राजपथ - जनपथ
कुत्ते, इंसान, और रंग
आम बोलचाल में कुत्तों को कलर ब्लाइंड मान लिया जाता है कि वे रंग नहीं देखते और सिर्फ काले-सफेद में देखते हैं। लेकिन विज्ञान का कहना है कि वे कुछ रंग देख सकते हैं। जो भी हो, राजधानी रायपुर में चौबे कॉलोनी और समता कॉलोनी के दर्जनों परिवार यह मानते हैं कि कुत्ते रंग देख सकते हैं। इससे भी आगे बढक़र वे यह मानते हैं कि बोतल में कोई रंगीन पानी भरकर चारदीवारी से बाहर टांग देने पर उसके आसपास कुत्ते आकर गंदा नहीं करते। एक महिला ने पूछने पर बताया कि यह नील का पानी है, लेकिन कुछ और घरों में लाल और पीला पानी भी टंगा हुआ था। अब पता नहीं कुत्ते ट्रैफिक सिग्नलों की तरह लाल रंग देखकर वहां फारिग होने से स्टॉप हो जाते हैं, या कोई और वजह है, लेकिन कम से कम जिस एक महिला से बात की गई उनका तो कहना है कि यह रंगीन बोतल टांगने के बाद से वहां किसी कुत्ते ने गंदा नहीं किया है।
विज्ञान के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को इस पर कुछ काम करना चाहिए कि क्या रंगीन बोतल टंगी होने से कुत्तों पर सचमुच ऐसा कोई असर पड़ता है? अभी तक हम लाल, पीला, रंगहीन या सुनहरा लिक्विड बोतल में भरा होने से इंसानों पर तो उसका खासा असर देखते आए हैं, कुत्तों पर असर एक शोध का विषय है।
शिवराज के वायदे का क्या होगा?

केन्द्रीय कृषि, और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान जब भी छत्तीसगढ़ आते हैं, तो वो यहां के नेताओं से गर्मजोशी से मिलते हैं। चौहान अविभाजित मध्यप्रदेश में भाजयुमो के अध्यक्ष थे। तब से उनका छत्तीसगढ़ आना-जाना है। चौहान की रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से घनिष्ठता है, और यहां के छोटे-बड़े नेताओं से व्यक्तिगत रूप से परिचित हैं। मगर बतौर मंत्री चौहान के विभागों से छत्तीसगढ़ को उतनी मदद नहीं मिल पा रही है, जितनी उनसे अपेक्षा रही है।
चौहान से कृषि, और ग्रामीण विकास के मद में राशि बढ़ाने का आग्रह किया जा चुका है। मनरेगा की राशि बढ़ाने की मांग की गई थी। अंबिकापुर में चौहान ने घोषणा भी की थी, लेकिन यह अब तक बढ़ नहीं पाई है। पिछले दिनों उन्होंने रायपुर में कृषि और पंचायत-ग्रामीण विभाग की समीक्षा बैठक की। यह बैठक घंटों चली। वो दुर्ग जिले के दो गांव में भी गए, और वहां ग्रामीणों से रूबरू हुए। उन्होंने ग्रामीणों से नकली खाद, और बीज की शिकायत पर कड़ा कानून बनाने की भी बात कही। कुल मिलाकर चौहान के व्यवहार से ग्रामीण खुश भी नजर आए।
कृषि, और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई प्रस्ताव उनके सामने रखे गए। चौहान ने राज्य के एक तरह से हर प्रस्ताव पर सहमति जताई, और यह कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए उनका विशेष प्रेम है। अब देखना है कि उनका दिया हुआ आश्वासन पूरा होता है या नहीं।
बजट प्रतिक्रिया धीमी-धीमी
केन्द्रीय बजट को लेकर भाजपा ने काफी तैयारी कर रखी थी, लेकिन बजट पेश होने के बाद प्रमुख नेताओं को प्रतिक्रिया देने में काफी संकोच हुआ। इसकी वजह यह थी कि छत्तीसगढ़ के लिए बजट में अलग से कुछ नहीं था।
कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में बजट भाषण का सीधा प्रसारण के लिए विशाल एलईडी लगाया गया था। यहां सीएम विष्णुदेव साय, और क्षेत्रीय महामंत्री (संगठन) अजय जम्वाल प्रमुख रूप से मौजूद थे। उनके साथ दो विधायक पुरंदर मिश्रा व सुनील सोनी भी थे। व्यापारी संगठन और अन्य वर्गों के लोगों को भी कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आमंत्रित किया था। पूरा हॉल भरा था। जैसे-जैसे बजट भाषण आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे शेयर बाजार का सेंसेक्स गिरता नजर आया। वहां लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर शेयर बाजार क्यों गिर रहा है।
छत्तीसगढ़ के लिए बजट में कुछ नहीं था, तो प्रतिक्रिया देना भी आसान नहीं था। मीडिया का जमावड़ा लगा रहा, और फिर ऐसी प्रतिक्रिया आई, जो कि हर बजट के लिए प्रासंगिक हो सकती है। व्यापारी संगठन के लोग भी थोड़ी देर खामोश रहे, और इसी बीच सभी को भोजन के लिए आमंत्रित किया गया। भोजन करने के बाद व्यापारी, और अन्य संगठनों ने केन्द्र सरकार की हल्की फुल्की तारीफ करते हुए प्रतिक्रिया दी। सभी मंत्रियों को अलग-अलग जिलों में भेजा गया था। मगर वो भी प्रतिक्रिया देने में काफी असहज दिखे।
बजट में छत्तीसगढ़ को क्या मिला?
