सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिश्रामपुर, 1 अप्रैल। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित चार नए लेबर कोड बिलों के विरोध में एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के श्रमिकों ने मंगलवार को राष्ट्रव्यापी आह्वान पर ‘काला दिवस’ मनाया। क्षेत्र के सभी संस्थानों और खदानों में कामगारों ने काला फीता बांधकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराया।
देश की 11 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के निर्देश पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में एटक, एचएमएस, सीटू और इंटक सहित विभिन्न श्रम संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। सुबह की पाली से ही श्रमिक हाथों और बाजुओं पर काला फीता बांधकर काम करते नजर आए।
इस दौरान विभिन्न खदानों में गेट मीटिंग और सभाओं का आयोजन किया गया, जहां श्रमिक नेताओं ने चारों लेबर कोड के संभावित प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन कानूनों के लागू होने से श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा कमजोर होगी, कार्य के घंटे बढ़ सकते हैं और यूनियनों के आंदोलन व हड़ताल के अधिकारों पर भी प्रतिबंध लग सकता है।
एटक यूनियन के क्षेत्रीय सचिव पंकज गर्ग ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार मजदूरों की आवाज को नजरअंदाज कर रही है और ये लेबर कोड श्रमिक हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन कानूनों को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
यूनियन प्रतिनिधियों ने बताया कि ‘काला दिवस’ केवल प्रतीकात्मक विरोध है। मांगें पूरी नहीं होने पर आने वाले समय में कोयला उद्योग में व्यापक आंदोलन और चक्का जाम की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न खदानों से बड़ी संख्या में श्रमिक और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


