सरगुजा
कचरा प्रबंधन पर वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत शर्मा का व्याख्यान
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 19 फरवरी। छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा प्रायोजित एवं शासकीय राज मोहिनी देवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर द्वारा एक दिवसीय विज्ञान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बायोटेक्नोलॉजी विभाग के वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत शर्मा को आमंत्रित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एजेन टोप्पो के स्वागत भाषण से हुई। जीरन ज्योति गुप्ता ने विज्ञान दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके इतिहास और उद्देश्य की जानकारी दी। डॉ. सुषमा भगत ने बचपन में विज्ञान से जुड़े ‘वंडर्स ऑफ साइंस’ जैसे विषयों के अध्ययन का उल्लेख किया, जबकि डॉ. अलका जैन ने कहा कि सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक मानव जीवन विज्ञान के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विज्ञान का उपयोग मानवता की सेवा में होना चाहिए और इसे व्यवहार में अपनाना आवश्यक है।
डॉ. संजय जैन ने मुख्य वक्ता डॉ. प्रशांत शर्मा का परिचय प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में डॉ. शर्मा ने अंबिकापुर शहर में लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलआरएम) मॉडल की विस्तृत जानकारी दी और इसे स्वच्छता के क्षेत्र में एक सफल उदाहरण बताया। उन्होंने ई-बॉल और यू-बॉल पेटेंट तकनीक की भी चर्चा की।डॉ. शर्मा ने बताया कि ई-बॉल का उपयोग तालाबों की सफाई के लिए किया जाता है, जो विज्ञान के चमत्कार का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि यह ई-बॉल महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा निर्मित की जाती है, जिससे प्रति बॉल 50 पैसे का लाभ महिलाओं को मिलता है, जबकि इसकी बिक्री 2 रुपये प्रति बॉल की जाती है।
उन्होंने ऑर्गेनिक कचरे के पृथक्करण को स्वच्छता की पहली सीढ़ी बताते हुए कहा कि अंबिकापुर में अब कचरे की डंपिंग नहीं होती, जो शहर के लिए बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने बताया कि ई-बॉल कार्यक्रम के तहत धार्मिक कार्यों में भी नि:शुल्क सेवाएं दी जाती हैं और इससे कई लोग लाभान्वित हो रहे हैं। साथ ही यू-बॉल पेटेंट के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इसका उपयोग बाथरूम की दुर्गंध दूर करने में किया जा रहा है।
डॉ. शर्मा ने कचरा संग्रहण कार्य से जुड़े कर्मियों को सम्मान देने की अपील करते हुए कहा कि गर्मी में उन्हें ठंडा पानी और सर्दियों में गर्म कपड़े दिए जाने चाहिए। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि उन्हें सामाजिक कार्यक्रमों में भी आमंत्रित किया जाए और मानसिक सहयोग प्रदान किया जाए, क्योंकि शहर को स्वच्छ रखने में उनकी अहम भूमिका है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं प्राध्यापक उपस्थित रहे।


