राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कोरोना के जाने के बाद आएगी असली मुसीबत...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कोरोना के जाने के बाद आएगी असली मुसीबत...
03-Apr-2020

कोरोना के जाने के बाद आएगी असली मुसीबत...
कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए केन्द्र सरकार ने एक लाख 70 हजार करोड़ का पैकेज जारी किया है। छत्तीसगढ़ समेत बाकी कोरोना प्रभावित राज्य भारी भरकम राशि मिलने की उम्मीद पाले हुए हैं, मगर उनकी उम्मीदों को झटका लग सकता है। राहुल गांधी ने केन्द्र सरकार ने आर्थिक पैकेज का ब्रेकअप मांगा है, जो कि अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। सुनते हैं कि पैकेज में उन योजनाओं को शामिल किया गया है, जो कि पहले से चल रही है और इस मद में केन्द्र से धनराशि मिलती है। मसलन, मनरेगा के अलावा समाज कल्याण की योजनाएं शामिल हैं। 

जीएसटी की तारीख बढ़ाने जैसे कई फैसले से राज्य को नुकसान भी है।  जीएसटी से राज्य का हिस्सा मिलने में काफी विलंब होगा। यही नहीं, लॉक डाउन के चलते रजिस्ट्री-शराब बिक्री पर रोक से राजस्व में भारी नुकसान का अंदेशा है।सरकार ने बिजली बिल देर से पटाने जैसी कई दूसरी छूट भी दे राखी हैं। 

राज्य सरकार ने पहले से ही धान-बोनस के मद में भारी भरकम कर्ज ले रखा है और अब कोरोना की मार झेलनी पड़ रही है। कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि यदि केन्द्र ने भरपूर मदद नहीं की, तो सरकारी कर्मचारियों के वेतन के लिए भी मुश्किलें आ सकती है। पंजाब सरकार तो पहले ही कर्ज लेकर ही सरकारी अमले को तनख्वाह बांट पा रही है। 

फिलहाल तो कोरोना संकट से उबरने की कोशिश हो रही है। इसलिए इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है, राज्य सरकार पूरी तरह प्रधानमंत्री के साथ चल रही है,  लेकिन अपेक्षाकृत मदद नहीं मिलने से कोरोना संकट खत्म हो जाने के बाद देर सबेर केन्द्र और राज्य के बीच विवाद की स्थिति बन सकती है।

दारू का पैसा आएगा कहाँ से?
दारू का मामला हमेशा ही बड़ा गड़बड़ रहता है। लोग कहते हैं कि जिनको इसकी जरूरत रहती है, वे गला काटकर भी दारू पाने की कोशिश करते हैं। फिलहाल तो छत्तीसगढ़ में सरकारी दुकान में चोरी करके ईमानदार शराबियों ने महज शराब चुराई थी, वहां रखी नगदी को छुआ भी नहीं। गैरशराबी शायद ही इतने ईमानदार होते। एक आदमी दारू बेचते पकड़ाया जो अपने दोनों बेटों के साथ मिलकर दारू बेच रहा था, अब जेल में तीनों काम से काम साथ रहेंगे। छत्तीसगढ़ में दारू न मिलने पर स्पिरिट पीकर तीन लोगों के मरने की खबर है, लेकिन इलाके के पुलिस अफसर का कहना है कि उन्होंने स्पिरिट नहीं पी थी। हो सकता है न पी हो, लेकिन सरकार  अगर दुकानें शुरू करना चाहती है तो यह मामला ठीक है। दो नंबर की दारू बिक रही है, दूकान से चोरी हो रही है, और लोग कुछ और पीकर मर रहे हैं। इतनी वजहों से तो दारू फिर शुरू हो ही जाएगी। लेकिन लोगों का रोजगार बंद है, मजदूरी बंद है, तनख्वाह मिली नहीं है, तो दारू के लिए पैसा आएगा कहाँ से? जनता कंगाल और फटेहाल है, कर्ज लेगी या गहने बेचेगी? या शराबी घर से चावल चुराकर दारू खरीदेगा? बिना कमाई के हो गयी जनता के बीच दारू बेचना शराबियों के घर की दूसरी जरूरतों को बेच डालेगा। बच्चों का खाना भी हो सकता है कि दारू दूकानों के बाहर बिक जायेगा।

निगम अफसरों पर दबाव
कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते प्रभावशाली लोग अपने घर-दफ्तर को सेनेटाइज करा रहे हैं। वैसे तो लॉक डाउन के चलते सरकारी दफ्तर बंद हैं किन्तु जरूरी सेवा से जुड़े अफसर-कर्मी काम में हैं। मंत्रालय में कुछ अफसरों ने आना-जाना भी शुरू कर दिया है। इन अफसरों ने अपने कमरे में बैठने से पहले सेनेटाइज कराया। कुछ इसी तरह वार्ड पार्षदों में भी सेनेटाइज कराने की होड़ मची हुई है। सुनते हैं कि ये पार्षद अपने मोहल्ले के बजाए अपने घरों को पहले सेनेटाइज करने के लिए निगम अफसरों पर दबाव बनाए हुए हैं। कुल मिलाकर निगम के लोगों का काम पहले से ज्यादा बढ़ गया है। (rajpathjanpath@gmail.com)

 

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