राजपथ - जनपथ
नए यूनिफार्म पर गर्व
छत्तीसगढ़ कैडर 2013 बैच के आईपीएस जितेन्द्र शुक्ला की एक तस्वीर सोशल मीडिया में नए यूनिफार्म पहने वायरल हो रही है। हाल ही में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में एनएसजी ज्वाईन करने वाले युवा आईपीएस जितेन्द्र शुक्ला ने दिल्ली में आमद दे दी है। बीते सोमवार को उन्होंने छत्तीसगढ़ से दिल्ली जाकर एनएसजी के मुख्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। एनएसजी ने उन्हें ग्रुप कमांडर के पद पर काम करने का दायित्व सौंपा है। ग्रुप कमांडर का काम नेशनल थ्रेट से निपटने और आतंकी हमलों का जवाब देने के लिए सैनिकों को तैयार करना है। देश की सुरक्षा से जुड़े उपायों को लेकर भी एनएसजी के ग्रुप कमांडर न सिर्फ स्वयं को बल्कि अपने अधीनस्थ सिपाहियों को आधुनिक तकनीक के साथ लडऩे के लिए तैयार करते हैं।
जितेन्द्र की छत्तीसगढ़ पुलिस में एक ईमानदार अफसर की साख रही है। वह सीधे और साफ तरीके से काम करने में रूचि रखते हैं, इसलिए वह राजनीतिक रूप से फायदा लेने वाले जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों को सटीक जवाब देने के लिए भी जाने जाते हैं। इससे परे शुक्ला के बैचमेट मोहित गर्ग का भी दिल्ली रूख करने की खबरें आ रही है। मोहित ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के लिए अप्लाई किया है, जल्द ही उन्हें भी क्लियरेंस मिलने की आईपीएस बिरादरी में चर्चा है।
होटल और बाबा
राजधानी रायपुर के तेलीबांधा रोड स्थित आलीशान होटल के सौदे की काफी चर्चा हो रही है।
यह सौदा करीब 97 करोड़ में होने का दावा किया जा रहा है, और कांग्रेस से जुड़े लोग एक 'बाबा’ की हिस्सेदारी होने का दावा कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर होटल के सौदे को लेकर काफी कुछ लिखा जा रहा है। होटल के कथित सौदे में 'बाबा’ की हिस्सेदारी है या नहीं, यह साफ नहीं है। 'बाबा' निशाना बनाने एक वजह यह बताई जा रही है कि उन्होंने पूर्व सीएम भूपेश बघेल पर तीखा बयान दिया था। इसके बाद से कांग्रेस नेता उन्हें निशाने बना रहे हैं। इसके अलावा भूमाफिया से बाबा का घरोबा भी ऐसी चर्चाओं को हवा देता है।
दूसरी तरफ, इस होटल का सौदा पहले भी हो चुका है। होटल के मालिक बदलते गए हैं। कुछ साल पहले कांग्रेस के एक ताकतवर नेता ने इस होटल को खरीदने में रुचि दिखाई थी। नेताजी राजधानी में स्थाई ठिकाना चाहते थे। मगर उनसे जुड़े कुछ लोगों ने होटल के आसपास ट्रैफिक आदि से जुड़ी दिक्कतें गिनाई, इसके बाद वो पीछे हट गए। कुल मिलाकर होटल एक फिर चर्चा में है।
विदेशी ब्रांड में स्वदेशी संकल्प
रायपुर में युवा दिवस के अवसर पर राज्य युवा आयोग की ओर से स्वदेशी संकल्प दौड़ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मंत्री टंकराम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और युवाओं के साथ दौड़ लगाकर उन्हें राष्ट्रप्रेम, स्वदेशी भावना और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया। मंच से दिया गया उनका उद्बोधन देशभक्ति से भरा था, लेकिन कार्यक्रम के बाद चर्चा किसी भाषण की नहीं, बल्कि मंत्री के पहनावे की होने लगी।
