राजपथ - जनपथ
सख्ती के संकेत...
सरगुजा संभाग के एक जिले में कुछ समय पहले हुए कलेक्टर के तबादले से कारोबारी वर्ग और कुछ स्थानीय नेताओं ने राहत की सांस ली थी। वजह यह थी कि पूर्व कलेक्टर जमीन कब्जे और अफरा-तफरी के मामलों में लगातार कार्रवाई कर रहे थे। मगर नए कलेक्टर ने आते ही इससे भी ज्यादा सख्त रुख अपना लिया है।
जमीन कब्जे और गड़बडिय़ों से जुड़े मामलों में तेजी से कार्रवाई शुरू होने के बाद कई प्रभावशाली लोग भी इसकी जद में आ गए हैं। इनमें सत्तारूढ़ दल से जुड़े कुछ चेहरे भी बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि प्रभावित लोगों ने स्थानीय विधायक के जरिए पार्टी के शीर्ष नेताओं तक शिकायत पहुंचाई। संगठन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने पूरी बात शांतिपूर्वक सुनी, लेकिन उसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई और तेज हो गई।
संकेत साफ माने जा रहे हैं कि अनियमितताओं को लेकर सरकार अब किसी तरह की ढिलाई के पक्ष में नहीं है। जिला प्रशासन के साथ-साथ पुलिस प्रशासन को भी कड़ाई बरतने के निर्देश बताए जा रहे हैं। एक एसएसपी को तो केवल इस वजह से नोटिस जारी होने की चर्चा है कि उन्होंने सत्ताधारी दल से जुड़े एक कारोबारी के खिलाफ कार्रवाई में नरमी दिखाई थी। आने वाले दिनों में ऐसे और कदम देखने को मिल सकते हैं।
पुलिस महकमे में बड़ी हलचल
आईपीएस के 92 बैच के अफसर अरुण देव गौतम अब पूर्णकालिक डीजीपी बन चुके हैं और अगले साल फरवरी में सेवानिवृत्त होंगे। इसके साथ ही पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कहा जा रहा है कि तबादला सूची लगभग तैयार है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शामिल होने के लिए जगदलपुर पहुंचे हैं। उनके साथ सीएम विष्णु देव साय समेत उत्तराखंड, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के सीएम भी मौजूद हैं। माना जा रहा है कि परिषद की बैठक के बाद पुलिस विभाग की सूची जारी हो सकती है।
कुछ दिन पहले ही 43 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए गए थे, जिनमें आधा दर्जन कलेक्टर भी शामिल थे। अब पीएचक्यू से लेकर जिलों के एसपी स्तर तक बदलाव की तैयारी बताई जा रही है। कुछ एसएसपी एक ही जिले में ढाई साल से पदस्थ हैं, इसलिए उन्हें नई जिम्मेदारी मिल सकती है। यही नहीं,करीब आधा दर्जन एसपी अलग-अलग कारणों से बदले जा सकते हैं। कुछ अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें भी बताई जा रही हैं।
विधानसभा चुनाव में अभी ढाई साल का समय है, लेकिन सरकार अभी से जिलों में प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाती दिख रही है। अब सबकी नजर आने वाली सूची पर टिकी है।
इधर इंतजार,उधर अगली किस्त...
प्रदेश के अभा सेवा अफसर और विद्युत कंपनी के कार्मिकों ने 2 प्रतिशत का पिछला महंगाई भत्ते एरियर्स समेत खर्च कर लिया है और राज्य प्रशासन के लोग अभी घोषणा का इंतजार ही कर रहे हैं। वैसे भी वे 26 वर्षों में 88 महीने के डीए का डेफिसिट झेल रहे हैं। और अब पांच लाख अधिकारी कर्मचारियों के जले में नमक गिरने वाला है।
बहरहाल केंद्र सरकार ने जुलाई की दूसरी किस्त घोषित करने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (एआईसीपीआई इंडेक्स) का अध्ययन शुरू कर दिया है। यह आकलन अप्रैल से होता है। दूध, सब्जी, अनाज ,पेट्रोल और रोजमर्रा की अन्य चीजों की बढ़ती कीमतों एआईसीपीआई इंडेक्स के आंकड़ों के आधार पर कर्मचारियों को अगले डीए रिवीजन में फायदा मिल सकता है।
यानी केंद्रीय अमले को यह किस्त भी 3-4 महीने की एरियर्स के साथ सितंबर अक्टूबर में मिलेगी।
वैसे तो केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है लेकिन अगले कुछ महीनों में लक्ष्मी बरसने वाली है। सरकार साल 2026 की दूसरी छमाही के डीए देगी। इस बार केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में 3 परसेंट बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो डीए बढक़र 63 परसेंट हो जाएगा। वैसे अक्टूबर में केंद्रीय कर्मियों, रेल अमले को डीए के साथ दीपावली बोनस की भी बंपर लाटरी खुलने वाली है। ऐसे में अगली छमाही बल्ले बल्ले वाली होगी।
आसमानी डायनासोर...
