सारंगढ़-बिलाईगढ़

मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल भावना नष्ट कर दी- डॉ. डहरिया
11-Jan-2026 8:14 PM
मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल भावना नष्ट कर दी- डॉ. डहरिया

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सारंगढ़, 11 जनवरी।
जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में पूर्व मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया ने प्रेसवार्ता आयोजित की।  उन्होंने कहा- मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही खत्म करके श्रमिकों से काम का अधिकार छीना है। मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह गांधी के आदशों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है।
आगे कहा- मोदी सरकार ने सुधार के नाम पर झांसा देकर लोक सभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोजग़ार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम अधिकार छीनने की जान-बूझकर की गई कोशिश है। मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फे्रमवर्क ने इसे कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है। मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण था, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है । दो दशकों से, मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफ लाइन रहा है और कोविड- 19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर ज़रूरी साबित हुआ है।
डॉ. डहरिया ने कहा कि - अब तक मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था, श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते थे । जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया,अब इसे चलाना नहीं , चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा ।  मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया । नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबर्दस्ती रोजग़ार बंद करने की इजाजत देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि - गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा। एक बार फंड खत्म हो जाने पर, या फसल के मौसम में, मज़दूरों को महीनों तक रोजग़ार से दूर रखा जा सकता है । मनरेगा केंद्रीय कानून था, 90 फीसदी राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते थे, अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60 - 40 का हो जाएगा पहले मैचिंग ग्रांट 50 फीसदी राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगा । राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है । इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी । जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी ।
मोदी सरकार अब राज्यों पर जी राम जी का लगभग 50 हजार करोड़ का बोझ डालना चाहती है, उन्हें 40 त्न  खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
मनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो कोरोना जैसे मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी । इसलिए ये बिल गरीब मजदूरों के खिलाफ है। 100 दिन से 125 दिन कीमजदूरी वाली बात सिर्फ 1 चालाकी है , वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया जा रहा है। पिछले 11 सालो में मोदी सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम देने का राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का है । मतलब 11 सालो में मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन काम नहीं दे पाई। मनरेगा काम करने का सही अधिकार था, उसे अब एक एडमिनिस्ट्रेटिव मदद में बदला जा रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है। भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर झूठ बोल रही है ।‘वीबी- जी राम जी ’ में जो जी राम जी बता रहे उसमें कही भी भगवान राम नहीं है । ‘वीबी- जी राम जी ’ का फूल फार्म है विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार व आजीविका मिशन ग्रामीण है ।
डॉ. डहरिया ने कहा कि - मनरेगा को कैसे कमजोर किया, मनरेगा में (पहले था) मोदी सरकार ने क्या बदला (जी राम जी ) हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी, अब आपके पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी । हर गांव में काम की कानूनी गारंटी मिलती थी । काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा । आप पूरे साल काम की मांग कर सकते थे । फसल कटाई के मौसम में आपको काम नहीं मिलेगा । आपको कानूनी न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी गई थी । आपकी मजदूरी सरकार अपनी मर्जी से तय करेगी । ग्राम पंचायत के जरिए अपने ही गांव के विकास के लिए काम मिलता था । अब आप कहां और क्या काम करेंगे, यह सरकार तय करेगी । आपके काम में मनरेगा मेट और रोजगार सहायकों की मदद मिलती थी अब आप को किसी मेट या रोजगार सहायक की मदद नहीं मिलेगी । आपकी मज़दूरी का 100  फीसदी भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इस लिए राज्य सरकार बिना किसी चिंता या कठिनाई के आपको काम उपलब्ध कराती थी । अब राज्य सरकारों को आपकी मजदूरी का खर्च 40 त्न हिस्सा खुद देना होगा , बचाने के लिए हो सकता है राज्य मजदूरों को काम ही न दें ?
इस अवसर पर विधायक उत्तरी जांगड़े, विधायक श्रीमती कविता प्राण लहरें, कां. जिला अध्यक्ष ताराचंद देवांगन, आलोक चंद्राकर, सूरज तिवारी, पूर्व विधायक पद्मा मनहर , सरिता मल्होत्रा, सरिता गोपाल, सोनी अजय बंजारे, घनश्याम मनहर, संजय दुबे, पुरुषोत्तम साहू के साथ अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे ।


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