राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : दस सीटों पर ओपी की परीक्षा
06-Mar-2026 5:54 PM
राजपथ-जनपथ : दस सीटों पर ओपी की परीक्षा

दस सीटों पर ओपी की परीक्षा

छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी लगातार असम में भाजपा के चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं। हिमंता बिस्वा सरमा के राज्य में ओपी को 10 सीटों की जिम्मेदारी दी गई है। हर दिन उन्हें दर्जनों लोग असमी-दुपट्टा पहनाकर उनका स्वागत करते रहते हैं, और कई दिनों से उनके फेसबुक पेज पर छत्तीसगढ़ की बजाय असम की ही तस्वीरें छाई हुई हैं। एक आईएएस अफसर रहे हुए ओपी चौधरी असम की इन 10 सीटों पर कैसा नतीजा लाते हैं, इस पर भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं की भी नजरें टिकी हैं, और छत्तीसगढ़ के नेताओं की नजरें तो ओपी चौधरी पर टिकी ही रहती हैं, चाहे वे भाजपा नेता हों, चाहे कांग्रेस नेता। फिलहाल वे विधानसभा सत्र के लिए 10 तारीख को एक दिन के लिए आ रहे हैं। अगर उन्हें वहां 11 सीटों की जिम्मेदारी मिलतीं, तो क्या वे 11 को यहां आते?

रणनीति के बीच तय हुआ निर्विरोध

प्रदेश की दो राज्यसभा सीटों पर आखिरकार निर्विरोध चुनाव की तस्वीर साफ हो गई। भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी नेताम का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय हो गया है। गुरुवार को नामांकन के आखिरी दिन इन दोनों के अलावा किसी और ने पर्चा दाखिल नहीं किया। हालांकि प्रदेश भाजपा महामंत्री नवीन मारकंडेय ने नामांकन फार्म जरूर खरीदा था, लेकिन उसे जमा नहीं किया। दिलचस्प यह रहा कि उनके सिर्फ फार्म लेने भर से ही कांग्रेस खेमे में हलचल मच गई।

भाजपा ने तो महिला आयोग की सदस्य लक्ष्मी वर्मा को पहले ही प्रत्याशी घोषित कर दिया था, लेकिन कांग्रेस में उम्मीदवार तय करने को लेकर काफी खींचतान चलती रही। बुधवार रात पीसीसी के वरिष्ठ नेताओं को यह संकेत मिल गया था कि फूलोदेवी नेताम का नाम तय हो चुका है, मगर औपचारिक घोषणा नामांकन के आखिरी दिन सुबह की गई।

दरअसल कांग्रेस के भीतर ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ का विवाद चल रहा था। भाजपा के रणनीतिकार कांग्रेस की हलचल पर पैनी नजर रखे हुए थे। रणनीति के तहत ही नवीन मारकंडेय को फार्म लेने के लिए कहा गया था। चर्चा है कि संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप के साथ वे फार्म लेने पहुंचे थे। केदार कश्यप ने लक्ष्मी वर्मा के लिए और मारकंडेय ने अपने नाम से फार्म लिया।

रणनीति यह थी कि अगर कांग्रेस प्रदेश से बाहर के किसी नेता को उम्मीदवार बनाती, तो मारकंडेय मैदान में उतर सकते थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने फार्म लिया, कांग्रेस रणनीतिकार चौकन्ने हो गए। यह भी चर्चा रही कि अगर बाहरी प्रत्याशी उतारा जाता, तो कुछ कांग्रेस विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते थे।

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, और कुछ अन्य नेताओं ने यह पूरी रणनीति कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचा दी। इसके बाद हाईकमान ने जोखिम लेने के बजाय स्थानीय भावनाओं को ध्यान में रखते हुए फूलोदेवी नेताम को फिर से मैदान में उतारने का फैसला लिया। फूलोदेवी नेताम के नामांकन के बाद भाजपा ने भी नवीन मारकंडेय को फार्म भरने से रोक दिया। इस तरह दोनों उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया।

दिल्ली में खींचतान, अंत में स्थानीय

कांग्रेस में राज्यसभा टिकट को लेकर दिल्ली तक खींचतान चली। एआईसीसी के कई बड़े नेता छत्तीसगढ़ से राज्यसभा जाने के इच्छुक बताए जा रहे थे। चर्चा है कि पार्टी के कुछ केंद्रीय नेता मीडिया विभाग के प्रभारी पवन खेड़ा को छत्तीसगढ़ से राज्यसभा भेजने के पक्ष में थे, लेकिन प्रदेश के कई नेताओं ने इसका विरोध किया।

अंतिम दौर में मामला दो नामों पर सिमट गया पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव और फूलोदेवी नेताम। चर्चा है कि सिंहदेव ने खुद राज्यसभा को लेकर अनिच्छा जताई थी। उनकी प्राथमिकता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने की बताई जाती है, और पार्टी नेतृत्व भी इससे अवगत है।

ऐसे में अंतत: फूलोदेवी नेताम को दोबारा मौका देने का फैसला हुआ। हालांकि इस बीच पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेंद्र साहू, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और डॉ. शिवकुमार डहरिया भी दिल्ली में डेरा डालकर अपने-अपने स्तर पर कोशिशें करते रहे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की संभावनाओं को लेकर भी अटकलें थीं।

अंत में भाजपा द्वारा महिला प्रत्याशी उतारे जाने को देखते हुए कांग्रेस ने भी महिला चेहरा उतारने की रणनीति अपनाई और फूलोदेवी नेताम पर मुहर लगा दी।

नए नियम में बदला चुनाव फार्मूला

राज्यसभा चुनाव को लेकर इस बार विधानसभा में एक दिलचस्प प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला। चुनाव आयोग ने विधानसभा के संचालक मनीष शर्मा को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया है। आमतौर पर राज्यों में राज्यसभा चुनाव के लिए विधानसभा सचिव ही चुनाव अधिकारी बनाए जाते रहे हैं।

दरअसल चुनाव आयोग ने हाल के वर्षों में एक नया नियम लागू किया है। इसके अनुसार विधानसभा सचिव को तभी चुनाव अधिकारी बनाया जाएगा, जब उनकी सेवा में कम से कम दो वर्ष का समय शेष हो। यदि सचिव का रिटायरमेंट नजदीक हो, तो किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाती है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में सचिव दिनेश शर्मा पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उन्हें एक साल का एक्सटेंशन मिला हुआ है। ऐसे में चुनाव आयोग ने वरिष्ठ अधिकारी मनीष शर्मा को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया है, जबकि दिनेश त्रिवेदी को सहायक चुनाव अधिकारी बनाया गया है।

दोनों अधिकारियों ने अब तक चुनाव की पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया है। अब नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद औपचारिक रूप से निर्वाचन की घोषणा ही बाकी रह गई।


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