राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा का चुनाव
08-Mar-2026 6:37 PM
राजपथ-जनपथ : राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा का चुनाव

राज्यसभा के लिए लक्ष्मी वर्मा का चुनाव

राज्यसभा प्रत्याशी घोषित होते ही लक्ष्मी वर्मा ने राज्य महिला आयोग के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया, और उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर भी कर लिया गया। लक्ष्मी वर्मा प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष हैं और करीब 32 साल से संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाती रही हैं। खमतराई के एक वार्ड से पार्षद बनकर उन्होंने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी और अब वे राज्यसभा पहुंचने जा रही हैं।

कुछ महीने पहले उन्होंने महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। लक्ष्मी वर्मा और उनके सहयोगी बाकी दो सदस्य आयोग की सुनवाई में हिस्सा नहीं ले रहे थे। उन्होंने राज्यपाल रामेन डेका से भी किरणमयी नायक की शिकायत की थी। करीब डेढ़-दो महीने तक लक्ष्मी और अन्य सदस्य आयोग की गतिविधियों से दूर रहे। उम्मीद थी कि किरणमयी नायक को अध्यक्ष पद से हटाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाद में लक्ष्मी वर्मा और अन्य सदस्य फिर से सुनवाई में आने लगे।

चर्चा है कि आयोग में चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव ने पहल की थी। बताया जाता है कि किरणमयी नायक ने भी विवाद सुलझाने के लिए उनसे मदद मांगी थी। किरणमयी नायक और किरण देव दोनों एक समय नगर निगम के मेयर रह चुके हैं। वर्ष 2009 में किरणमयी रायपुर और किरण देव जगदलपुर के मेयर निर्वाचित हुए थे। अलग-अलग दलों में रहने के बावजूद दोनों के बीच अच्छे संबंध बताए जाते हैं। किरण देव ने लक्ष्मी वर्मा और अन्य सदस्यों से चर्चा की, जिसके बाद मामला सुलझ गया।

लक्ष्मी वर्मा भाजपा के भीतर अनुशासित और सुलझी हुई नेत्री मानी जाती हैं। जब वे रायपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं, तब उनका नाम बलौदाबाजार विधानसभा सीट के पैनल में था, लेकिन उस समय पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस के हस्तक्षेप से उनकी जगह लक्ष्मी बघेल को प्रत्याशी बनाया गया। इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में भी उनकी टिकट कट गई। लोकसभा चुनाव में भी टिकट मिलते-मिलते रह गया और अंतिम समय में उनकी जगह बृजमोहन अग्रवाल को प्रत्याशी बना दिया गया। कई बार अवसर छूटने के बाद अब पार्टी ने उन्हें सीधे राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। देर से ही सही, लक्ष्मी वर्मा को आखिरकार सदन में जाने का मौका मिल गया।

सूबे की सियासत में दो ‘लक्ष्मी’

छत्तीसगढ़ की सियासत में दो ‘लक्ष्मी’ की जमकर चर्चा हो रही है। राज्यसभा के लिए रायपुर की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी वर्मा को उच्च सदन में भेजने के लिए नामांकित किया गया है। वहीं सरकार में मंत्रिमंडल की सदस्य लक्ष्मी राजवाड़े पहले से ही सत्ता के गलियारों में चर्चित नाम है। खास बात यह है कि भाजपा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के खास और उत्साहित मौके पर लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा के लिए चुनकर महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है। लक्ष्मी राजवाड़े महिला बाल विकास मंत्री के तौर पर  काम कर रही है, हालांकि उनके क्षेत्र के लोगों में प्रशासनिक कामकाज में उनके पति की बढ़ती दखल की काफी चर्चा है। इससे परे कांग्रेस ने फूलोदेवी नेताम को दोबारा राज्यसभा भेजने का निर्णय लेकर भाजपा की महिलावादी पसंद को टक्कर दी है।

भाजपा में लक्ष्मी वर्मा और लक्ष्मी राजवाड़े भाजपा संगठन और सरकार के बीच चर्चा की केंद्र बिन्दु में रहेंगी।

