राजपथ - जनपथ
10 वर्ष में ही छोटे, महानदी-इंद्रावती
दस वर्ष पहले जब नवा रायपुर में महानदी और इंद्रावती भवन का कांसेप्ट प्लान बनाया गया था तब राज्य के इन प्रशासनिक मुख्यालयों को अगले 30 वर्ष के स्टाफ स्ट्रेंथ और जरूरत के अनुसार निर्मित करने की बात कही गई थी। लेकिन मप्र से विभाजित पुराने ही सेटअप के अनुसार सेक्शन डिजाइन किए गए। और यह तीन से पांच मंजिले भवन दस वर्ष बाद ही स्थानाभाव से गुजर रहा है। इस दौरान सैकड़ों भर्तियां होने से एक कमरे और एक एक कुर्सी की मारामारी मची हुई है । हाल यह है कि वाणिज्य उद्योग का अनुभाग स्टाफ ग्रामोद्योग में,श्रम का धार्मिक न्यास,खेल का अमला सहकारिता में , पशुपालन मछलीपालन एक कक्ष,जनसंपर्क और खाद्य एक साथ, राजस्व-धर्मस्व को एक कमरे में व्यवस्थित किए गए हैं। खाली में केवल समाज कल्याण विभाग है।
तीसरी मंजिल पर 13 अनुभाग वाले जीएडी का, और दूसरी मंजिल में वित्त और गृह का कब्जा है?। जल संसाधन विभाग में तो स्टाफ के मुकाबले आलमारियां अधिक हैं। मानो आलमारी फैक्ट्री हो। स्वास्थ्य विभाग का अनुभाग आफिस कम, किसी अस्पताल का पूरा वार्ड लगता है। अफसरों की बैठक व्यवस्था अस्त व्यस्त है।इन सबके सचिव, उप-अवर सचिव और एसओ सभी अलग अलग फ्लोर में बैठते हैं। कई प्रमुख सचिव, संसदीय सचिवों के कक्ष में बिठाए गए हैं। ऐसा मंत्रालय में आवश्यकता से अधिक डिप्टी कलेक्टरों और अन्य विभागीय अफसरों के ओएसडी के रूप में नियुक्त किए जाने से हुआ है । जब कमरे खाली थे तो इन्होंने अलॉट करा लिए। अब आईएएस सचिवों के लिए कमरे नहीं है । आने वाले महीने में पदोन्नत होने वाले 40 सचिव, विशेष सचिव कहां बिठाए जाएंगे। यह बड़ी समस्या हो गई। शायद इसी समस्या का पूर्वाभास करते हुए ही अधीक्षण शाखा के अफसर ने अपना ही तबादला करवा लिया। कुछ ऐसा ही हाल इंद्रावती भवन में भी है। जबकि पर्यावास भवन, अरण्य भवन, पीएचक्यू,पीएचई का नीर भवन, पंचायत, जीएसटी संचालनालय ,एनआरडीए, विकास भवन,संवाद, शिवनाथ भवन, लोनिवि, योजना भवन सब अलग-अलग हैं।
आईएएस पदोन्नति के लिए नोट शीट चली
साप्रवि ने मुख्यमंत्री को नोट शीट भेजकर अतिरिक्त मुख्य सचिव,प्रमुख सचिव और सचिव,विशेष सचिवों की पदोन्नति के लिए अनुमति मांगी है। सीएम की अनुमति मिलने के बाद डीओपीटी के पत्र भेजकर पदोन्नति समिति गठित कर पदोन्नति की सिफारिश की जाएगी। यह प्रोसेस, के साथ ही अगला मुख्य सचिव कौन होगा? इसकी भी हलचल बढ़ा रहा है। हालांकि अमिताभ जैन 30 जून को रिटायर होने वाले हैं। इस पद के लिए सबसे वरिष्ठ एसीएस होने के नाते रेणु पिल्ले स्वाभाविक दावेदार है। साफ सुथरी, रिजल्ट ओरिएंटेड अफसर रेणु पिल्ले भाजपा की मातृशक्ति के नारे को भी पूरा करती हैं। उनकी नियुक्ति,24 वर्ष में पहली बार महिला मुख्य सचिव की कमी भी पूरी करेगी। वैसे इनसे पहले इंदिरा मिश्रा एसीएस के नाते सीएस के रैंक तक पहुंची थीं। लेकिन उनके पति एसके मिश्र बनाए गए। रेणु यदि राजनीतिक दृष्टि से पिछड़ती हैं तो मनोज पिंगुवा पर विचार हो सकता है ।। बहरहाल एसीएस के दो पदों के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए मनिंदर कौर द्विवेदी और गौरव द्विवेदी दो ही नाम हैं। दोनों को प्रोफार्मा प्रमोशन देना होगा। इनसे रिक्त होने वाले प्रमुख सचिव के पदों पर सुबोध सिंह, निहारिका, शहला निगार पदोन्नत होंगी। उनके बाद सचिव,विशेष और संयुक्त सचिव के लिए लंबी लिस्ट है। आईएएस लॉबी का जोर है कि यह डीपीसी इसी माह हो जाए। वैसे भी 1 जनवरी से देय पदोन्नति के लिए दिसंबर में ही आर्डर की परंपरा भी रही है।
