राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : घायल गिद्ध की लंबी उड़ान, तकनीक से बची जान
25-Jan-2026 6:35 PM
राजपथ-जनपथ : घायल गिद्ध की लंबी उड़ान, तकनीक से बची जान

घायल गिद्ध की लंबी उड़ान, तकनीक से बची जान

एक दुर्लभ सफेद-पीठ वाला घायल गिद्ध महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व से उड़ान भरकर करीब 400 किलोमीटर का सफर तय करता हुआ छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तक पहुंच गया। जीपीएस और दुर्गम गांवों में पहुंच चुके मोबाइल नेटवर्क के चलते उसकी जान बचा ली गई है।

इंडागांव बफर रेंज के कंदासार बीट में पैदल गश्त के दौरान एक वनकर्मी की नजर कमजोर हालत में पड़े इस गिद्ध पर पड़ी। उसने फोन करके अपने अफसरों को इसकी जानकारी दी। जांच में सामने आया कि पक्षी गंभीर रूप से निर्जलीकरण या बीमारी से जूझ रहा था, जिससे वह उड़ नहीं पा रहा था। सूचना पर पक्षी विशेषज्ञों तक पहुंची। उनकी सलाह पर गिद्ध को पानी और कृत्रिम आहार दिया गया और सावधानीपूर्वक जंगल से बाहर लाया गया। इसके बाद रायपुर से पशु चिकित्सकों की टीम पहुंची और गिद्ध को रेस्क्यू केज में रखकर नवा रायपुर जंगल सफारी ले जाया गया। फिलहाल वहां उसका इलाज चल रहा है और स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। इलाज के बाद इस गिद्ध को फिर से सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। यह मामला बताता है कि तकनीक, वनकर्मियों की सतर्कता और ग्रामीणों की जागरूकता मिलकर कैसे विलुप्तप्राय प्रजातियों की जान बचा सकती है।

बंगाल में एक मिनी छत्तीसगढ़

प्रदेश भाजपा के दो प्रमुख नेता, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, और पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा को पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों ही नेता एक बैठक में शामिल हो चुके हैं, और 27 तारीख को फिर कोलकाता के लिए रवाना हो जाएंगे। इससे परे प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय को बंगाल की 50 सीटों का प्रभारी बनाया गया है।

पवन साय पिछले तीन माह से बंगाल में डटे हैं। वो बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटे हैं। बंगाल में अप्रैल में विधानसभा चुनाव संभावित है। इसको ध्यान में रखते हुए कुछ और नेताओं को प्रचार के लिए भेजा जा सकता है। छत्तीसगढ़ के प्रभारी नितिन नबीन, राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से बंगाल चुनाव को लेकर लगातार बैठक कर रहे हैं।

नबीन अपने गृहराज्य बिहार के अलावा छत्तीसगढ़ के नेताओं की कार्यक्षमता से परिचित हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के नेताओं को चुनाव प्रबंधन में लगाया जा रहा है। चर्चा है कि डिप्टी सीएम विजय शर्मा को भी प्रचार की जिम्मेदारी दी जा रही है। नबीन, चुनाव प्रबंधन में लगे नेताओं से व्यक्तिगत रूप से संपर्क में हैं। छत्तीसगढ़ के करीब 50 नेताओं की सूची तैयार की जा रही है, जो आने वाले दिनों में बंगाल कूच करेंगे।

धान बोने में नहीं, बेचने में पसीने आ गए

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी 31 जनवरी  तक चलनी है। अब अंतिम चरण में पहुंचते हुए किसानों के लिए एक बड़ा संकट बन गई है। जगह-जगह से आ रही शिकायतें बताती हैं कि लाखों किसान अपना धान बेचने के लिए टोकन नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। सरकार का दावा है कि खरीदी पारदर्शी और सुचारू है, लेकिन सरगुजा के राजपुर जैसी कई जगहों पर किसान सडक़ों पर उतर आए हैं, और कोरबा में तो एक ने आत्मघाती कदम तक उठाया। बुजुर्ग किसान, जो मोबाइल नहीं चला पाते या जिनके पास मोबाइल है ही नहीं वे विशेष रूप से प्रभावित हुए। सरकार ने एग्री स्टैक पंजीयन की तारीख 15 जनवरी तक बढ़ाई, लेकिन वन अधिकार पत्र वाले किसानों का धान अब भी नहीं बिक रहा है। रायपुर सहित कई जिलों में धान खरीदी केंद्रों पर टोकन बंद होने से किसान भटक रहे हैं। घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करने के नाम पर उठाव रुक गया है। कोडागांव में भी किसानों ने हाईवे जाम किया, जबकि रायपुर की खाओनी समिति में किसानों ने अधिकारियों से झड़प की। तरह-तरह के दस्तावेजों और बार-बार सत्यापन से किसान थक चुके हैं।

कांकेर जिले में प्रशासन ने 30 और 31 जनवरी को खरीदी न होने का निर्देश जारी किया, और इन तारीखों के टोकन वाले किसानों को 29 जनवरी तक धान बेचने को कह दिया गया है। अचानक लिए गए इस फैसले से खरीदी केंद्रों पर भारी दबाव पड़ेगा। आशंका है कि कई किसान छूट जाएंगे।

ताजा आंकड़े के मुताबिक राज्य में 22 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों में से 20 प्रतिशत लोग अभी तक धान नहीं बेच पाए हैं। बचे हुए चार दिन में क्या उनका पूरा धान बिक पाएगा? ज्यादा खेती वाले किसानों को तीसरा टोकन नहीं दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि सब ठीक चल रहा है। 105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। सरकार फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सत्यापन जैसी सतर्कता की बात कर रही है। हजारों क्विंटल धान भी जब्त किए जा चुके हैं। पर हकीकत यह है बार्डर पर 1000, 500 रुपये में गाडिय़ां पार कराई जा रही हैं।

अफसरों के फेरबदल के आगे-पीछे

आईपीएस के दर्जनभर से अधिक अफसर पदोन्नत हुए हैं। इन सभी को  एक जनवरी से पदोन्नति दी गई है। पदोन्नति पाने वालों में डॉ. आनंद छाबड़ा, और प्रशांत अग्रवाल व मिलना कुर्रे प्रमुख हैं। छाबड़ा को एडीजी, और प्रशांत के अलावा मिलना कुर्रे को आईजी के पद पर पदोन्नति दी गई है।

पदोन्नति को लेकर पिछले कुछ समय से उठा पटक चल रही थी। दो बैठक टल भी गई। कुछ अफसर, ईडी और ईओडब्ल्यू-एसीबी के जांच के घेरे में भी थे। मगर जांच पदोन्नति की राह में रोड़ा नहीं बन पाई। सिर्फ डीआईजी पारुल माथुर पदोन्नति से रह गई। उनके खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश हो चुकी है। इस वजह से उन्हें पदोन्नति नहीं दी जा सकी। बाकी अफसरों को पदोन्नति मिल गई।

एसएसपी स्तर के आठ अफसर डीआईजी के पद पर पदोन्नत हुए हैं। फिलहाल शशिमोहन सिंह को छोडक़र बाकी को यथावत रखा गया है। शशि मोहन सिंह को जशपुर से रायगढ़ एसएसपी बनाया गया। पिछले कुछ समय से रायगढ़ जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति बदतर रही है। लिहाजा, शशि मोहन पर चुनौती से निपटने की जिम्मेदारी है। इन सबके बावजूद पुलिस में अगले कुछ दिनों में एक बड़ा फेरबदल हो सकता है। देखना है कि आगे क्या होता है।


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