राजपथ - जनपथ
पुरानी कमाई का दम
सरकार के एक विभाग के चार सहायक आयुक्तों ने, अपने एक साहब को हटाने हटवाने के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया है । इनमें एक रायपुर, एक बिलासपुर एक राजनांगांव में पदस्थ रहे। और ये चारों तीन हजार करोड़ के एक घोटाले की चार्ज शीट में नामजद हैं। और इनके किंगपिन तो जेल में है। इन चारों ने इसमें, पिछली सरकार के समय हुए घोटाले से कमाई, पूरी जमा पूंजी भी झोंक दी हैं। और ऐसे लोग सालभर से इस गोरख धंधे में आई कसावट पर सेंध लगाने एड़ी चोटी लगा रहे हैं। क्योंकि 10-11 महीने से इन्हें घर केवल तनख्वाह से चलाना पड़ रहा है। लाखों की उपरी कमाई जो बंद है। क्या करें बेचारे उडऩदस्ते में भेज दिए गए थे। जिले की कमान से बाहर कर लूप लाइन में बिठा दिए गए हैं । पूरा कारोबार आनलाइन हो गया सो अलग। सरकारी इंकम के लीकेज के लिए कहीं भी लूप होल नहीं है। अब तो दबंग डिस्टलरीज पर भी जुर्माना होने लगा है। ऐसे में ये लोग अपने दिन बदलने, सरकार के दिन खराब करने जुट गए हैं।
कहा यह जा रहा कि चारों सफल हुए तो एक बार फिर नदियां बहेंगी। दुकानों में एक बार फिर से दो-दो सेल रजिस्टर रहेंगे। अंग्रेज़ी का अवैध कारोबार कराएंगे।
एक्सटेंशन या 92 को अवसर
राज्य सरकार ने डीजीपी के चयन के लिए तीन नामों का पैनल केन्द्र सरकार को भेजा है। इनमें 92 बैच के आईपीएस अफसर अरूण देव गौतम, पवन देव, और 94 बैच के अफसर हिमांशु गुप्ता के नाम हैं। यह भी संयोग है कि देश के पांच राज्य नागालैंड, मेघालय, पंजाब, तेलंगाना, और जम्मू-कश्मीर में भी 92 बैच के अफसर डीजीपी हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ में इस बैच के अफसर के डीजीपी बनने का अंदाजा लगाया जा रहा है।
हालांकि कुछ जानकार मौजूदा डीजीपी अशोक जुनेजा को एक्सटेंशन मिलने की संभावना भी जता रहे हैं। जुनेजा को रिटायरमेंट के बाद छह माह का एक्सटेंशन मिला हुआ है। नियमानुसार केन्द्र सरकार छह माह का एक्सटेंशन और दे सकती है। हाल ही में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिन छत्तीसगढ़ दौरे पर थे। छत्तीसगढ़ पुलिस को राष्ट्रपति कलर अवार्ड से सम्मानित किया है।
अमित शाह ने छत्तीसगढ़ पुलिस की खूब तारीफ की, और विशेषकर कोरोना के दौर में छत्तीसगढ़ पुलिस के सहायता अभियान का भी उल्लेख किया। इससे परे शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसको देखते हुए छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अभियान भी चल रहा है। ऐसे में नए डीजीपी की चयन प्रक्रिया में विलंब हो जाए, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इस पूरे मामले में तस्वीर नए साल में ही साफ होने की उम्मीद है।
किसकी चली सूची बताएगी
भाजपा में संगठन चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। कई जिलों में मंडल अध्यक्षों के नाम घोषित भी हो गए हैं। मगर रायपुर शहर जिले के 20 मंडलों के नाम घोषित करने में प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा को पसीना छूट रहा है।
