सारंगढ़-बिलाईगढ़
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सारंगढ़, 3 जनवरी। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा एवं अन्नदान के महापर्व छेरछेरा के अवसर पर सारंगढ़ आंचल में समाजसेवी सतीश यादव द्वारा गरीब, जरूरतमंद एवं असहाय लोगों को भोजन के पैकेट तथा गर्म कपड़े वितरित किए गए।
इस मानवीय पहल से ठंड के मौसम में जरूरतमंदों को बड़ी राहत मिली और क्षेत्र में सामाजिक सरोकारों की एक सशक्त मिसाल प्रस्तुत हुई।
समाजसेवी सतीश यादव ने छेरछेरा महापर्व पर जरूरतमंदों की सेवा की। उन्होंने कहा कि अन्नदान और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है, और
छेरछेरा हमें आपसी सहयोग, करुणा एवं सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था मुख्यत: कृषि पर आधारित है। आज भी प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत से अधिक परिवारों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। दिन-रात परिश्रम कर किसान न केवल अपने परिवार, बल्कि समूचे समाज और चराचर जगत के पोषण में अहम भूमिका निभाता है। फसल बोने से लेकर कटाई और मिंजाई तक किसान को पशु-पक्षी, कीट-पतंग, चूहे एवं प्राकृतिक आपदाओं जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन सभी कठिनाइयों के बावजूद जब किसान अपनी फसल घर लाता है, तब उसे आत्मसंतोष की अनुभूति होती है।
इसी संतोष और सामाजिक दायित्व की भावना से प्रेरित होकर किसान अपनी उपज का एक अंश दान करता है, जिसे छेरछेरा कहा जाता है। स्वेच्छा से अन्नदान का यह महायज्ञ पौष पूर्णिमा के दिन पूरे विधि-विधान एवं उत्साह के साथ संपन्न होता है।


