राजपथ - जनपथ
डगर कठिन है घरवापिसी की
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने पार्टी से निलंबित, और निष्कासित नेताओं की वापसी के लिए पहल की है। पायलट ने बकायदा एक सात सदस्यीय समिति बनाई है जो इन नेताओं के आवेदनों पर विचार करेगी। मगर ज्यादातर निष्कासितों के वापसी की राह आसान नहीं है।
जो निष्कासित नेता कांग्रेस में वापसी की कोशिश कर रहे हैं उनमें रामानुजगंज के पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह भी हैं। बृहस्पति सिंह ने विधानसभा चुनाव के पहले टीएस सिंहदेव के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसके बाद उनकी टिकट कट गई, और जब पार्टी चुनाव में हार गई तो उन्होंने सिंहदेव के साथ-साथ तत्कालीन प्रभारी सैलजा पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी।
वो लोकसभा चुनाव के पहले खेद प्रकट कर पार्टी में आना चाहते थे। मगर सिंहदेव इसके लिए तैयार नहीं हुए। और अब भी सिंहदेव तैयार होंगे, इसकी संभावना कम दिख रही है। यद्यपि सिंहदेव कमेटी में नहीं है लेकिन उनके रूख से कमेटी के सदस्य भलीभांति परिचित हैं।
इसी तरह रायपुर की ही एक सीट से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लडऩे वाले एक नेता भी पार्टी में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। रायपुर दक्षिण उपचुनाव में नेताजी ने एक जगह कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में सभा करवाई थी, और पंडाल व खाने का खर्चा भी वहन किया था।
ये अलग बात है कि जिस इलाके में निष्कासित नेता ने मेहनत की थी वहां पार्टी प्रत्याशी को कोई फायदा नहीं हुआ। इससे परे कुछ ऐसे नेता भी हैं जो भूपेश बघेल के खिलाफ बयानबाजी कर भाजपा में चले गए थे। भाजपा में उनकी पूछ परख नहीं हो रही है। ऐसे नेता पार्टी में ससम्मान वापस आना चाहते हैं। कमेटी इस पर क्या फैसला लेगी, इस पर नजरें हैं। देखना है आगे क्या होता है।
सरकार, मिल मालिक, और जांच
प्रदेश में राइस मिलर्स की हड़ताल से धान खरीदी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मिलर्स की कुछ मांगों को तो सरकार ने मान लिया है, लेकिन एक मांग ऐसी है जिसे पूरा करना सरकार के लिए मुश्किल है। मिलर्स मिलिंग की वर्ष 2021-22 की बकाया भुगतान देने की मांग कर रहे हैं। जिसके लिए सरकार तैयार नहीं है। वजह यह है कि ईडी कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में ईडी ने पिछली सरकार और मिलर्स के गठजोड़ से एक बड़े भ्रष्टाचार की गड़बड़ी का खुलासा भी किया है।
बावजूद इसके मिलर्स अपनी मांग से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। सरकार ने मिलर्स की हड़ताल को तुड़वाने की कोशिश भी की है, और चर्चा है कि इसमें कुछ हद तक सफलता भी मिली है। शनिवार की रात एक बैठक भी होने वाली थी जिसमें करीब 50 मिलर्स के साथ डिप्टी सीएम अरूण साव व खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल चर्चा करने वाले थे। मगर बैठक ऐन वक्त में स्थगित हो गई। सरकार के लोग मिलर्स नेताओं को किनारे कर सीधे व्यक्तिगत तौर पर मिलरों से चर्चा कर रही है। देखना है सरकार मिलर्स को मनाने में किस हद तक कामयाब हो पाती है।
नाम का स्वागत

ऐसा कहा जा रहा है कि तकनीक लोगों की सुविधा बढ़ाने के लिए ऩ केवल ईजाद की जाती है बल्कि इस्तेमाल भी होती है । लेकिन सरकारी अमला पुराने ढर्रे पर ही चलना चाहे तो कुछ नहीं किया जा सकता। ऐसा ही कुछ मंत्रालय में इन दिनों हो रहा है । सरकारी कामकाज के लिए साहबों से मिलने के लिए एंट्री पास की मैन्यूअल सुविधा खत्म हो गई है। पेन, पर्ची की जगह स्वागतम एप ने ले ली है। अब मंत्रालय रवाना होने से पहले क्लिक कर आनलाइन पास हासिल किया जा सकता है। लेकिन साहबों की उपलब्धता वैसी ही है जैसे बीते 23 वर्षों के दौरान रहती रही। वे मिलते ही नहीं । और जब आफिस में रहते हैं तो बैठकों में व्यस्त या दौरे पर होते हैं। घंटों इंतजार के बाद मुलाकाती के पास घर वापसी ही विकल्प रह जाता है। एक दिन में बनने वाले सैकड़ों स्वागतम पासधारी कुछेक दर्जन भर की ही साहबों से मुलाकात या काम हो पाता है।
काश इस एप में यह भी बता दिया जाता है कि आप जिन साहब से मिलने जा रहे हैं वो आफिस में हैं या नहीं। न होने की स्थिति में नागरिकों का समय, खर्च दोनों ही बच जाते। स्वागतम की तकनीक में इसकी भी व्यस्था कर दी जाए। और अफसर प्रवास, बैठक में होने की एंट्री कर आम लोगों से मुक्त, बिंदास हो जाएंगे।


