राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : राज्यपाल की सख्ती से सन्नाटा
25-Dec-2024 4:18 PM
राजपथ-जनपथ : राज्यपाल की सख्ती से सन्नाटा

राज्यपाल की सख्ती से सन्नाटा

राज्यपाल रामेन डेका उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर गंभीर हैं। पिछले दिनों निजी विश्वविद्यालयों की बैठक में उन्होंने तेवर भी दिखाए, और उन्होंने गड़बड़ी पर सख्त हिदायत दी है।

हुआ यूं कि बैठक में उच्च शिक्षा के साथ-साथ निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के प्रमुख भी थे। बैठक में बारी-बारी से सभी निजी विश्वविद्यालयों को प्रजेन्टेशन देना था। मगर राज्यपाल ने एजेंडा ही बदल दिया, और आयोग से निजी विश्वविद्यालयों की गतिविधियों के बारे में जानकारी चाही।

आयोग की तरफ से हरेक विश्वविद्यालय की खामियां बताई गई। उच्च शिक्षा विभाग की भी कुछ इसी तरह की राय थी। फिर क्या था, राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों को जमकर फटकार लगाई, और समय सीमा के भीतर खामियों को दूर करने की नसीहत दी। राज्यपाल के तेवर से निजी विश्वविद्यालय प्रबंधन हड़बड़ाए हुए हैं, सन्नाटा छा गया है। देखना है आगे क्या कुछ होता है।

मंडल अध्यक्ष चुनाव नहीं लड़ सकेंगे

भाजपा में मंडल अध्यक्ष चुनावों की खींचतान पूरे प्रदेश में चल रही है । पार्टी कार्यालयों में तालेबंदी, कुर्सियां तोडऩे और विधायकों का विरोध चरम पर है। विधायक अपने खास समर्थकों को बिठाना चाहते हैं और वे संगठन से इन नामों पर सहमति ले चुके हैं। दूसरी ओर कार्यकर्ता अपने बीच से  अध्यक्ष चाहते हैं । इसी टसल में तनातनी उंगली उठाने तक बढ़ चली है?  तो कई वर्तमान अध्यक्ष संगठन नेतृत्व के कहने के बाद भी दोबारा नहीं बनना चाहते। उन्हें अब चुनाव जीतकर कुछ  कमाना चाहते  है, कब तक दरियां बिछाते रहेंगे। उन्हें खबर लग गई है कि पार्टी ने इस बार पार्षद, जनपद अध्यक्ष या अन्य पदों के लिए टिकट वितरण क्राइटीरिया तय कर लिया है। इसके मुताबिक संगठन के पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्ष तक को पार्षद चुनाव नहीं लड़ाएगी। पार्टी इन्हें अब तक देती रही है । इसके बाद तो कई वर्तमान मंडल अध्यक्षों के कदम ठिठक गए हैं। अब यह देखना होगा कि कितने नए अध्यक्ष, क्राइटीरिया से इतर जाकर टिकट हासिल करने में सफल हो पाते हैं।

