राजपथ - जनपथ
चुनाव क्यों रूका?
सरकार ने पंचायत चुनाव के लिए पदों के आरक्षण की प्रक्रिया अचानक स्थगित कर दी है। आरक्षण कब होगा, इसके लिए तिथि अभी तय नहीं है। पहले नगरीय निकाय के साथ ही पंचायत के चुनाव कराने की तैयारी चल रही थी। अब आरक्षण की कार्रवाई रोके जाने के बाद साथ-साथ चुनाव होने की संभावना नहीं है।
बताते हैं कि पंचायत चुनाव अब मार्च में हो सकते हैं। चुनाव टलने के पीछे जो वजह सामने आई है उसका प्रमुख कारण नियम नहीं बन पाना है। सरकार ने पंचायत चुनाव के नियमों में संशोधन के लिए अध्यादेश तो लाए हैं, लेकिन कुछ खामियां रह गई है। इससे परे पार्टी के रणनीतिकार अभी चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है।
पार्टी के लोगों का सोचना है कि अभी प्रदेशभर में धान खरीदी चल रही है, और यह पूरे जनवरी भर चलेगी। इसी बीच में चुनाव कराने से कोई फायदा नहीं होगा। अलबत्ता, धान खरीदी में अव्यवस्था के चलते उल्टे नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होता है। मगर पार्टी समर्थित प्रत्याशी उतारती है। इसलिए चुनाव काफी प्रतिष्ठापूर्ण रहता है। वैसे भी पंचायतों का कार्यकाल फरवरी तक है। ऐसे में जल्द चुनाव कराने का कोई फायदा नहीं दिख रहा था। यही वजह है कि चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।
राईस मिल और अमित जोगी
आखिरकार सरकार के दबाव की वजह से राइस मिलर्स को झुकना पड़ा, और हड़ताल स्थगित करनी पड़ी। हालांकि एक गुट अभी भी हड़ताल पर है। जिसके नेता रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के भाई योगेश अग्रवाल हैं। योगेश ने अपनी सरकार पर आरोप लगाए हैं, और साफ कह दिया कि हड़ताल जारी रहेगी। मगर बाद में उन्होंने भी हड़ताल खत्म करने पर सहमति दे दी। खास बात यह है कि मिलर्स को कांग्रेस और अन्य दलों से कोई सपोर्ट नहीं मिल पा रहा था।
जनता कांग्रेस के मुखिया अमित जोगी ने तो फेसबुक पर अपने पोस्ट में राइस मिलर्स के रवैये की आलोचना की है। उन्होंने लिखा कि मुझसे अनेक राइस मिलर्स एसोसिएशन के लोगों ने मुलाकात की, और सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का अनुरोध किया है।
अमित जोगी ने आगे लिखा कि आज अगर राइस मिलर जिंदा हैं, तो केवल और केवल मेरे पिता स्व. अजीत जोगी जी की बदौलत, जिन्होंने अपने दम पर भारत के इतिहास में पहली बार धान खरीदी शुरू की। और बरसों से बंद पड़ी राइस मिलों को नया जीवनदान दिया। किन्तु राइस मिलरों ने वर्ष-2003-04, 2008-09, 2013-14 में उनके उपकार को भुलाकर भाजपा को वोट किया।
ऐसे में कृतघ्न राइस मिलरों को भाजपा सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव का समर्थन करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। कांग्रेस को भी इनसे दूरी बनानी पड़ेगी, तभी उनको विपक्ष के विकल्प का एहसास होगा।
परसेप्शन बदलें
सोमवार को विधानसभा में दी गई सरकारी जानकारी के मुताबिक एक ट्रेंड देखने में आया है। इससे अभा सेवा के अफसर खासकर आईएएस, आईपीएस, आईएफएस ने आक्रोश मिश्रित संतुष्टि जताया है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार को लेकर दलीय नेता और जनसामान्य नाहक हमें बदनाम करते फिरते हैं। जबकि इसका बोलबाला राज्य कैडर में अधिक है। यह वह दौर था जब कांग्रेस सरकार में खुलेआम भ्रष्टाचार के मामले ईडी, सीबीआई से लेकर ईओडब्ल्यू-एसीबी मामले दर्ज करते रहे हैं। इनमें चाहे रंगे हाथों पकड़ाने के मामले हो या फिर पद का दुरुपयोग कर अनुपातहीन अर्जित करने के। भ्रष्टाचार को इन दोनों ही पैमाने में इनकी हिस्सेदारी अधिक है। इतना ही नहीं कम ही सही जेल भी गए हैं। इन साहब ने कहा परसेप्शन, सोच बदलें।
सदन में दी गई लिखित जानकारी में बताया गया कि बीते पांच वर्ष में रिश्वतखोरी के 87 दर्ज मामलों में दो अधिकारियों के ही सजा हुई। इस दौरान एक भी आईएएस,आईपीएस अफसर रिश्वत लेते रंगे हाथ नहीं पकड़ाया। वर्ष 2019 से 25 नवंबर 24 तक किसी भी अभा सेवा संवर्ग के किसी भी अफसर को रिश्वत लेते नहीं पकड़ा गया। वहीं राप्रसे के 2 और अन्य राज्य सेवाओं के 124 अधिकारियों को पकड़ा गया। इनमें से 87 प्रकरणों में चालान पेश किया गया है। इनमें से दो को सजा हुई। सीएम ने यह भी बताया कि इस दौरान अनुपातहीन संपत्ति के 35 और पद दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार करने के 42 मामले दर्ज किए गए हैं।


