप किसी से बात कर रहे हैं तो वह आपके सामने ही बैठा है जबकि असल में दोनों लोग इंटरनेट के जरिए मीलों दूर से जुड़े हुए हैं.

वीके/सीके (रॉयटर्स)
 

तालिबान को मलाला का खतः लड़कियों के स्कूल तुरंत खोले जाएं
20-Oct-2021 4:36 PM (58)

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने तालिबान से अफगानिस्तान में लड़कियों को तुरंत स्कूल लौटने की अनुमति देने का आह्वान किया है.

(dw.com)  

अफगानिस्तान में कट्टरपंथी इस्लामी तालिबान के सत्ता में आने के लगभग दो महीने बाद नई सरकार ने लड़कियों के माध्यमिक विद्यालय में लौटने पर रोक लगा दी है और लड़कों को कक्षा में लौटने की इजाजत है.

तालिबान ने दावा किया है कि वे सुरक्षा सुनिश्चित करने और इस्लामी कानून की व्याख्या के तहत छात्रों को सख्ती से अलग करने के बाद लड़कियों को स्कूल लौटने की अनुमति देंगे. अधिकतर लोगों को तालिबान के इस आश्वासन पर संदेह है.
तालिबान को खुला पत्र

नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई और कई अफगान महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने एक खुले पत्र में लिखा, "तालिबान अधिकारियों के लिए...लड़कियों की शिक्षा पर वास्तविक प्रतिबंध को हटा दें और लड़कियों के माध्यमिक विद्यालयों को तुरंत फिर से खोलें."

उन्होंने मुस्लिम देशों के नेताओं से तालिबान शासकों को यह स्पष्ट करने का भी आह्वान किया कि "लड़कियों को स्कूल जाने से रोकना धार्मिक रूप से उचित नहीं है."

खत पर हस्ताक्षर करने वालों में शहजाद अकबर भी शामिल थे, जो अमेरिका समर्थित पूर्व अशरफ गनी सरकार में अफगान मानवाधिकार आयोग के प्रमुख थे. तालिबान सरकार से अपील करने वालों का कहना है, "दुनिया में इस समय अफगानिस्तान अकेला ऐसा देश है जहां लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध है.''

खत पर हस्ताक्षर करने वालों ने जी20 नेताओं से अफगान बच्चों की शिक्षा परियोजना के लिए तत्काल धन उपलब्ध कराने की अपील की है. इस पत्र के साथ एक याचिका भी दाखिल की गई है जिस पर सोमवार तक 6,40,000 से अधिक हस्ताक्षर हो चुके थे.

शिक्षा में सक्रिय पाकिस्तानी छात्रा मलाला यूसुफजई को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों ने 2012 में स्वात घाटी में गोली मारकर घायल कर दिया था, जब वह स्कूल बस से घर लौट रही थी.

मलाला अब 24 साल की हो गई हैं और खासतौर पर लड़कियों को शिक्षित करने में सक्रिय हैं. इस बीच अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने मीडिया से कहा, "जहां तक ​​मुझे पता है स्कूल और विश्वविद्यालय जल्द ही खोले जाएंगे और लड़कियां और महिलाएं स्कूल जा सकेंगी और शिक्षण सेवाएं प्रदान कर सकेंगी. इजाजत दी जाएगी."

तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि अभी लड़कियों को स्कूल जाने से रोका जा रहा है क्योंकि अभी पर्यावरण सुरक्षित नहीं है.

एए/वीके (एएफपी)

गूगल ने पेश किया नया फोन पिक्सल-6
20-Oct-2021 4:34 PM (55)

गूगल ने अपना नया फोन पिक्सल 6 बाजार में उतार दिया है. स्मार्टफोन के बाजार के सबसे बड़े खिलाड़ी माने जाने वाले एप्पल और सैमसंग का मुकाबला करने की कोशिश कंपनी कई साल से कर रही है.

  डॉयचे वैले पर विवेक कुमार की रिपोर्ट

मंगलवार को गूगल ने अपना नया फोन पिक्सल 6 पेश किया. ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड पर आधारित यह फोन गूगल की स्मार्टफोन बाजार में बड़े खिलाड़ियों को टक्कर देने की नई कोशिश है.

कंपनी ने अपने नए फोन के बारे में कहा कि इसे एकदम पूरी तरह से नई सोच के साथ तैयार किया गया है. गूगल ने कहा कि यह फोन सुरक्षा, स्पीड, स्टाइल और सॉफ्टवेयर, हर लिहाज से नई सोच पर आधारित है. कंपनी के सीनियर वाइस प्रेजीडेंट रिक ऑस्टरलो ने कहा, "यह साल काफी लिहाज से अलग है.”