शहर की चारों सीट पर पार्टी के ही विधायक हैं। विधायकों की अपनी पसंद स्पष्ट हैं। कई नेता, जो विधानसभा टिकट से वंचित रह गए थे, वो मंडलों में अपना अध्यक्ष बिठाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। कई दौर की बैठक हो चुकी हैं। फिर भी चार-पांच मंडल ऐसे हैं जहां विवाद ज्यादा है। संकेत है कि यहां प्रदेश संगठन को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। किस नेता की कितनी चली है, यह तो सूची जारी होने के बाद ही पता चलेगा।
विभाग में वापसी
प्रदेश के आदिम जाति विभाग के स्कूली शिक्षकों को लेकर एक खबर सुनी जा रही है । और वह यह कि इन शिक्षकों का पूरा सेटअप एक बार फिर से वापस मूल विभाग को अंतरित किया जा रहा है। बता दें कि भाजपा सरकार के 2008-13 के कार्यकाल में तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने गहरी रूचि लेकर आदिम जाति विभाग का पूरा स्कूली सेटअप, स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन करवा लिया था। इसके पीछे आदिवासी विकास के लिए मिलने वाला बड़ा बजट नजर में था। और कामकाज में इन शिक्षकों को टीचर टी-ट्राइबल और टीचर ई-एजुकेशन का संवर्ग नाम दिया गया। तबादलों के लिए भी एरिया पूर्वानुसार ही रखा। यानी टीचर टी, आदिवासी क्षेत्रों में ही स्थानांतरित किए जाएंगे।
कांग्रेस सरकार ने बिना किसी अड़चन, दिक्कत के इस व्यवस्था को संचालित किया। लेकिन अब फिर से आदिम जाति कल्याण विभाग अपने शिक्षकों की वापसी के लिए जोर लगा रहा है। इस बदलाव के पीछे एक बार फिर बजट ही कारण बना है। अफसरों की इस चाह पर मंत्री जी ने भी सहमति दे दी है। इसके लिए विभाग ने कैबिनेट नोट भी तैयार कर लिया है। सब कुछ सामान्य रहा तो नए सत्र से एक बार फिर टीचर टी और ई अलग-अलग हो जाएंगे। वैसे हाल में विभाग ने एक और अप्रत्याशित फैसला किया है। अब विभाग के एकलव्य विद्यालय भवन, राज्य के निर्माण विभाग पीडब्लूडी के बजाए केंद्रीय उपक्रम एनबीसीसी से बनवाए जाएंगे। 450 करोड़ का वर्क आर्डर भी दे दिया गया है। वैसे पूर्व मंत्री ने इसी बजट में घोषणा की थी कि संयुक्त स्कूल शिक्षा विभाग (यानी टी-ई) के भवन बनाने विभाग में ही कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग विंग खोला जाएगा। जो मंत्री जी के सांसद बनने के बाद से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
सरकार से असंतुष्ट उनके विधायक
छत्तीसगढ़ विधानसभा का संक्षिप्त शीतकालीन सत्र समाप्त हो गया और कार्रवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इस सत्र को इस बात के लिए याद रखा जाएगा कि मंत्रियों से सवाल करने के लिए विपक्ष से कहीं ज्यादा तैयारी सत्ता पक्ष के विधायकों ने की थी। सत्र के अंतिम दिन कानून व्यवस्था धान खरीदी, अस्पतालों की फायर ऑडिट और कुछ अन्य मुद्दों पर सदन में चर्चा कराने की मांग करते हुए कांग्रेस विधायक वेल में जरूर पहुंचे और निलंबित हो गए लेकिन पहली बार के विधायक, नये-नवेले मंत्रियों को ज्यादा परेशान तो उनके अपने ही वरिष्ठ विधायकों ने किया। दंतेवाड़ा के सडक़ निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर दिए गए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के जवाब से अजय चंद्राकर संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने आरोप तक लगा दिया कि भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है। राजेश मूणत ने स्मार्ट सिटी के कार्यों में हुए भ्रष्टाचार, 6 करोड़ की लागत से रायपुर में तैयार