विधायकों की अपनी रणनीति

निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर एक अलग ही धार बह रही है । संगठन एक एक वार्ड-ग्राम पंचायत जीतने बिसात बिछा रहा है। तो बहुसंख्य विधायकों की अलग ही रणनीति है। वे अपने अपने विधानसभा क्षेत्र में आने वाले वार्डों में एक दो अपने और बाकी वार्डों में विपक्षी पार्षद चाहते हैं। ऐसा ही ग्रामीण क्षेत्र के विधायकों की भी है । वे जनपदों में विपक्षी अध्यक्ष चाहते हैं ।  यह सुखद है कि उन्हें महापौर तो अपनी ही पार्टी का ही चाहिए। सीधे चुनाव होने से महापौर की जीत में उन्हे कोई शंका भी नहीं है। महापौर अपने,  पर पार्षद विपक्षी अधिक क्यों? इस पर चर्चा की तो खुलासा हुआ। दरअसल सभी विधायक वर्ष 28 के लिए अपनी राह आसान कर लेना चाहते हैं । उनका कहना है कि विपक्षी पार्षद अधिक रहेंगे तो ही उन पर ठीकरा फोडक़र वोट मांग सकेंगे कि कांग्रेस के पार्षद ने काम नहीं किया। भाजपा का चुनते तो पार्षद विधायक, महापौर और सरकार भाजपा के  होने से वार्ड में विकास होता। इसके लिए विधायक, पार्षद टिकट वितरण में भी ज्यादा रूचि न ले तो कोई आश्चर्य नहीं है, संगठन जिसे दे उसका भला,जिसे न दे तो अपना भला। अब देखना यह है कि कितने विधायकों के क्षेत्र में कितने भाजपा के पार्षद चुनकर आते हैं। वैसे वर्तमान की बात करें तो राजधानी शहर के दक्षिण में 20 में से 8, पश्चिम के 20 में से 10, उत्तर में 6, ग्रामीण में 5 पार्षद भाजपा हैं । अगले नतीजे आने पर विधायकों की इस रणनीति का खुलासा हो जाएगा।

उद्घाटन का इंतजार..

कोई निर्माण कार्य सरकारी हो तो उसका उद्घाटन किसी मंत्री नेता से कराये बिना जनता को समर्पित नहीं किया जा सकता। चित्रकोट जल प्रपात में स्थापित सोलर लाइट का यही हाल है। निर्माण करीब दो साल पहले पूरा हो चुका है। चार करोड़ की लागत से बने इस विशाल संरचना के जरिये शाम के समय लेजर शो दिखाने की योजना है। पर अब तक इसका उद्घाटन नहीं हुआ है। इसके चलते पर्यटकों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। क्रेडा का यह निर्माण कार्य है, उद्घाटन के लिए उसे अतिथि क्यों नहीं मिल रहे यह भी एक सवाल है। बस्तर में ही कई नेता हैं, मंत्री हैं, किसी से भी कराया जा सकता है।  

क्रिसमस का बाजार फीका 

प्रदेश का ईसाई समुदाय बड़े दिन को बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। क्रिसमस की असली धूम और सांस्कृतिक उल्लास का अनुभव करना हो तो कुनकुरी जरूर जाना चाहिए। यह स्थान न केवल एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च 'महागिरजाघर' के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि जशपुर जिले में ईसाई धर्म की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी है। हर साल, क्रिसमस से 10 दिन पहले यहां एक बड़ा मेला लगता है, जिसमें जशपुर, रायगढ़, रांची और अन्य जगहों से व्यापारी अपनी दुकानें सजाते हैं।

इस साल व्यापारियों को बाजार से निराशा हाथ लगी। पहले जहां लाखों की बिक्री आम बात थी, इस बार स्थिति बेहद खराब रही। व्यापारियों के अनुसार, खरीदारी इतनी कम हुई कि 23 और 24 दिसंबर जैसे व्यस्त दिनों में भी दुकानों पर भीड़ नहीं दिखी।

दूसरी तरफ, कुनकुरी और आसपास के क्षेत्रों में बीते डेढ़ महीने से ईसाई समुदाय के भीतर एक अलग तरह का असंतोष है। भाजपा विधायक रायमुनि भगत के एक कथित विवादास्पद बयान ने समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। इस बयान के विरोध में ईसाई समुदाय ने विशाल मानव श्रृंखला और रैली का आयोजन किया, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए। उनकी मांग है कि विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

कुछ धर्मावलंबियों ने इस बार क्रिसमस पर नया सामान खरीदने से इनकार कर दिया। उन्होंने सादगी से त्योहार मनाने का निर्णय लिया। नए कपड़ों और अन्य सजावटी सामानों की खरीदारी भी नहीं की। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस फैसले का सीधा संबंध विधायक के बयान से है, लेकिन दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं।

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