दौड़ के लिहाज से टी-शर्ट पहनना स्वाभाविक था और मंत्री भी उसी अनुरूप परिधान में नजर आए। लेकिन उनकी टी-शर्ट पर अंग्रेजी में लिखा एक शब्द- जीएपी, सोशल मीडिया पर बहस की वजह बन गया। दरअसल, गैप एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है, जिसका मुख्यालय अमेरिका में है। हालांकि, इसका उत्पादन भारत समेत एशिया के कई देशों में होता है और यह रायपुर के स्टोर्स व ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध है, लेकिन ब्रांड विदेशी होने के कारण आलोचकों को मौका मिल गया।
सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा जा रहा है कि स्वदेशी का संकल्प दिलाने पहुंचे मंत्री खुद विदेशी ब्रांड की टी-शर्ट पहनकर आए थे। यदि मंच से स्वदेशी अपनाने की अपील की जा रही थी, तो किसी देसी ब्रांड का चयन भी किया जा सकता था।
कुछ नामों पर पेंच, बाक़ी भी टले
प्रदेश के आईपीएस अफसरों की पदोन्नति को लेकर माथापच्ची चल रही है। इस सिलसिले दो बाद मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक हो चुकी है। कुछ अफसरों की प्रस्ताव पर पेंच है। यही वजह है कि पदोन्नति लिस्ट फाइनल नहीं हो पाई है।
ताजा जानकारी यह है कि अगले हफ्ते विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक है। चर्चा है कि जो अफसर जांच के घेरे में आए थे, भले ही उनके खिलाफ आरोपपत्र जारी नहीं हुए हैं,उन सभी की पदोन्नति रोकी जा सकती है।
बताते हैं कि करीब दर्जनभर से अधिक अफसरों को पदोन्नति दी जाएगी। इनमें डीआईजी और आईजी के पद पर पदोन्नति का प्रस्ताव है। सभी को एक जनवरी से पदोन्नति दी जाएगी।
मंत्री के एकाउंट का वीडियो फेक?
वन मंत्री केदार कश्यप ने फेसबुक और अपने कुछ अन्य सोशल मीडिया पेज पर कल एक वीडियो क्लिप शेयर की और एक पंक्ति में बताया कि बारसुर मार्ग पर तेंदुआ का शानदार दृश्य। वीडियो जारी होने के बाद उनके ही विभाग के अधिकारियों ने दावा किया कि यह फेक वीडियो है। यह तस्वीर बारसुर की नहीं है। वास्तव में कहां से ली गई है, इसका पता लगाया जा रहा है। एक अफसर का यह भी कहना है कि जानबूझकर इस तरह के वीडियो डालकर भ्रम फैलाए जाते हैं। हालांकि उन्होंने मंत्री पर कोई आरोप नहीं लगाया, लेकिन दावे पर वे कायम हैं कि वीडियो बारसूर इलाके का नहीं है। मंत्री कश्यप ने भी सिर्फ एक लाइन लिखी। कब देखा गया, किसने वीडियो बनाई, आसपास के गांवों में कोई दहशत का माहौल तो नहीं है। सडक़ पर बैठा तेंदुआ भी सुरक्षित है नहीं- जैसे विवरण हैं ही नहीं। हैरानी की बात है कि इन पंक्तियों के लिखे जाने तक यह वीडियो सोशल मीडिया से मंत्री ने हटाया नहीं है। शायद वे वन अफसरों की बात से इत्तेफाक नहीं रखते, जो बता रहे हैं कि वीडियो बारसूर का नहीं है। मंत्री केदार कश्यप के ही एकाउंट से सोशल मीडिया पर एक खबर कुछ दिन पहले चली थी, जिसमें बाघ को रेस्क्यू करने का जिक्र था। वह वीडियो भी फेक ही निकला। अब दूसरा मौका है जब मंत्री पर फेक वीडियो डालने का आरोप लग रहा है।