केवी मिला पर नवोदय नजरअंदाज
जवाहर नवोदय विद्यालयों में प्रवेश प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा के माध्यम से होता है। यहां 6वीं से 12वीं तक की नि:शुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केंद्र सरकार की फंडिंग से दी जाती है। यही कारण है कि राज्यों में नवोदय विद्यालयों की स्वीकृति के लिए होड़ मची रहती है। वर्तमान में देशभर में 661 नवोदय विद्यालय हैं। हाल ही में मोदी कैबिनेट ने 28 नए नवोदय विद्यालयों को मंजूरी दी है, लेकिन इनमें से एक भी छत्तीसगढ़ के हिस्से में नहीं आया।
स्वीकृत नवोदय विद्यालयों में अरुणाचल प्रदेश को 8, तेलंगाना को 7, असम को 6, मणिपुर को 3, पश्चिम बंगाल को 2, और महाराष्ट्र व कर्नाटक को 1-1 विद्यालय मिले हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ को नए 85 केंद्रीय विद्यालयों में से 4 विद्यालय (मुंगेली, बेमेतरा, सूरजपुर और जांजगीर-चांपा) जरूर आवंटित हुए हैं।
अगर देशभर के नवोदय विद्यालयों की सूची देखें, तो अतीत में भी छत्तीसगढ़ को आवंटन कम ही रहा है। प्रदेश में केवल 16 नवोदय विद्यालय हैं, जबकि हरियाणा जैसे समान आकार वाले राज्य में 21, गुजरात में 28, कर्नाटक में 27 और झारखंड में 24 विद्यालय हैं। यह स्थिति तब है जब छत्तीसगढ़ के तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने फरवरी में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर प्रदेश के सभी 33 जिलों में केंद्रीय विद्यालय या नवोदय विद्यालय स्वीकृत करने की मांग की थी।
जवाहर नवोदय विद्यालयों में आवासीय सुविधा होती है, जहां गरीब परिवारों के मेधावी बच्चों को मुफ्त भोजन, आवास और शिक्षा मिलती है। अगर छत्तीसगढ़ को कुछ नए नवोदय विद्यालय मिलते, तो प्रदेश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर अवसर मिलते। चार नए केंद्रीय विद्यालयों की स्वीकृति तो ठीक है, पर नवोदय विद्यालयों की मंजूरी में उदारता बरती जाती तो गरीब प्रतिभावान बच्चों को अधिक मौके मिलते।
बंदरों की पसंदीदा काली मिट्टी

भरतपुर-सोनहत के जंगलों में घूमते हुए मिट्टी की दिलचस्प संरचना दिख सकती है। यहां की काली मिट्टी में बड़े-बड़े गोल गड्ढे नजर आते हैं, जो जंगली जानवरों की खास रुचि का संकेत देते हैं। स्थानीय लोगों और जंगल से गुजरने वालों के अनुसार, इस मिट्टी को जानवर बड़े चाव से खाते हैं, खासकर बंदर। वे इसे कुरेद-कुरेदकर खाते हैं, जिससे ये गड्ढे बन जाते हैं। यह मिट्टी जंगल के कुछ ही हिस्सों में पाई जाती है और इसका स्वाद हल्का नमकीन होता है, जो जानवरों को आकर्षित करता है। मिट्टी का यह स्वाद उनकी आदत में शामिल हो चुका है। इससे उनके शरीर में नमक की जरूरत पूरी हो जाती है।


