सरगुजा
सिंहदेव बोले— योजना बहाल कर न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये की जाए
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 8 फरवरी। मनरेगा योजना में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी आंदोलन ‘मनरेगा बचाओ संघर्ष ’ के तहत पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव के नेतृत्व में उदयपुर एवं लखनपुर ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों द्वारा 11 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा निकाली गई। पदयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।
यात्रा का प्रथम चरण उदयपुर विकासखंड के ग्राम दावा से प्रारंभ होकर मनोहरपुर, विशुनपुर, मृगाडाँड़, डुमरडीह होते हुए उदयपुर में समाप्त हुआ। इस दौरान मनरेगा को बहाल करने तथा न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये निर्धारित करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन तहसीलदार उदयपुर को सौंपा गया। वहीं दूसरे चरण में लखनपुर विकासखंड के ग्राम कोसगा से ग्राम बंधा तक तीन किलोमीटर की पदयात्रा आयोजित की गई।
पदयात्रा के दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए टी.एस. सिंहदेव ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा आम लोगों को उनके निवास क्षेत्र में रोजगार की गारंटी देता था, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा योजना को कमजोर कर इसका आर्थिक भार राज्य सरकारों पर डालना ग्रामीण मजदूरों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को बेरोजगार कर कॉरपोरेट घरानों के लिए सस्ता श्रम उपलब्ध कराना है।
उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार मनरेगा को पुन: प्रभावी रूप से बहाल करे और मजदूरी की न्यूनतम दर 400 रुपये निर्धारित करें।
इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, मनरेगा बचाओ संग्राम आंदोलन के संभागीय प्रभारी जे.पी. श्रीवास्तव, जिला प्रभारी डॉ. प्रेमसाय सिंह, विक्रमादित्य सिंहदेव, ओमप्रकाश सिंह, अमित सिंहदेव सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता एवं ग्रामीण उपस्थित थे।
अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर भी जताई चिंता
मीडिया से चर्चा में टी.एस. सिंहदेव ने अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे देश के किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि 0 प्रतिशत टैरिफ के कारण अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर आ सकते हैं, जिससे घरेलू किसानों को नुकसान होगा।
उन्होंने डेयरी उत्पादों को लेकर भी आशंका जताई और कहा कि अमेरिका के कुछ डेयरी फार्म में पशुओं को विशेष प्रकार का चारा दिया जाता है, जिससे वहां का दूध ‘ब्लड मिल्क’ कहा जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।


