राजपथ - जनपथ
रामलाल के आने से हलचल
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) रामलाल दो दिन रायपुर में थे। रामलाल करीब 13 साल भाजपा संगठन की धुरी रहे हैं। लिहाजा, उनके आगमन पर कुशाभाऊ ठाकरे परिसर से लेकर संघ मुख्यालय जागृति मंडल तक हलचल रही। इस दौरान कई प्रमुख नेताओं से उनकी बैठक हुई।
रामलाल वर्तमान में आरएसएस के संपर्क प्रमुख का काम देख रहे हैं। वो कृषि मंत्री रामविचार नेताम से भी मिले। नेताम पिछले दिनों सडक़ दुर्घटना में घायल हो गए थे। उन्होंने नेताम का हालचाल जाना। उनकी क्षेत्रीय महामंत्री (संगठन) अजय जामवाल, और महामंत्री (संगठन) पवन साय के साथ लंबी बैठक हुई। कहा जा रहा है कि संघ परिवार धर्मांतरण के मामलों को लेकर काफी चिंतित है। इस पर अंकुश लगाने के लिए सामाजिक, राजनीतिक, और प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाने के लिए योजना बनाई गई है। रामलाल के दौरे को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
रामलाल से मिलने वालों में सतनामी समाज के गुरु पूर्व मंत्री विजय गुरु भी थे। मंगलवार को सुबह दिल्ली रवाना हुए तो उनकी मध्य प्रदेश के खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के साथ एयरपोर्ट के वीआईपी लाउंज पर काफी देर चर्चा हुई। इस दौरान संघ के कई पदाधिकारी मौजूद थे।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेताओं का क्या?
कर्नाटक के बेलगाम में कांग्रेस के सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई। बैठक से परे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, और अन्य नेताओं ने महाराष्ट्र, और हरियाणा से परे छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में हार और लोकसभा चुनाव में खराब परफार्मेंस की पड़ताल के लिए बनी वीरप्पा मोइली कमेटी की रिपोर्ट पर भी चर्चा की। चर्चा के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी में बड़े बदलाव के संकेत भी मिले हैं। बदलाव अभी होगा या फिर निकाय-पंचायत चुनाव के बाद, इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने जिला और ब्लॉक अध्यक्षों को बदलने के लिए अनुमति मांगी थी जो कि नहीं मिल पाई है। संकेत यह भी है कि पूर्व सीएम भूपेश बघेल, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत व पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को कोई अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।
कहा जा रहा है कि भूपेश को राष्ट्रीय महासचिव बनाया जा सकता है। इससे परे पार्टी ईवीएम के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की शुरुआत करने जा रही है। छत्तीसगढ़ में भी नगरीय निकाय के चुनाव हैं। नगरीय निकाय चुनाव ईवीएम से होंगे। जबकि कांग्रेस सरकार में बैलेट पेपर से चुनाव कराए गए थे। ईवीएम के खिलाफ आंदोलन के बीच पार्टी निकाय चुनाव को लेकर क्या कुछ फैसला करती है इस पर भी निगाहें टिकी हुई है।
नए प्रिंसिपल, नई साज-सज्जा

प्रदेश के सरकारी कॉलेजों की गुणवत्ता जांचने के लिए नैक की टीम रायपुर पहुंच गई है। नैक के मापदंडों में खरा उतरने के लिए सरकारी कॉलेजों के लोग जुट गए हैं। रायपुर में कई कॉलेजों नए प्राचार्य आ गए हैं। ये सभी अपनी कार्य क्षमता दिखाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। ऐसे ही रायपुर के सबसे पुराने कॉलेजों में से एक छत्तीसगढ़ कॉलेज को खूब सजाया गया है। यहां कुछ दिन पहले डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता की प्राचार्य के पद पर पोस्टिंग हुई है। डॉ. गुप्ता ने अपने स्तर पर कॉलेज में किसी तरह कोई कमी न दिखे, इसके लिए कोशिश की है। अब नैक की टीम पर निगाहें हैं कि वो क्या कुछ खामियां निकालती है।
फोन-पे, पेटीएम वाले खेते गए
मंत्रालय कैडर में पिछले दिनों उप सचिव से लेकर कनिष्ठ सचिवालय सहायक यानी लिपिक ग्रेड 3 तक 150 से अधिक पदोन्नतियां हुईं। और फिर पखवाड़े भर बाद सबकी नई पोस्टिंग। इन 15 दिनों के दौरान इनकी पोस्टिंग को लेकर विभाग के आईएएस सचिव ने खूब मंथन किया। सबका गुणा भाग पता किया। यानी कौन कितने वर्ष से एक ही विभाग में जमा हुआ है। उसका आदत आचरण संनिष्ठा कैसी है। इस जांच में सचिव महोदय को बाबू से लेकर अवर सचिव की कई रोचक फीडबैक मिला।
कुछ तो राज्य बनने के 24 वर्षों में से 21 वर्ष से एक ही विभाग में पदस्थ रहे। जबकि इतने वर्षों में पांच सरकारें बदलीं। इस दौरान मिले 2-3 पदोन्नति के बाद भी टस से मस नहीं हुए थे। 10 वर्ष वाले तो ढेरों मिले। इसी तरह से वेतन के अलावा फाइल मूवमेंट पर नजर रख फोन-पे, यूपीआई, गूगल-पे, पेटीएम का इस्तेमाल करने वाले भी बड़ी संख्या में मिले। इनमें तो महिला कर्मचारी भी शामिल हैं।
इस तरह की बारीक छंटनी के बाद जीएडी ने पोस्टिंग आर्डर निकाला। तो फोन-पे, पेटीएम वाले थे। ये आदत इनमें से अधिकांश वल्लभ भवन से विरासत में लेकर आए हुए थे। यह आदत इतनी ठोस रही कि एक उप सचिव साहब ने अपने बेटे के लिए अस्पताल भवन तक बनवाकर दिया। हालांकि यह आदत कोरोना की तरह बाकी में भी वायरल है। लेकिन धीरे धीरे इसका इलाज जारी है।
इनमें से कई अब लूप लाइन कहे जाने वाले विभागों में खेत दिए गए। ऐसे तबादले इसलिए संभव हो सके कि स्वयं मंत्रालय कर्मचारी संघ ने ही मुख्य सचिव और जीएडी सचिव से लिखित में मांग कर रखी थी। अब तक ऐसा कभी नहीं हो पाया था।संघ के नेताओं ने गृह, लोनिवि,पीएचई,जल संसाधन, नगरीय प्रशासन जैसे बड़े बजट और लाइमलाइट वाले विभागों में कुछ लोगों की पोस्टिंग प्रमोशन की मोनोपोली खत्म करने का बीड़ा उठाया था, और सफल रहे।