पिक्सल फोन को गूगल अपने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम की खूबियों को दिखाने के लिए भी इस्तेमाल करता रहा है. एंड्रॉयड एक मुफ्त मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है और जिसे दुनियाभर की फोन कंपनियां इस्तेमाल करती हैं. लेकिन खुद गूगल के एंड्रॉयड फोन अब तक बहुत ज्यादा नाम नहीं कमा पाए हैं.
क्यों कम कामयाब है पिक्सल?

विश्लेषक ब्रैड एक्यूज कहते हैं कि पिक्सल की मध्यम दर्जे की सफलता की एक वजह इसके पिछले कुछ मॉडल में पाई गईं खामियां हैं. इसके अलावा अमेरिका की मोबाइल सर्विस कंपनियां ग्राहकों को दूसरे ब्रैंड के फोन खरीदने के लिए बेहतर ऑफर देती रही हैं.

एक्यूज ने कहा, "एक क्षेत्र है जहां पिक्सल ने बेहतरीन काम किया है और वो है सॉफ्टवेयर. लेकिन और कुछ अलग देने में यह नाकाम रहा है.”

पिक्सल 6 के रूप में जो नया फोन गूगल ने बाजार में उतारा है उसमें एप्पल जैसे कुछ फीचर भी शामिल हैं. एप्पल अपने आई-फोन के जरिए महंगे फोन खरीदने वाले ग्राहकों को लुभाता रहा है लेकिन उसका सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों ही कंपनी ने अपने नियंत्रण में रखे हैं.

ऑस्टरलो कहते हैं, "हमारे पास आधुनिकतम हार्डवेयर है यानी पिक्सल और ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकता है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ऐसा अनुभव है जो अब से पहले कभी संभव नहीं था.”
कैसा है नया पिक्सल?

पिक्सल 6 के मॉडल 5जी क्षमता के साथ आए हैं. गूगल ने अपना नया टेंसर चिप भी इसमें प्रयोग किया है जो और ज्यादा क्षमता के साथ इंसान की तरह सोच सकता है. ऑस्टरलो के मुताबिक हार्डवेयर और सॉफ्वेयर का यह ऐसा मिश्रण है जो भविष्य की ‘एंबिएंट कंप्यूटिंग' की ओर एक बड़ा कदम है.

‘एंबिएंट कंप्यूटिंग' इंटरनेट का इस्तेमाल बातचीत के जरिए करने की क्षमता को कहा जाता है. 2013 की साइंस फिक्शन फिल्म ‘हर' में ऐसा ही कुछ दिखाया गया था.

पिक्सल 6 के कैमरे में कई तरह के सेंसर लगाए गए हैं. इसका बेस मॉडल 6.4 इंच का है जबकि प्रो मॉडल का साइज कुछ बड़ा है. कैमरे में त्वचा के रंग को और ज्यादा सटीकता के साथ फोटो खींचने की खासियत के अलावा ‘मैजिक इरेजर' नाम का एक फीचर भी दिया गया है जो गैरजरूरी चीजों और लोगों को फोटो से हटा सकता है.

अमेरिका में पिक्सल 6 फोन की कीमत $599 डॉलर (लगभग 45 हजार रुपये) रखी गई है जबकि पिक्सल 6 प्रो 899 डॉलर (करीब 68 हजार रुपये) में मिलेगा. गूगल का कहना है कि 28 अक्टूबर से फोन ग्राहकों को भेजना शुरू कर दिया जाएगा.
 

काबुल के नजदीक धमाका देहमाजांग चौक पर विस्फोट के बाद मची भगदड़
20-Oct-2021 2:08 PM (60)

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक धमाका हुआ है. यह धमाका देहमाजांग चौक के नजदीक हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों ने जानकारी दी है कि घटना सुबह घटी. इस घटना में कितने लोग घायल हुए हैं इस बात की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है. तुलु न्यूज के मुताबिक ब्लास्ट के बाद वहां भगदड़ मच गई. माना जा रहा है कि सुबह का वक्त होने के कारण वहां पर लोग कम संख्या में मौजूद थे. ब्लास्ट की आवाज सुनते ही लोग वहां से इधर-ऊधर भागने लगे. धमाके को लेकर अभी तक ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

धमाके वाली जगह की घरेबंदी कर दी गई है और आम लोगों को घटनास्थल के नजदीक जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. ब्लास्ट से होने वाले नुकसान का जायजा लिया जा रहा है. पुलिस की कोशिश है कि जल्द से जल्द यह पता लगा लिया जाए कि धमाके में किस संगठन के हाथ हैं.

पुलिस को अभी तक धमाके से जुड़ी कोई भी जानकारी हाथ नहीं लगी है. ब्लास्ट के बाद घटना स्थल के आसपास के इलाके को लोगों ने खाली कर दिया है. सभी लोग इस बात की जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं कि आखिर धमाके में किसका हाथ है. (abplive)