राजपथ - जनपथ
मुजरिमों से सहमी पार्टी
दुर्ग जिले के समोदा गांव में सामने आए अफीम खेती कांड ने सत्ताधारी भाजपा के भीतर हलचल बढ़ा दी है। मामले में आरोपी बनाए गए विनायक ताम्रकार की गिरफ्तारी के बाद पार्टी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विनायक ताम्रकार भाजपा के राइस मिल प्रकल्प सेल के जिला संयोजक थे।
अफीम की खेती के खुलासे के बाद भाजपा को राजनीतिक तौर पर काफी असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है और प्रदेश के कई हिस्सों में भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। हालांकि विनायक ताम्रकार ने अपनी सफाई में कहा है कि उन्होंने अपनी जमीन राजस्थान के कुछ लोगों को भुट्टे की खेती के लिए किराए पर दी थी और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वहां क्या उगाया जा रहा है।
मामले के सामने आने के बाद भाजपा के भीतर भी मंथन शुरू हो गया है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि विनायक ताम्रकार को संगठन में पद दिलाने की सिफारिश किसने की थी।
पार्टी के कुछ नेता तिल्दा की एक पुरानी घटना को भी याद कर रहे हैं। करीब दो साल पहले एक कारोबारी को भाजपा में शामिल कराया गया था और पार्टी के कई प्रमुख नेता उसके घर भी पहुंचे थे। बाद में वही कारोबारी सट्टा किंग के रूप में चर्चित हो गया। हालांकि उस मामले ने ज्यादा तूल नहीं पकड़ा, क्योंकि उसके कांग्रेस के नेताओं से भी संबंध बताए जाते रहे हैं और वह पहले पार्षद भी रह चुका है।
इधर भाजपा में विभिन्न मोर्चा-प्रकोष्ठों में पदाधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए पार्टी ने प्रदेश के संयोजकों को सतर्क रहने की सलाह दी है, ताकि किसी विवादित पृष्ठभूमि वाले चेहरे को संगठन में जिम्मेदारी न मिल जाए।
हेलीकॉप्टर का इंतजार
प्रदेशवासियों को अपने द्वार पर प्रशासन के आने का कुछ इंतजार करना होगा। सरकार का सुशासन तिहार इस वर्ष कुछ देर से होने के संकेत हैं। बीते दो वर्षों में यह अभियान बजट सत्र के बाद अप्रैल मध्य से लेकर मई में होते रहे हैं जब मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री विधायक और अफसर गांव-गांव जाकर जन समस्या सुलझाने के साथ उनकी मांग पर सडक़ बिजली, स्कूल कालेज की सौगात देते हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर को देखना भी ग्रामीणों के लिए अद्भुत अनुभव होता है। इस बार इसके लिए लोगों को पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने का इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि इन चुनावों में प्रचार के लिए सीएम मंत्री विधायकों की ड्यूटी लगने जा रही है। जो प्रचार थमने के बाद ही वापस लौटेंगे। यह ड्यूटी कब से लगेगी इसका खुलासा 27-28 मार्च के आसपास होगा जब आयोग चुनाव घोषणा करेगा। उसके बाद ही इस बहुप्रतीक्षित अभियान की रूपरेखा सामने आएगी। वैसे इन चुनावों के लिए प्रदेश के 30 आईएएस आईपीएस अधिकारी भी पर्यवेक्षक के तौर पर जा रहे हैं। इनमें कई विभागों के सचिव भी शामिल हैं। उनकी आयोग में एक दौर की ट्रेनिंग भी हो चुकी है। बहरहाल भरी गर्मी में इस अभियान में काम के प्रति लापरवाह, ढिलाई बरतने वाले और जन असंतोष से निलंबन की गाज से झुलसने वालों को कुछ राहत मिल सकती है।



