राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : धर्मांतरण कानून पर हलचल
12-Mar-2026 6:29 PM
राजपथ-जनपथ : धर्मांतरण कानून पर हलचल

धर्मांतरण कानून पर हलचल

छत्तीसगढ़ सरकार भी धर्मांतरण के खिलाफ नया कानून बनाने जा रही है। इस सिलसिले में कैबिनेट ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। माना जा रहा है कि यह विधेयक विधानसभा सत्र के आखिरी दिन पेश किया जा सकता है। दिलचस्प यह है कि जहां राज्य में नया धर्मांतरण कानून लाने की तैयारी चल रही है, वहीं कानून बनने से पहले ही इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से सरकारों को नोटिस जारी हो चुका है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ समेत करीब एक दर्जन राज्यों को नोटिस जारी किया है। इन राज्यों में पहले से धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं। कोर्ट ने सभी राज्यों से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। इस मामले की सुनवाई तीन जजों की पीठ इस माह के अंत में करेगी।

छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां अवैध धर्मांतरण के खिलाफ कानून अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से प्रभावी रहा है। राज्य बनने के बाद भी वही व्यवस्था जारी रही, लेकिन अब सरकार नया कानून लाने की तैयारी में है। चर्चा है कि प्रस्तावित कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों में एक से 10 साल तक की सजा का प्रावधान रखा जा सकता है।

अगर दूसरे राज्यों से तुलना करें तो उत्तर प्रदेश का धर्मांतरण कानून सबसे सख्त माना जाता है, जिसमें गंभीर मामलों में 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में इन कानूनों को भेदभाव को बढ़ावा देने वाला बताया गया है। ऐसे में साफ है कि धर्मांतरण कानून का मुद्दा आने वाले दिनों में अदालत और राजनीति—दोनों जगह हलचल पैदा करता रहेगा।

डेपुटेशन पालिसी बदली, छत्तीसगढ़ ग्रुप 2 में

केंद्र ने आईएएस आईपीएस आईएफएस अधिकारियों के  कैडर आबंटन और प्रतिनियुक्ति सिस्टम में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव  किया है। यह बदलाव 2026 यूपीएससी बैच से लागू हो जाएगा। इसके जानकार अफसरों ने यहां बताया कि अब तक  के पांच-ज़ोन सिस्टम को चार नए ग्रुप से बदल दिया गया है: (1) नॉर्थ (जेएंडके, हिमाचल, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड); (2) ईस्ट (यूपी, बिहार, वेस्ट बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़); (3) वेस्ट और सेंट्रल (एमपी, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा); और (4) साउथ और नॉर्थ-ईस्ट (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, और नॉर्थ-ईस्ट राज्य)। इसका मकसद कैडर की पसंद को बैलेंस करना और खाली जगहों को भरना है। दक्षिणी राज्य (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, ओडिशा) अब ग्रुप 2 और 4 में आते हैं, जिससे इंटर-स्टेट डेप्युटेशन बढ़ सकते हैं। यह पॉलिसी 2026  बैच से पूरी तरह लागू होगी।

 तैयारी के साथ उतरे गजेन्द्र...

स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों और कथित गड़बडिय़ों को लेकर विधानसभा में कई सवाल उठे, लेकिन मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपेक्षाकृत मजबूती से उनका सामना किया। मंत्री बनने के बाद पहली बार वे इस तरह विस्तार से सदन में सवालों का जवाब दे रहे थे, और उन्होंने लगभग हर मुद्दे पर तथ्यात्मक जवाब देकर विपक्ष के हमलों को काफी हद तक निष्प्रभावी कर दिया।

जंबूरी कार्यक्रम के खर्च और टेंडर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने उन्हें घेरने की कोशिश जरूर की। इस मुद्दे पर उनकी अपनी पार्टी के सांसद बृजमोहन अग्रवाल पहले से ही सवाल उठा चुके हैं और स्काउट्स एंड गाइड्स के चेयरमैन पद पर यादव की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। ऐसे में सदन में यह मुद्दा उनके लिए असहज हो सकता था।

विपक्ष के पास घेरने का मौका भी था और सवाल भी खूब हुए, लेकिन गजेन्द्र यादव पूरी तैयारी के साथ आए थे। उन्होंने तथ्यों के साथ जवाब दिए और कई मामलों में पहले से ही जांच बैठाए जाने की जानकारी भी दी, खासकर समग्र शिक्षा मद से हुई खरीदी को लेकर।

हालांकि विपक्ष उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं हुआ और अंतत: वाकआउट कर दिया, लेकिन सदन की कार्यवाही में गजेन्द्र यादव का प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत माना गया। कई वरिष्ठ मंत्रियों की तुलना में उन्होंने मुद्दों को अधिक व्यवस्थित ढंग से रखा और विपक्ष की घेराबंदी को काफी हद तक संभाल लिया।


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