राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : सत्र स्थगित मंत्री चुनाव में बिजी
02-Mar-2026 6:27 PM
राजपथ-जनपथ : सत्र स्थगित मंत्री चुनाव में बिजी

सत्र स्थगित मंत्री चुनाव में बिजी

विधानसभा के बजट सत्र के बीच सियासत और संगठन दोनों मोर्चों पर सक्रियता तेज हो गई है। सत्र 9 तारीख तक स्थगित है, लेकिन इस बीच सरकार के कई मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता असम  और पश्चिम बंगाल में चुनावी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल बजट सत्र शुरू होने के बाद से ही पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रबंधन में जुटे हुए हैं। वे होली अवकाश के बाद 9 तारीख से सदन की कार्रवाई में हिस्सा लेंगे।

डिप्टी सीएम अरुण साव तीन दिन असम में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाकर लौटे हैं। वहीं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बजट पेश करने और आय-व्यय पर सामान्य चर्चा के बाद चार दिन के लिए असम का दौरा किया। साव और चौधरी दोनों को विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस बीच भाजपा की वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री रेणुका सिंह भी सदन की कार्रवाई से दूर हैं। भरतपुर-सोनहत क्षेत्र में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान उनका पैर फैक्चर हो गया, जिसके कारण वे बजट सत्र में शामिल नहीं हो पा रही हैं।

कहा जा रहा  है कि बजट सत्र के बीच सत्ता पक्ष के कई चेहरे संगठनात्मक रणनीति में व्यस्त हैं, जिससे विपक्ष को सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का भरपूर मौका मिल सकता है।

ड्रग्स तस्करी मामला फिर चर्चा में

विधानसभा में रायपुर के चर्चित ड्रग्स तस्करी कांड का मुद्दा उठा, लेकिन उस पर विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तथाकथित ‘ड्रग्स क्वीन’ नव्या मलिक को लेकर जानकारी मांगी थी।

पिछले सितंबर रायपुर में ड्रग्स रैकेट का खुलासा हुआ था। आरोपी हर्ष आहूजा समेत इंटीरियर डिजाइनर नव्या मलिक और विधि अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में दिल्ली, मुंबई और पंजाब से जुड़े बड़े नेटवर्क की चर्चा सामने आई, हालांकि सीमित गिरफ्तारियों के कारण कार्रवाई पर सवाल भी उठ रहे हैं। चर्चाओं के अनुसार, कथित तौर पर सैकड़ों प्रभावशाली लोगों से पूछताछ हुई। विपक्ष का आरोप है कि कई प्रभावशाली नाम बच निकले। हालांकि पुलिस की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत सूची सार्वजनिक नहीं की गई है।

मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बनी हुई है और संकेत हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा फिर विधानसभा में गूंज सकता है। अब देखना होगा कि बजट सत्र के शेष दिनों में सरकार संगठनात्मक व्यस्तताओं के साथ-साथ इन संवेदनशील मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है।

अद्भुत समाज सेवा

राजधानी के सरोना संत रविदास वार्ड में विकास की अद्भुत त्रिमूर्ति खड़ी है—एक साथ बने तीन एक-कमरे वाले सामुदायिक भवन। पहले पर लिखा है सोनकर समाज सामुदायिक भवन, दूसरे पर विश्वकर्मा झरिया समाज, तीसरे पर झेरिया साहू समाज। देखने से लगता है जैसे एक ही सांचे में ढालकर तीनों को साथ-साथ खड़ा कर दिया गया हो—बस नाम बदल गए, आकार वही।

कमरे इतने विशाल हैं कि बैठक हो तो आधे लोग बाहर लोकतंत्र की धूप सेंकें। बारात रुकने की कल्पना भी साहस मांगती है—दूल्हा अंदर, बाराती सडक़ पर सामुदायिक समरसता का प्रदर्शन करें। उपयोगिता पूछना विकास की भावना पर प्रश्न उठाना माना जा सकता है। आखिर एक एक  कमरे में कितना सामुदायिक समा सकता है?

कहने वाले कहते हैं, तीनों को मिलाकर एक बड़ा, सचमुच उपयोगी भवन बन जाता तो सभी समाज कार्यक्रम कर लेते। पर तब तीन शिलान्यास कैसे होते? तीन पट्टिकाएं कैसे चमकतीं? और सबसे महत्वपूर्ण—तीन बार हमने बनवाया कैसे कहा जाता या जाएगा?

दूरदर्शिता भी कम नहीं—आज कमरा, कल शेड, परसों बाउंड्री; भविष्य में विस्तार की संभावनाएं खुली हैं। जमीन भी सुरक्षित, पहचान भी , और उपलब्धि भी सुरक्षित। आखिर संदेश साफ है—हमने बनाया है, हम ही बाँटेंगे।


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