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छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : योग दिवस और चर्चा
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : योग दिवस और चर्चा
21-Jun-2020 5:44 PM

योग दिवस और चर्चा

कोरोना की वजह से योग दिवस का कार्यक्रम सिमटकर रह गया। सरकारी आयोजन तो हुए ही नहीं, थोड़ी बहुत भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में रौनक देखने को मिली। यहां भाजपाध्यक्ष विष्णुदेव साय कुछ पुरुष-महिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ योग करते दिखे। एकात्म परिसर के समानांतर पूर्व सीएम रमन सिंह के घर पर भी योग दिवस का कार्यक्रम हुआ। यहां रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक,राजेश मूणत और भूपेन्द्र सवन्नी योग करते नजर आए।

रमन सिंह के घर से चंदकदम दूरी पर अजय चंद्राकर का भी घर है, लेकिन इस बार वे रमन सिंह के बजाए अपने घर में ही योग करते दिखे। यह बात जाहिर है कि कुछ समय पहले सरकार के खिलाफ भाजपा नेताओं का धरना प्रदर्शन हुआ था। तब अजय अपने घर में धरना देने के बजाए रमन सिंह के घर जाकर साथ ही धरने पर बैठे थे। ये बात अलग है कि उस समय प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई थी। अब सारी नियुक्तियां हो चुकी है, ऐसे में अब इधर-उधर जाने का कोई मतलब भी नहीं रह गया है। कुछ भी हो, भाजपा के योग दिवस कार्यक्रम की काफी चर्चा रही।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने योग दिवस पर अपनी योग करते तस्वीरें पोस्ट कीं, तो लोग हैरान रह गए। इस उम्र में भी वे शीर्षासन करते हैं, और रोज करते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों को देखकर लोग उन्हें देश का सबसे फिट सीएम करार देते रहे।

खबर ना मिली तो खफा !

पहली बार पीएल पुनिया चुपके-चुपके शनिवार को रायपुर पहुंचे। पीसीसी ने उनका दौरा कार्यक्रम जारी नहीं किया था। कुछ नेताओं को छोडक़र बाकियों को तो इसकी भनक भी नहीं लगी। जो चार-पांच नेता उन्हें लेने पहुंचे थे, वे भी विमानतल के बाहर अपनी कार में बैठे थे। जैसे ही पुनिया अपने पीए के साथ बाहर निकले, इन नेताओं ने कार से बाहर निकलकर औपचारिक रूप से उनका स्वागत किया और अपने साथ ले गए।

पुनिया के आने की खबर जैसे-जैसे पीसीसी के बाकी नेताओं और सरकार के मंत्रियों तक पहुंची, हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक थे कि आखिर बिना पूर्व सूचना के क्यों आए हैं? निगम-मंडल के कुछ दावेदार नेता भागदौड़ करते रहे। कुछ तो बहुत टेंशन में भी थे। वजह यह थी कि जब भी पुनिया रायपुर आते थे, वे उनका स्वागत के लिए जाते थे। मगर इस बार उन्हें पुनिया के आने की सूचना भी नहीं मिली।

 इससे खफा पीसीसी के एक नेता ने रात में काफी हंगामा मचाया। चर्चा है कि नाराज नेता ने पुनिया के एक सहयोगी को गुपचुप दौरे के लिए जमकर खरी खोटी सुनाई। वे यही नहीं रूके, उन्होंने पुनिया और अन्य बड़े नेताओं को फोन भी किया, लेकिन रात काफी हो चुकी थी, किसी ने उनके फोन का जवाब नहीं दिया। वे यह कहते भी सुने गए कि बड़े नेताओं का रवैया ऐसा ही रहा, तो छत्तीसगढ़ में भी कोई सुशांत सिंह जैसा कदम उठा सकता है।

कौन चोर कौन पुलिस?

पुलिस विभाग में अखबारों का हमेशा से खासा महत्व रहा है। पुलिस के छोटे-बड़े सभी दर्जे के कर्मचारी-अधिकारी अपनी कामयाबी की शोहरत छपवाना चाहते हैं, और कतरनों की फाईलें रखते हैं। जब किसी मुजरिम को पकड़ा जाता है, या लूट-डकैती का सामान, तस्करी का सामान बरामद होता है, तो उसके पीछे खड़े होकर पुलिस फोटो खिंचवाती है। अब ऐसे में अखबारों में कई बार दिक्कत यह आती है कि आई हुई तस्वीर में तीन अपराधी और चार पुलिसवाले एक साथ कतार में पीछे खड़े रहते हैं, और ये पुलिसवाले वर्दी में भी नहीं रहते। ऐसे में किसी होशियार सबएडिटर ने मुजरिमों के चेहरों पर गोला बनाना शुरू कर दिया ताकि पुलिस और मुजरिम का फर्क दिख जाए। लेकिन एक बार गलती से चोर का गोला पुलिस के चेहरे के इर्द-गिर्द आ गया। बवाल इतना मचा कि उसके बाद यह होशियारी दिखाना भी बंद हो गया। अब एक कतार में आधा दर्जन लोग खड़े रहते हैं, और अखबारों के पाठक खुद तय कर लें कि उसमें से कौन चोर जैसे दिख रहे हैं, और कौन पुलिस हैं।

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