निर्दलीय ने मचाया हडक़ंप

राज्यसभा चुनाव में नामांकन दाखिले के आखिरी दिन एक चौंकाने वाली खबर भी सामने आई। तेलंगाना निवासी के. सयन्ना ने चुपचाप नामांकन दाखिल कर दिया। सयन्ना हैदराबाद के पास मेडचल के निवासी बताए जाते हैं, लेकिन उन्होंने नामांकन फार्म अधूरा ही भर दिया था। प्रस्तावक और समर्थक के बिना ही फार्म जमा कर दिया गया था।

निर्वाचन अधिकारी ने जब फार्म की जांच की तो पाया कि न तो प्रस्तावक-समर्थक हैं और न ही अमानत राशि जमा की गई है। ऐसे में फार्म तुरंत निरस्त कर दिया गया। बताया जाता है कि सयन्ना ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सबसे पहले नामांकन दाखिल किया था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण वह मान्य नहीं हो सका।

सयन्ना कौन हैं और वे यहां नामांकन दाखिल करने क्यों पहुंचे थे, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम के नामांकन सही पाए गए हैं। दोनों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है और उन्हें जल्द ही निर्वाचन प्रमाण पत्र दिए जाने के संकेत हैं।

पुराने नेताओं का नया ठिकाना बन पाएगा

होली पर घर जाने से पहले पुराने भाजपाइयों का इंडियन कॉफी हाउस में जमावड़ा हुआ। इनमें रायपुर बस्तर, सरगुजा और कुछ राजनांदगांव के भी रहे।  सभी ने अपनी पुरानी यादें  ताजा की। इसी बीच काफी के चुस्कियों के साथ एक ही चर्चा की  कि पार्टी बहुत बदल चुकी है। सीनियर लोगों को लगभग किनारे कर दिया गया है और जिन्होंने संघर्ष देखा ही नहीं, किया ही नहीं, वह निगम-मंडल, आयोग-प्राधिकरण और संगठन में प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक काबिज हो चुके हैं। अब तो किनारे हो जाना ही ठीक है।  वैसे तो किनारे कर ही दिए गए हैं।

राजनांदगांव के एक सीनियर नेता ने सुझाव दिया कि  पूर्व स्पीकर गौरी शंकर अग्रवाल और प्रेम प्रकाश पांडे से  मिला जाए। इसमें उनसे अनुरोध किया जाए कि मुफ्त में उन्हें दिया गया बंगले को कार्यालय बना दें। ताकि 33 जिलों से आने वाले सीनियर कार्यकर्ताओं के रूकने और आपसी मेल मिलाप के साथ चर्चा करने में सुविधा हो सके और आज की स्थितियों की चर्चा कर  हल्का महसूस कर सके।

बस्तर और सरगुजा संभाग के नेताओं ने भी इसका समर्थन किया। इसी दौरान बताया गया कि सरकार ने कानून बना दिया कि पूर्व विधानसभा अध्यक्षों को  मुफ्त में सरकारी बंगला, क्लर्क देगी और दोनों लोगों को राजधानी में बंगला मिल भी चुका है।  चूंकि वह भी लगभग किनारे किए जा चुके हैं, इसलिए वे इनकी मन स्थिति को आसानी से समझ सकेंगे। उनके सहमत होते ही जनसंघ से लेकर भाजपा तक तन-मन-धन और समर्पण की भावना से संघर्ष कर केंद्र और राज्य में सरकार बनाने में सहयोग कर चुके नेता कार्यकर्ताओं को नया ठिकाना मिल जाएगा। जैसे की वामपंथी पार्टियों के सांसदों-विधायकों को राजधानियों में जो बंगले मिलते हैं, उनमें उन्हें एक-दो कमरे देकर पार्टी बाकी बंगले का पार्टी के लिए इस्तेमाल तय करती है।

बता दें कि ऐसे लोगों को पार्टी दिल्ली से लेकर रायपुर तक मार्गदर्शक मंडल में सूचीबद्ध कर चुकी है और साल में एक दिन भाजपा स्थापना दिवस पर शाल श्रीफल भेंट कर उनके संघर्षों को याद अवश्य करती है। अब यह चर्चा कब होगी, यह आने वाले समय पर ही पता चलेगा।


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