सूरजपुर
ठप रही बिजली—फसलों को नुकसान से किसानों की बढ़ी चिंता
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
प्रतापपुर, 27 मार्च। शुक्रवार को शाम करीब 3.30 बजे अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी-तूफान के साथ शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने महज एक घंटे में ही प्रतापपुर क्षेत्र का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। तेज हवाओं, बिजली की कडक़ और झमाझम बारिश ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया और देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
बारिश इतनी तेज थी कि मुख्य सडक़ों से लेकर गलियों तक पानी भर गया। कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अचानक आई इस बारिश से बाजारों में भी भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और लोग दुकानों व छज्जों के नीचे शरण लेते नजर आए।
तेज आंधी के चलते कई छोटे-बड़े पेड़ उखडक़र सडक़ों पर गिर गए, जिससे रास्ते अवरुद्ध हो गए। कुछ स्थानों पर बिजली के खंभों और तारों को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। दुकानों के सामने लगे बैनर, फ्लेक्स और त्रिपाल हवा में उड़ गए, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा। कई अस्थायी ढांचे भी क्षतिग्रस्त हो गए।
इस दौरान हल्की ओलावृष्टि भी दर्ज की गई, जिसने मौसम को और अधिक विकराल बना दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि ऐसा लग रहा था मानो सब कुछ अपने साथ उड़ा ले जाएगी। अचानक आए इस तूफान ने लोगों को दहशत में डाल दिया।
बारिश और तूफान का सबसे ज्यादा असर बिजली व्यवस्था पर पड़ा। पूरे क्षेत्र में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई और लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। हल्की बारिश में ही बिजली गुल हो जाना बिजली विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों और नगरवासियों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है, लेकिन विभाग द्वारा अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
बिजली बाधित होने से लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। घरों में अंधेरा छा गया, वहीं पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई, क्योंकि मोटर पंप नहीं चल सके। इससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या उत्पन्न हो गई और लोगों में नाराजगी देखी गई।
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ा है। खेतों में लगी मौसमी सब्जियों और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। तेज हवाओं के कारण कई फसलें झुक गईं या टूट गईं, जबकि बारिश से खेतों में पानी भर गया। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि पहले से ही मौसम की अनिश्चितता के कारण खेती प्रभावित हो रही है।
बारिश के बाद मौसम में अचानक ठंडक आ गई, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली। लेकिन इसके साथ ही सर्दी-खांसी जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे सामान्य मौसमी बदलाव बता रहे हैं, तो वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे कृत्रिम बारिश से जोडक़र भी देख रहे हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुल मिलाकर, महज एक घंटे की तेज बारिश और आंधी-तूफान ने प्रतापपुर क्षेत्र की व्यवस्था को पूरी तरह हिला कर रख दिया। जनजीवन प्रभावित हुआ, किसानों को नुकसान की आशंका बनी और बिजली व्यवस्था की कमजोरियां उजागर हो गईं।


