राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : सॉफ्ट विपक्ष और एग्रेसिव सत्तापक्ष
18-Dec-2024 4:02 PM
राजपथ-जनपथ : सॉफ्ट विपक्ष और एग्रेसिव सत्तापक्ष

सॉफ्ट विपक्ष और एग्रेसिव सत्तापक्ष

विधानसभा में आज की बैठक स्थगित है। चार दिनों के शीत सत्र के पहले दो दिन विधानसभा सदन काफी गर्माहट भरा रहा। इसमें विपक्ष से ज्यादा सत्ता पक्ष के विधायकों की भूमिका रही। इस दौरान जल जीवन मिशन, सरगुजा से बस्तर तक सड? निर्माण, शहरों के सौंदर्यीकरण के नाम पर फिजूल खर्च और अफसरों के भ्रष्टाचार पर अंकुश न लगा पाने पर विभागीय मंत्रियों को आड़े हाथों लिया।

दरअसल, भाजपा विधायक, बघेल शासन के भ्रष्टाचारी अफसर कर्मियों पर एक साल बाद भी कार्रवाई न करते हुए गोद में बिठाए जाने से अधिक नाराज हैं। मंत्रियों पर गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाने और झूठ बोलने तक के भी तोहमत भाजपा विधायकों ने लगाए। इस बार प्रश्नावधि का ट्रेंड भी कुछ नया रहा। वर्ष 2019 से नवंबर 24 की अवधि के कार्यों,गड़बडि?ों पर पूछे गए। यानी भाजपा सरकार का एक वर्ष भी निशाने पर रहा। दो दिनों में विधायकों के टारगेट में खाद्य, वन, राजस्व, लोनिवि, पीएचई, नगरीय प्रशासन जैसे बड़े बजट के विभाग रहे। इन विभागों में पिछले अप्रैल से क्या हो रहा, और हुआ किसी से छिपा नहीं। शायद इसीलिए मंत्री पर विपक्ष की नामजद नारेबाजी पर भी भाजपा विधायक चुप्पी साधे रहे। प्रबोध मिंज, सुशांत शुक्ला, अनुज शर्मा जैसे नए नवेलों के साथ अजय चंद्राकर, धरमलाल कौशिक, राजेश मूणत के तीखे आरोपों से मंत्री कुछ असहज से दिखे। मंत्री न बन पाने के इनके विधायकों के मनोभाव को समझ भूपेश बघेल ने इन्हें मार्गदर्शक मंडल का सदस्य घोषित करते हुए मंत्रियों को संबल अवश्य दिया। विपक्ष की भूमिका साफ्ट आपोजिशन की सी रही। शीत सत्र के अभी दो दिन और हैं। और अब विधेयक पर चर्चा के अलावा प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण सूचनाओं पर चर्चा के लिए पूरा समय रहेगा। और हमले और सुनने देखने को मिलेंगे।

संघ पदाधिकारी के दौरे से हलचल

भाजपा और संघ के बीच समन्वय का देख रहे अरूण कुमार के छत्तीसगढ़ दौरे की काफी चर्चा है। अरूण कुमार की पार्टी संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई है। साथ ही उनकी सरकार के मंत्रियों से भी चर्चा हुई है। बताते हैं कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संभवत: 26 तारीख रायपुर आएंगे। संघ परिवार विशेषकर धर्मांतरण आदि विषयों को लेकर काफी गंभीर है। इन विषयों को लेकर कार्ययोजना बनाई जा रही है। भागवत इन तमाम विषयों पर छत्तीसगढ़ के संघ और भाजपा नेताओं से चर्चा करेंगे । इससे पहले अरूण कुमार, संघ प्रमुख के बैठक से चर्चा के बिन्दुओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं।

भ्रष्टाचार और वाट्सएप पर सुझाव

भ्रष्टाचार और उसमें लिप्त अफसरों कर्मचारियों  पर की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी विधानसभा में क्या आई,लोग अपनी अपनी तरह से विचार रख रहे हैं। गिरफ्तारों की लिस्ट में अखिल भारतीय सेवा संवर्ग के अफसर न होने से आईएएस, आईपीएस आईएफएस की बांछे खिली हुई हैं। हालांकि इनमें कुछ दर्जन जांच का सामना कर रहे हैं, तो भले गिरफ्तारी कम हो लेकिन इस सूची में राज्य संवर्ग के अफसरों की बड़ी हिस्सेदारी है। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के वाट्सएप ग्रुप में व्यक्तिगत और विभागीय भ्रष्टाचार और उससे निपटने के विचार शेयर किए गए। एक ने लिखा जिस विभाग में करप्शन ज्यादा है, उन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के लिए गाईड लाइन जारी होना चाहिए। जिसमें लोगों को अपने काम के लिए पैसे देना ना पड़े। दूसरे ने कहा  अधिकारी कर्मचारी लोगों का काम समय सीमा में पूर्ण करके दे। यह अनिवार्य हो, नहीं तो उनके खिलाफ शासन को कार्यवाही करना चाहिए। अब भला इन्हें कौन बताए समय सीमा में काम के लिए सिटीजन चार्टर दशक डेढ़ दशक से लागू है। उसका ही पालन कर लें तो दिक्कत न हो। और फिर अब तो ई आफिस की भी आनलाइन व्यवस्था है। साहब लोग, टेबल में रूकी फाइल मंगा कर क्लियर कर दे तो? रोकने के पीछे का मकसद ही खत्म हो जाएगा। और भ्रष्टाचार ही न हो। लेकिन अब तो फोन पे, यूपीआई, गूगल पे के इस्तेमाल पर ही फाइल आगे बढ़े तो क्या किया जा सकता है।'

विदाई भोज तो नहीं है?

प्रदेश भाजपा के प्रभारी नितिन नबीन दो दिन पहले पत्रकारों को भोज पर आमंत्रित किया, तो हास-परिहास के बीच कुछ ने पूछ लिया कि यह विदाई भोज तो नहीं है?
दरअसल, बिहार सरकार के मंत्री नबीन को लेकर यह चर्चा है कि वो अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव की वजह से छत्तीसगढ़ के संगठन के दायित्व से मुक्त हो सकते हैं। मगर नबीन ने अनौपचारिक चर्चा में कहा कि वो बरसों से संगठन का काम संभालते रहे हैं। कई मौके ऐसे भी आए हैं जब चुनाव, और संगठन का दायित्व साथ-साथ निभाते रहे हैं। 
संकेत साफ है कि नबीन पद पर बने रहेंगे।

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