राजपथ - जनपथ
अब सब चुनाव एक सरीखे
चिकित्सकों की एक प्रतिष्ठित संस्था के चुनाव को लेकर पिछले दिनों आम लोगों में भी काफी उत्सुकता देखी गई। वजह यह है कि संस्था के पदाधिकारी नामचीन चिकित्सक चुने जाते रहे हैं, और उनकी राय को सरकार भी अहमियत देती रही है। मगर इस बार चुनाव में ऐसा कुछ हुआ, जिसकी काफी चर्चा हो रही है।
संस्था में एक ऐसे चिकित्सक चुन लिए गए, जो कि कभी एक केस में तीन माह जेल की सलाखों के पीछे रहे हैं। उनके आदत-व्यवहार को लेकर भी शिकायतें होती रही हैं। खास बात यह है कि चुनाव में नवनिर्वाचित मुखिया ने जिसको हराया है, उसकी साख बहुत अच्छी है। और जब चुनाव नतीजे आए तो इस हार को लेकर जानकार लोग हैरान रह गए। एक बात तो साफ है कि अब प्रतिष्ठित संस्थाओं के चुनाव भी आम चुनावों की तरह हो गए हैं जहां दागियों को भी महत्व मिल जाता है।
विधायकों की राय
भाजपा के संगठन चुनाव में इस बार काफी कुछ बदलाव देखने को मिला है। पार्टी ने उन विधायकों की राय को नजरअंदाज किया है जिनके खिलाफ शिकायतें होती रही हैं। मसलन, सरगुजा जिले की तीन विधानसभा क्षेत्रों के मंडलों में दो विधायकों की राय को तवज्जो नहीं मिली।
अंबिकापुर के छह मंडल में स्थानीय विधायक एक ही मंडल में अपने समर्थक को अध्यक्ष बनाने में कामयाब हो पाए। बाकी मंडलों में स्थानीय अन्य प्रमुख नेताओं की राय को महत्व दिया गया। यही हाल, सीतापुर का भी रहा। वहां भी स्थानीय विधायक एक ही मंडल में अपनी पसंद का अध्यक्ष बनवा पाए। इससे परे लुण्ड्रा में स्थानीय विधायक प्रबोध मिंज की राय को भरपूर महत्व दिया गया। लुण्ड्रा इलाके के सभी मंडलों में प्रबोध मिंज के समर्थकों का दबदबा रहा। बाकी जगहों पर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। संकेत साफ है कि निकाय और पंचायत चुनाव के प्रत्याशी चयन में पार्टी उन्हीं विधायकों की राय को महत्व देगी जिनकी साख अच्छी है। देखना है आगे क्या कुछ होता है।
घर वापिसी होगी या नहीं?
कांग्रेस में निलंबित-निष्कासित नेताओं की वापिसी पर विचार चल रहा है। इन सबके बीच रामानुजगंज के पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह की कांग्रेस में वापिसी होगी या नहीं, इसको लेकर काफी उत्सुकता है। बृहस्पति सिंह ने सार्वजनिक तौर पर पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस.सिंहदेव से माफी मांग ली है।
बृहस्पति सिंह ने सिंहदेव और तत्कालीन कांग्रेस प्रभारी सैलजा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पार्टी के कई लोग मानते हैं कि माफी मांगने के बाद बृहस्पति सिंह की पार्टी में वापिसी हो सकती है, लेकिन जो लोग सिंहदेव को करीब से जानते हैं वो मानते हैं कि सिंहदेव किसी भी दशा में बृहस्पति सिंह की पार्टी में वापिसी के लिए सहमत नहींं होंगे। अब पार्टी उनकी राय को नजरअंदाज कर बृहस्पति सिंह को पार्टी में वापस लेती है तो बात अलग है। ऐसे में सिंहदेव की प्रतिक्रिया क्या होगी, यह देखना है।
कुल मिलाकर आने वाले दिनों में कांग्रेस में काफी उठापटक देखने को मिल सकती है।
बुनियादी शिक्षा का हाल सुधरेगा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में नो डिटेंशन पॉलिसी को समाप्त करने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ के संबंध में यह बड़ा महत्वपूर्ण फैसला है, जहां प्राथमिक शिक्षा का स्तर ‘असर’ के मुताबिक बहुत नीचे- 27वें स्थान पर है। प्राय: देखा गया है कि प्रशासनिक अधिकारी स्कूलों में दौरा करते हैं। क्लास लगाते हैं, बच्चों- शिक्षकों को फटकार लगाकर लौट जाते हैं। अब इस नीति के तहत अब कक्षा 5 और 8 की वार्षिक परीक्षा में विफल होने वाले छात्रों को सीधे उत्तीर्ण नहीं किया जाएगा, दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। यदि वे दूसरी बार भी असफल होते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा। केंद्र संचालित शिक्षण संस्थान नवोदय, केंद्रीय विद्यालय में यह लागू कर दिया गया है, पर शिक्षा राज्य का विषय है, लाखों विद्यार्थियों वाले राज्य के स्कूलों पर फैसला राज्य सरकार को लेना होगा।
पुरानी नीति, जिसमें बच्चों को बिना परीक्षा उत्तीर्ण किए प्रमोट किया जाता था, शिक्षा में समानता लाने का प्रयास तो था, लेकिन इसके गंभीर और चिंताजनक परिणाम सामने आए। ‘असर’ को बच्चों में बुनियादी कौशल, जैसे गिनती, पहाड़े, पढऩे और लिखने की क्षमताओं की कमी देखने को मिली। यह पाया गया कि शिक्षक खुद भी इन बच्चों को पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं लेते क्योंकि उन्हें पता है कि बच्चे तो उत्तीर्ण ही किए जाएंगे। शिक्षकों की यह मांग भी है कि उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए, तब बच्चों पर ध्यान दे पाएंगे।
बुनियादी शिक्षा बच्चों के मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास का आधार है। यह उन्हें केवल अक्षर और अंक सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें तर्कशक्ति, संवाद और समस्या-समाधान जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल भी प्रदान करती है। गणित, भाषा और विज्ञान का प्रारंभिक ज्ञान ही बच्चों को आगे की शिक्षा और चुनौतियों के लिए तैयार करता है। जब बच्चे इन विषयों में दक्ष होते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, जो उनके भविष्य की नींव मजबूत करता है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार की पॉलिसी का अनुसरण करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार कोई फैसला लेती है या नहीं।
ब्रांडेड चिरपोटी पताल..

छत्तीसगढ़ की आम बाडिय़ों में वैसे हाइब्रिड टमाटर व्यवसाय के लिए वर्षों से उगाये जा रहे हैं। यह ज्यादा दिन टिकता है और इसकी ट्रांसपोर्टिंग भी हो जाती है। पर चिरपोटी पताल की महिमा अलग ही है। यह टमाटर आकार में छोटे होते हैं, मगर ज्यादा टिकाऊ नहीं होते। लोकल किसान शहरों में इसे बेचने आते हैं, पर ज्यादातर खुद के खाने के लिए लगाते हैं। मिर्च, लहसुन, अदरक के साथ इसकी जो चटनी बनती है, उसका कोई मुकाबला नहीं। अब यह चिरपोटी पताल महानगरों में चेरी टोमेटो के नाम से पैकिंग के साथ बिक रहा है। पता नहीं इसे कई दिनों तक सहेजकर रखने का उपाय क्या है, पर मुंबई में यह उपलब्ध है। 13 पीस के 50 रुपये।


