राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : 60 से ही मार्गदर्शक मण्डल में !!
11-Dec-2024 3:23 PM
 राजपथ-जनपथ : 60 से ही मार्गदर्शक मण्डल में !!

60 से ही मार्गदर्शक मण्डल में !!

भाजपा में संगठन चुनाव चल रहे हैं। यह पहला मौका है जब संगठन में अलग-अलग पदों के लिए आयु सीमा निर्धारित कर दी गई है। मंडल अध्यक्ष के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष है, तो 60 से कम आयु वाले ही जिलाध्यक्ष बन सकते हैं। आयु सीमा में किसी तरह की  छूट नहीं दी जा रही है, और पदाधिकारी की नियुक्ति से पहले आयु को लेकर प्रमाण पत्र भी दिखाना होगा। 

यह भी तय किया गया है कि किसी भी मंडल अध्यक्ष को रिपीट नहीं किया जाएगा। सभी मंडल से तीन-तीन नाम का पैनल बनाए जा रहे हैं, और जिले की कोर कमेटी एक नाम पर मुहर लगाएगी। सारी प्रक्रिया 20 तारीख तक पूरी कर ली जाएगी। खास बात यह है कि पार्टी ने महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए पहल की है। मगर दिक्कत यह है कि मंडल अध्यक्ष के लिए सक्रिय नेत्रियों की कमी नजर आ रही है। शहर के हरेक मंडल में 4 से 5 वार्ड आते हैं। ऐसे में अध्यक्ष का पद काफी अहम है। इस बार के चुनाव की खास बात यह है कि पार्टी में 60 पार हो चुके नेताओं की पूछपरख कम हो रही है, और एक तरह से वो हाशिए पर धकेल दिए जा रहे हैं। स्वाभाविक है कि ऐसे नेताओं ने बेचैनी दिख रही है।

कांग्रेस में फेरबदल की फुरसत नहीं 

नगरीय निकाय-पंचायत चुनाव के बीच प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी के पुनर्गठन को लेकर हलचल है। कई पदाधिकारियों ने विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी छोड़ दी थी। ऐसे उपाध्यक्ष, और महासचिव के रिक्त पदों पर नियुक्ति जल्द हो सकती है। 

चुनाव की घोषणा जल्द होने वाली है। इसके लिए अलग-अलग समितियों का गठन होना है। चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट से चर्चा कर एक सूची तैयार की है। वो गुरुवार को दिल्ली में पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ बैठक कर अपनी बात रखेंगे। वो सूची को जल्द से जल्द मंजूरी देने का आग्रह करेंगे। बैज के दिल्ली प्रवास पर पार्टी नेताओं की निगाह लगी हुई है। देखना है चुनाव को लेकर पार्टी क्या कुछ करती है।  

रकम ले गए चोर, भरें कर्मचारी 

हाल के वर्षों में कई हितग्राही मूलक योजनाओं के पेमेंट के लिए डाकघरों में एक मुश्त कम से कम एक लाख रुपए तो रहते ही हैं। और  डाकघरों में सेंधमारी की घटनाएं बढ़ी हैं। पहले सरगुजा बलरामपुर की ओर हुई और अब महासमुन्द धमतरी में। जहां सेंधमारों को  लाखों हाथ लगे। धमतरी में सर्वाधिक 6 लाख एक ही बार में मिले। यह डाकघर थाने के पीछे ही है। और डाकघर में सीसीटीवी कैमरे हैं ये अलग बात है कि ये महीनों से खराब बंद हैं। इन्हें सुधारने पोस्ट मास्टर कई बार अफसरों से गुहार लगा चुका था। वो तो नहीं हुआ लेकिन अब अफसर, लकीर पीट रहे हैं। पुलिस तफ्तीश करे तो भी कैसे। डाकघर समेत रास्ते के अन्य कैमरे भी खराब है। उसे बस मुखबिरों का सहारा है। 

मगर डाक अमला चोर के पकड़े जाने और रकम रिकवरी कि वेट नहीं करता। इसे शासकीय धन मानकर तत्काल अकाउंट में क्रेडिट चाहता है। इसके लिए पोस्ट मास्टर और कैश क्लर्क पर पूरी रकम जमा करने दबाव बनाया जा रहा। इनका कहना है कि उस दिन काम खत्म होने पर हमने पूरी सुरक्षा तालाबंदी की थी। हम कहां दोषी। लेकिन मुख्यालय के अफसरों को किंतु परंतु से मतलब नहीं। पहले वे सुरक्षा खामियों को पूरा करने में अनदेखी करते हैं और फिर वारदात कम बाद छोटे कर्मचारी पर ठीकरा फोडऩा ही तो अफसरों का काम है। डाकघरों की सुरक्षा को लेकर यह अनदेखी दूर के डाकघर ही नहीं राजधानी के मुख्य डाकघर में भी है। कैमरे चालू या नहीं यह हमने टेस्ट नहीं किया। लेकिन देर रात तक परिसर में कई असामाजिक तत्वों की आवाजाही बनी रहती है। सभी का सायकल स्टैंड में जमावड़ा रहता है। और सभी यहां के एंट्री, एग्जिट के साथ पूरी टोपोग्राफी जानते हैं। यहां भी सचेत होने की जरूरत है,वर्ना अनहोनी कभी भी घट सकती है।

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