फाउंटेन के बंद होने का मुद्दा उठाते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री व उपमुख्यमंत्री अरुण साव को घेरा। विधायक सुशांत शुक्ला और धर्मजीत सिंह ठाकुर ने राजस्व मंत्री के जवाब को सीधे-सीधे गलत ठहरा दिया। उन्होंने पूछा था कि शासकीय जमीन पर कितना कब्जा हुआ, कब्जा करने वाले और इसमें साठगांठ करने वाले अधिकारियों के ऊपर क्या कार्रवाई हुई, जानना चाहा। मंत्री ने करीब 500 अतिक्रमण की जानकारी जवाब में दी तो शुक्ला ने पूरी सूची उनके सामने रखकर बता दिया कि 13000 ऐसी शिकायतें हैं।
बार-बार चंद्राकर का पूरक प्रश्न आने पर आखिरकार डिप्टी सीएम विजय शर्मा को ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की घोषणा करनी पड़ी। वर्मा को कहना पड़ा कि इसके लिए समिति बनाकर जांच कराएंगे, मगर शिकायत तथ्यों के साथ मिलनी चाहिए। डिप्टी सीएम साव से भी कांग्रेस शासन काल के दौरान स्मार्ट सिटी के हुए सभी कार्यों की जांच कराने की मांग की गई, पर ऐसी कोई ठोस घोषणा उनकी ओर से नहीं की गई।
दिखाई ऐसा जरूर दे रहा है कि भाजपा के विधायक अपने ही मंत्रियों से सवाल पर सवाल दाग कर सरकार पर ऊंगली उठा रहे हैं, पर उन्होंने जिन विषयों को उठाया उनमें से अधिकांश पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन के दौरान हुई गड़बडिय़ों से जुड़ा हुआ है। मंत्रियों के जवाब से आभास हो रहा था कि वे तकनीकी उत्तर दे रहे हैं, जो अधिकारियों ने तैयार करके दिया है। यह बात धर्मजीत सिंह ने मंत्री वर्मा से कही भी। फिर भी इन भाजपा विधायकों ने धरसींवा से तीन बार विधायक रहे देवजी भाई पटेल की याद दिला दी, जो अपनी ही सरकार के खिलाफ विधानसभा के प्रत्येक सत्र में आक्रामक नजर आते थे।
गाय भारी पड़ी बाघिन पर..

रात के अंधेरे में वन विभाग के ट्रैप कैमरे से कैद की गई तस्वीर कुछ धुंधली सी है लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ अधिक स्पष्ट वीडियो फुटेज देखी जा सकती है। दिसंबर के पहले सप्ताह में अमरकंटक की ओर से मरवाही के जंगल में यह बाघिन भटकते हुए पहुंची और एक बछड़े का शिकार किया। फिर उसने कुछ दिनों के बाद एक गाय का शिकार करने की कोशिश की। घास चर रही गाय के पीछे-पीछे वह हौले-हौले चलकर नजदीक पहुंच जाती है। गाय उसे देखकर सिर झटकती है, मानो कह रही हो कि चारा खा रही हूं, व्यवधान पैदा मत करो। मगर भूखी बाघिन उछलकर उसे दबोचने की कोशिश करती है। गाय घबराती नहीं, वह अपना सिर घुमाती है और सींग से हमला करने के लिए उछल जाती है। बाघिन यह देखकर घबरा जाती है। दो कदम पीछे हटती है, फिर आगे बढक़र गाय पर चढ़ाई करने की कोशिश करती है। गाय बौखला गई, उसने भी अपनी लंबी टांगों को उठाकर बाघिन को दो-दो हाथ करने की चुनौती दी। बाघिन घबरा गई। वह दो कदम पीछे हटी। बाघिन को गाय ने फिर हडक़ाया, बाघिन और पीछे हटी। अब गाय भारी पड़ गई। बाघिन को अपनी ताकत का अंदाजा नहीं था, वह गाय से घबरा गई। गाय ने उसे दौड़ा दिया और आखिरकार वह उल्टे पांव भाग खड़ी हुई।
ऐसा क्यों हुआ होगा? वन विभाग के अफसरों का कहना है कि बाघिन गर्भवती है। उसे शिकार की जरूरत तो थी लेकिन शायद अपनी कोख की फिक्र थी। गाय सीधे-सीधे हाथ आ जाती तो मंजूर था, मगर गुत्थम-गुत्थी में गर्भस्थ शावकों को नुकसान पहुंच सकता था।


