सरगुजा

41 करोड़ से तैयार हो रहा जयनगर कोल साइडिंग, काम अंतिम चरण में
23-May-2026 4:14 PM
41 करोड़ से तैयार हो रहा जयनगर  कोल साइडिंग, काम अंतिम चरण में

एक जून से रेलवे रैक के जरिए कोल डिस्पैच शुरू होने की संभावना

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

सूरजपुर, 23 मई। एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र की बंद पड़ी जयनगर कोल साइडिंग का नवीनीकरण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी 1 जून से इस साइडिंग से रेलवे रैक के माध्यम से कोयला संप्रेषण का कार्य शुरू हो जाएगा। गुरुवार को रेलवे, राइट्स एवं एसईसीएल के अधिकारियों ने जयनगर साइडिंग पहुंचकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और इसे जल्द शुरू करने की प्रतिबद्धता जताई।

गौरतलब है कि जयनगर साइडिंग वर्ष 2018 से पूरी तरह बंद पड़ी थी। अमेरा-आमगांव खदान के लिए अधिग्रहित भूमि का आधिपत्य नहीं मिल पाने तथा अन्य खदानों में कम उत्पादन के कारण यहां से रेलवे रैक  से कोयला डिस्पैच बंद हो गया था। अब अमेरा-आमगांव एवं केतकी खदान में उत्पादन बढऩे के बाद साइडिंग की आवश्यकता महसूस की गई, जिसके बाद इसके नवीनीकरण की योजना तैयार कर कार्य एजेंसी राइट्स को सौंपा गया।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी नई साइडिंग

करीब 41 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस आधुनिक कोल साइडिंग में अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसमें इन-मोशन वे-ब्रिज चलती मालगाड़ी का वजन, आधुनिक बूम बैरियर, सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा के लिए चहारदीवारी एवं विंड स्क्रीन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा रेल लाइन के दोनों ओर लगभग 750,750 मीटर लंबा फुल-लेंथ प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है।

नई साइडिंग के शुरू होने से वर्षों से बंद पड़ी जयनगर साइडिंग एक बार फिर गुलजार होगी। इससे खदानों से उत्पादित कोयले का डिस्पैच तेज होगा और देश के विभिन्न पावर प्लांटों तक आवश्यकता अनुसार कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। अभी तक बिश्रामपुर क्षेत्र का कोयला भटगांव साइडिंग भेजा जाता था, जिससे अतिरिक्त परिवहन व्यय भी बढ़ रहा था।

दो खुली और तीन भूमिगत  खदानों से हो रहा उत्पादन

बिश्रामपुर क्षेत्र में वर्तमान में दो खुली एवं तीन भूमिगत खदानें संचालित हैं। अमेरा खदान से जी-6 एवं जी-8 ग्रेड, आमगांव खदान से जी-7 ग्रेड का कोयला उत्पादन हो रहा है। वहीं भूमिगत गायत्री, रेहर एवं एमडीओ मोड में संचालित केतकी खदान से भी विभिन्न ग्रेड का कोयला निकाला जा रहा है।

साइडिंग बंद होने के कारण पिछले नौ वर्षों से पूरा कोयला सडक़ मार्ग से डिस्पैच किया जा रहा था। अब रेल मार्ग से बड़े पैमाने पर कोयला देशभर के बिजलीघरों तक भेजा जाएगा। एक रेलवे रैक के जरिए एक बार में लगभग चार हजार टन कोयले का परिवहन संभव होगा। इससे सडक़ों पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होगा।

कोयले के बढ़ते स्टॉक से मिल सकेगी राहत

जानकारी के अनुसार वर्तमान में क्षेत्र की विभिन्न खदानों में करीब साढ़े तीन लाख टन कोयले का स्टॉक जमा है। गर्मी के मौसम में लंबे समय तक कोयला पड़े रहने से आग लगने और चोरी की घटनाओं का खतरा बना रहता है। नई साइडिंग शुरू होने से कोयले का त्वरित डिस्पैच संभव हो सकेगा और प्रबंधन को राहत मिलेगी।

बताया जा रहा है कि खदानों से साइडिंग तक कोयला परिवहन एवं रैक लोडिंग के टेंडर की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। सब कुछ योजना के अनुरूप रहा तो आगामी 1 जून से जयनगर साइडिंग से कोल डिस्पैच शुरू हो जाएगा।


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