केंद्रीय बजट में कई ऐसे प्रावधानों की घोषणा की गई है, जिसका लाभ देश के अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ को भी मिलेगा। कल बजट पेश होने के बाद प्रदेश के मंत्रियों को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वे अपने अपने इलाकों में मीडिया से बात करें और बजट की खूबियों का बखान करें। जिन विशेषताओं की तरफ इन पत्रावार्ताओं में ध्यान दिलाया गया उनमें 10 हजार करोड़ रुपये बायोफॉर्मा सेक्टर में निवेश की घोषणा, सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में टेक्सटाइल्स और केमिकल पार्क की स्थापना, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आदि मुद्दे शामिल थे। मगर, केंद्रीय बजट में खास छत्तीसगढ़ के लिए क्या है, इस सवाल का ठीक-ठीक जवाब कहीं से नहीं मिला। छत्तीसगढ़ से एकमात्र केंद्र में मंत्री तोखन साहू ने कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की मांग की थी, उस पर कोई काम नहीं हुआ। प्रदेश के सांसदों ने अपने-अपने इलाकों से जुड़ी मांगों को बजट से पहले केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करके रखा था। बस्तर में भी रेल लाइन विस्तार की मांग की गई थी। देश में सात पर्यटन कॉरिडोर की घोषणा की गई है, उनमें छत्तीसगढ़ का कोई इलाका शामिल नहीं है, जबकि बस्तर और रतनपुर इसके लिए दावेदार थे। इसकी मांग भी रखी गई।
जगदलपुर में यही सवाल उठा कि माओवादी हिंसा खत्म होने के कगार पर है। इसके लिए बस्तर के लिए कोई विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा तो हो जाती। अब तो विकास के लिए यहां भरपूर फंड की जरूरत पड़ी। यहां पत्रकार वार्ता ले रहे मंत्री केदार कश्यप और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कहा- राज्य का बजट आएगा तो आप देखेंगे कि बस्तर की ओर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय बजट में इस तरह के विशेष प्रावधान किसी क्षेत्र या राज्य के लिए नहीं होते। यह दावा कितना सही है लेकिन कांग्रेस के सांसदों ने आंकड़ों के आधार पर बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में यह आरोप लगाया है कि जिन राज्यों में आने वाले महीनों में चुनाव होने वाले हैं, उनको अधिक आवंटन किया गया है। रेल परियोजनाओं के लिए आवंटन नहीं होने पर भी बात उठी, तब इन नेताओं का कहना था कि यहां तो सडक़ और दूसरे आधारभूत संरचनाओं के लिए भी राशि की बड़ी जरूरत है। वैसे छत्तीसगढ़ को खास तौर पर क्या मिला है, यह बजट का विस्तृत अध्ययन करने के बाद पता चलेगा, तुरंत पता नहीं चलता है...। यानि यह परंपरा कायम है कि इलाके की मांगों और उम्मीदों पर खरा न उतरने के बावजूद सत्तारूढ़ दल को उसकी प्रशंसा करनी है, आलोचना बिल्कुल नहीं। और विपक्ष को हर स्थिति में बजट की खामियों को ही सामने रखना है।
कोपरा की तस्वीरें तैर रही दुनियाभर में...

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित प्रवासी पक्षियों के ठिकाने कोपरा जलाशय को रामसर साइट घोषित करने के बाद इसे सचमुच वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। राष्ट्रीय चैनल, संसद टीवी ने अपने सोशल मीडिया पेज पर इस जलाशय की कुछ तस्वीरों को अपने एक्स हैंडल पर हाल ही में शेयर किया था। एक-एक तस्वीर को हजारों-हजार लाइक्स मिले हैं। यह तस्वीर उनमें से एक है।