अचानकमार टाइगर रिजर्व केवल बाघों और पेड़ों की सघनता ही नहीं, बल्कि दुर्लभ और खूबसूरत पक्षियों की दुनिया भी है। तस्वीर में दिखाई दे रहा यह आकर्षक पक्षी रेड-नेप्ड आइबिस है। आमतौर पर इसे लाल सिर वाला काला आइबिस या काली सुंडी कहा जाता है। लंबे मुड़े हुए चोंच, चमकदार काले पंख और सिर पर लाल रंग की त्वचा इसे बेहद अलग पहचान देते हैं।
वैसे, अचानकमार के जंगल, घासभूमि और जलस्रोत इस तरह के पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय बनते जा रहे हैं। यहां हर साल बर्ड वाचिंग कैंप भी लग रहे हैं। मोर, हॉर्नबिल, ईगल, उल्लू, वुडपेकर और कई प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी पक्षी प्रेमियों को रोमांचित करती है। हाल के वर्षों में दुर्लभ इंडियन वल्चर यानी गिद्धों की संख्या में भी यहां उम्मीद जगाने वाली बढ़ोतरी देखी गई है। आसमानी डायनासोर कहे जाने वाले ये गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी माने जाते हैं और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में ये बड़ी भूमिका निभाते हैं।
ये मौसम यानि, बरसात से पहले और गर्मियों के अंतिम दिनों में अचानकमार पक्षियों की गतिविधियों को करीब से देखने का सबसे खूबसूरत समय होता है। जंगल की नमी, पेड़ों की हरियाली और पक्षियों की चहचहाहट यहां आने वालों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाती है। (तस्वीर अनुभव शर्मा द्वारा खींची गई और सोशल मीडिया पर साझा की गई है।)
मोहब्बत छोडक़र सामान ले गया चोर..
अंबिकापुर के कांग्रेस दफ्तर में छत के रास्ते से चोर घुसा और उसने दो-चार नहीं, लोहे के कुल 73 सामान उखाड़े और अपने साथ ले गया। इनमें नल, फ्लश सिस्टम, वॉश बेसिन आदि शामिल थे। कांग्रेस दफ्तर में कुछ जरूरी दस्तावेज रहे होंगे, जिनमें चोर की दिलचस्पी नहीं रही होगी। रुपये-गहने ढूंढने की कोशिश भी शायद उसने नहीं की होगी, क्योंकि वह यहां तीसरी बार घुसा था। जी हां, यह तीसरी चोरी थी। और तीसरी बार सफलतापूर्वक चोरी संपन्न हो जाने की खुशी में वह एक पर्चा भी वहां छोडक़र गया, जिसमें लिखा था- आई लव अंबिकापुर। यानी, अंबिकापुर से मोहब्बत है।
शायद पुलिस उसे अब तक पकड़ नहीं पाई है, इसलिए वह खुश होगा। दो बार चोरियां हो जाने के बावजूद कांग्रेस भवन में सुरक्षा व्यवस्था कुछ नहीं थी, इस बात ने भी उसे प्रभावित किया होगा। सबसे बड़ी बात, उसे पता था कि भवन में 73 की संख्या में ऐसे सामान बाथरूम और टॉयलेट में लगे हैं, जिन्हें वह कबाड़ में बेच सकता है। चोरी गए सामान की कीमत पार्टी के लोगों ने करीब 80 हजार रुपये बताई है।
वैसे, नशे के चंगुल में फंसे लोग प्राय: लोहे का सामान ही चुराते हैं। इसे कबाडिय़ों के पास आसानी से खपाया जा सकता है। चोर, मोहब्बत का इजहार करते हुए पर्चा छोड़ गया और सामान कबाड़ी की दुकान ले गया। सिस्टम पर उसका भरोसा बना हुआ है।


